सोमवार, 24 मई 2010

मध्यप्रदेश में जारी है भ्रूण-परीक्षण। रोकने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार

मध्यप्रदेश में,प्रसव- पूर्व लिंग परीक्षण अधिनियम (पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट) का भय किसी भी डॉक्टर को नहीं है। यह अधिनियम केवल कागजी शेर बनकर रह गया है। अधिनियम का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान न होने से लिंग परीक्षण को डॉक्टरों ने पैसा कमाने का जरिया बना लिया है।
भोपाल के संभागायुक्त मनोज श्रीवास्तव ने रविवार को प्रशासन अकादमी में पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के विभिन्न मुद्दों पर आयोजित कार्यशाला में कहा कि सभी सोनोग्राफी सेंटर्स और नर्सिग होम्स को हर माह एफ फॉर्म भरकर देना जरूरी होना चाहिए। फॉर्म भरकर न देने वालों के खिलाफ सीएमएचओ को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सेंटर्स व नर्सिग होम्स पर नजर रखने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाए जो छह माह तक इसकी मॉनीटरिंग करेगी और सीएमएचओ को रिपोर्ट देगी। गौरतलब है कि पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के अंर्तगत एफ-फॉर्म भरा जाता है। इसमें गर्भवती महिला का पूरा नाम, पता, सोनोग्राफी का प्रकार, तारीख, गर्भस्थ शिशु की स्थिति , बीमारी, सोनोग्राफी करने वाली संस्था और डॉक्टर सहित कुल 19 कॉलम में जानकारी भरकर देनी होती है।
भोपाल के कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव ने कहा कि प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण बहुत बड़ी समस्या है। इसमें शिक्षित लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बालिका भ्रूण हत्या को रोकने के लिए प्रशासन पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के अंर्तगत सख्त कार्रवाई करेगा। सीएमएचओ पंकज शुक्ला ने कहा कि सोनोग्राफी सेंटरों और नर्सिग होम्स की मॉनीटरिंग के लिए जल्दी ही टीम गठित कर दी जाएगी।
कार्यशाला में यूएनएफपीए के स्टेट प्रोग्राम अधिकारी तेजराम जाट ने लिंग परीक्षण के कारणों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला का आयोजन सक्षम प्राधिकारी पीएनडीटी कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी जिला भोपाल और मप्र वॉलन्ट्री हेल्थ एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
सॉफ्टवेयर रोकेगा भ्रूण हत्या
मध्यप्रदेश में भ्रूण हत्या रोकने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। वर्तमान में इंदौर और ग्वालियर जिलों में इसकी मदद ली जा रही है। अब भोपाल में भी इस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए मॉनीटरिंग कमेटी का गठन किया जा रहा है।
प्रदेश में भ्रूण हत्या के मामले में ग्वालियर अग्रणी है। यही कारण है कि यहां स्त्री-पुरुष अनुपात में 43 प्वाइंट की कमी आई है। इंदौर में 37 और भोपाल में स्त्री-पुरुष अनुपात में 13 प्वाइंट की कमी आई है। इसको देखते हुए मप्र वॉलेंट्री हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिससे भ्रूण हत्या को ट्रैक किया जा सकता है।
दरअसल, इस सॉफ्टवेयर में एक ऐसा फॉर्मेट है, जो जिले के अल्ट्रा सोनोग्राफी सेंटर्स द्वारा भरे गए फॉर्म को चेक कर उन्हें ट्रैक करता है। आर्गेनाइजेशन द्वारा इस फॉर्म को कलेक्टोरेट से प्राप्त किया जाता है। फॉर्म में महिला को पहले कितने बच्चे हैं और कब-कब हुए, रैफर स्लिप और किस कारण से रैफर किया गया, किस डॉक्टर ने रैफर किया आदि जानकारी होती है। इसे हर सेंटर द्वारा भरना जरूरी होता है। यदि रैफर स्लिप से थोड़ी भी छेड़छाड़ की गई हो तो सॉफ्टवेयर उसकी जानकारी दे देता है। एक माह के भीतर भोपाल में भी यह सॉफ्टवेयर कार्य करने लगेगा। इसके लिए मॉनीटरिंग कमेटी का गठन किया जाएगा। इसमें 50 फीसदी मेडिकल ऑफिसर और 50 फीसदी नॉन मेडिकल फील्ड (एनजीओ अथवा समाजसेवा से जुड़े) के लोग होंगे।
मध्यप्रदेश वालेंट्री हेल्थ ऑर्गनाईजेशन के कार्यपालक संचालक श्री मुकेश सिन्हा का कहना है कि कई जिलों में लड़कियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। यह सॉफ्टवेयर भ्रूण हत्या को ट्रैक करने में मददगार साबित होगा। इसके भय से अल्ट्रा सोनोग्राफी सेंटर्स भ्रूण हत्या में मदद नहीं करेंगे। इंदौर, ग्वालियर में इसके बेहतर नतीजे आए हैं(दैनिक भास्कर,भोपाल,24.5.2010)

3 टिप्‍पणियां:

  1. अरे यार मध्यप्रदेश की क्या बात करते हो ,आप तो पत्रकार हो दिल्ली में हर जगह इससे बड़ा क्राइम हो रहा है ,रही बात भ्रूण परीक्षण पर रोक ,तो इसका आधार ही खोखला है / इसलिए इसे लागू किया ही नहीं जा सकता / महिलाओं या बच्चियों की सुरक्षा जब महिला आयोग नहीं कर पाती है तो ऐसे में कौन प्रेरित होगा लड़की को जन्म देने के लिए / लडकियों की सबसे बरी दुश्मन तो इस देश की सरकार है जो लड़कियों और महिलाओं के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार का खेल खेलती है / लड़कियों की सुरक्षा करनी है तो पहले मनमोहन सिंह और सोनिया जी को अपनी अंतरात्मा लड़कियों के प्रति साफ करनी होगी / ढोंग रचने से कुछ नहीं होगा / वैसे आपने जानकारी आधारित अच्छी पोस्ट प्रस्तुत की है ,हम चाहते हैं की लोग इस पोस्ट पड़ लड़कियों की दिल्ली में स्थिति की जमीनी हकीकत बयान करें /

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  2. paise ke ye bhoonkhe doctor, kya na kar jayen

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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  3. सामाजिक समस्याओं को कानून से ठीक करने के प्रयास ज्यादातर सफल नहीं होते . यह एक भ्रष्टाचार का कारण और उगाही का धन्दा बन रहा है.

    इस कानून ने इस बात का और प्रचार कर दिया की इस तरह की तकनीक उपलब्ध है जो लिंग परीक्षण कर सकती है .मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों दवा की .

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