रविवार, 20 जून 2010

ऐसे मिलेगी दिल्ली को झोलाछाप डाक्टरों से मुक्ति!

दिल्ली को झोलाछाप डाक्टरों से मुक्ति दिलाने के लिए 40 साल भी कम ही पड़ेंगे। यह बात उन पर लगाम कसने के लिए कार्य कर रही एजेंसियों का रिकार्ड बयां कर रहा है। डीबीसीपी, डीएमसी व बीएचएवएमडी ने वर्ष 2004 से अब तक मात्र 200 झोलाछाप डॉक्टरों को पकड़ा है। इनमें से मात्र 20 के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है। अन्य के मामले अदालत में लंबित पड़े हैं। इस स्थिति को देखकर इन एजेंसियों के उदासीन रवैये का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने में बोर्ड आफ होम्योपैथी सिस्टम आफ मेडिसीन दिल्ली सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। इसने अब तक मात्र 30 फर्जी डाक्टरों को पकड़ा है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल की बात करें तो यहां वर्ष 2004 में काउंसिल चुनाव के बाद कार्रवाई में तेजी आई और अभी तक 100 फर्जी डाक्टरों को पकड़ा। इनमें से पांच के खिलाफ फैसला आया और उन्हें सजा मिली। अन्य मामले अदालत में लंबित है। पिछले दिनों बड़े पैमाने पर छापेमारी कर वाहवाही लूटने वाली दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद का रिकार्ड भी संतोषजनक नहीं है। परिषद ने वर्ष 2002 से अब तक मात्र 50 झोलाछाप डॉक्टरों को पकड़ा है। इनमें से 15 के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। अन्य मामले अदालत में विचाराधीन हैं। ये आंकड़े इशारा करते है कि यदि एजेंसियां इसी चाल से कार्य करती रहीं तो 40 साल भी झोलाछाप डाक्टरों का सफाया करने के लिए कम पड़ेंगे। क्यों नहीं हो सकी पूर्ण कार्रवाई झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर कोई स्पष्ट आंकड़ा किसी के भी पास नहीं है। इन एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि इस समय यहां 40 हजार से अधिक फर्जी डाक्टर धंधा चला रहे हैं। यदि तीनों एजेंसियां संयुक्त रूप से छापेमारी करें तो बड़ी संख्या में फर्जी डाक्टर गिरफ्त में आ सकते हैं। इनके बीच समन्वय की कमी ने ऐसे लोगों के हौसले बढ़ा दिए हैं(अश्विनी वशिष्ठ,दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,20.6.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. छापेमारी सिर्फ दिखावा है। ये चाहें तो हद से हद एक सप्ताह में झोलाछाप डॉक्टरों से छुटकारा मिल जाए। जब दिल्ली का ये हाल है तो बाकी देश का तो सच में ही भगवान ही मालिक है। कडे नियम बनें अगर हैं तो उन्हें तेजी से अमल में लाया जाए तो इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। पर इच्छाशक्ति की कमी हर जगह साफ दिखती है। एक बार पकड़े जाने पर आखिर नोटिस क्यों दिया जाता है सर्टिफिकेट दिखाने का। तुरंत गिरफ्तारी हो जाए तो फिर कोई जल्दी हिम्मत नहीं करेगा।

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