रविवार, 25 जुलाई 2010

पश्चिम बंगाल में काल बना मलेरिया, दवा बेअसर

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में मलेरिया काल का रूप धारण कर गया है। अलीपुरद्वार, नागराकाटा व कालचीनी समेत 15 ब्लॉक मलेरिया के रेड जोन के रूप में चिह्नित किए गए हैं। यहां पर वर्षो से कारगर मलेरिया की दवाएं बेअसर हैं। क्लोरोक्वीन दवा मलेरिया रोकने में असफल रही है। यह बताया है खुद स्वास्थ्य विभाग ने। हालत यह कि मलेरिया से मरने वालों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। हालात से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग जिले में सेकेंड लाइन ट्रीटमेंट शुरू कर रहा है। विभाग के अनुसार मानसून के दौरान मलेरिया का प्रकोप बढ़ जाता है। पिछली बार बाढ़ के कारण उपचारात्मक उपाय करने में काफी दिक्कत हुई थी लेकिन इस बार प्रशासन सतर्क है और बचाव के इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले में प्लाजमोडियम फेलसीफेरम (पीएफ) से पीडि़तों की संख्या अधिक है। फिलवक्त डुवार्स के विभिन्न इलाकों में फ‌र्स्ट लाइन ट्रीटमेंट (मलेरिया की दवाएं क्लोरोक्वीन व प्राइमाक्वीन) काम नहीं कर रही हैं। इसी कारण से वैकल्पिक विशेष इलाज का सहारा लिया जा रहा है। चालू वर्ष में मलेरिया से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। पीडितों की संख्या 2620 है, जिसमें पीएफ मरीजों की संख्या 980 है। पीएफ मलेरिया से ज्यादातर पीडित अलीपुरद्वार, कुमारग्राम, नागराकाटा, कालचीनी व मालबाजार ब्लॉक में हैं। वनबस्ती बहुल इलाके में व नागराकाटा में पीडितों की संख्या 421 है। जलपाईगुड़ी के मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी राधारमण बनिक ने कहा है कि सेकेंड लाइन ट्रीटमेंट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है लेकिन प्रकोप को देखते हुए भविष्य में नई चुनौती सामने आ सकती हैं(अभिजीत बोस,दैनिक जागरण,जलपाईगुड़ी,25.7.2010)।

1 टिप्पणी:

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