सोमवार, 17 मई 2010

हरियाणा में थैलेसीमिया इलाज़ हुआ फ्री

हरियाणा के थैलीसीमिया पीड़ित बच्चे अब महंगे इलाज़ और दवाइयों के कारण परिवार पर बोझ नहीं रहेंगे। एक लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने थैलीसीमिया ग्रस्त बच्चों का दर्द समझ ही लिया। सरकार के निर्णय अनुसार अब थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चे का पूरा ट्रीटमेंट सरकारी अस्पताल में मुफ्त किया जाएगा। इससे पहले परिजनों को पीड़ित के इलाज के लिए आठ-दस हजार रुपए प्रत्येक महीना खर्च करना पड़ता था, जोकि एक आम आदमी के बजट से बाहर है।
लंबे संघर्ष के बाद मेहनत रंग लाई: अब तक स्थिति काफी गंभीर थी। हरियाणा में सबसे अधिक थैलीसीमिया पीड़ित बच्चे फरीदाबाद में हैं। इन बच्चों का सहयोग करने के लिए जिले में अकेली संस्था फाउंडेशन अगेंस्ट थैलीसीमिया काम कर रही है। संस्था के प्रयासों से ही ऐसा संभव हो पाया है।
थैलीसीमिया ग्रस्त इन बच्चों के सहयोग के लिए संस्था के पदाधिकारियों ने सरकार के सामने कई बार दरख्वास्त की थी। इस पर सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने निर्णय लिया कि पीड़ित बच्चों के इलाज में होने वाला खर्चा सरकार उठाएगी। सरकारी अस्पतालों में इन बच्चों को नि:शुल्क दवाइयां, खून उपलब्ध कराना व खून चढ़ाने का प्रावधान होगा।
फरीदाबाद संवेदनशील क्षेत्र: थैलीसीमिया को लेकर हरियाणा में फरीदाबाद संवेदनशील है। फरीदाबाद में सर्वाधिक थैलीसीमिया पीड़ित 135 बच्चे हैं जबकि प्रदेश में इनकी संख्या 900 के करीब पहुंच गई है। भारत सहित पूरे विश्व के सामने थैलीसीमिया एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है।
एक अनुमान के तहत भारत में 8000 से 10000 तक बच्चों का जन्म इस विकार के साथ होता है। दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में ही 200 बच्चे थैलीसीमिया मेजर के विकार के साथ जन्म लेते हैं। देश में लगभग 35 लाख लोग ऐसे हैं जो थैलीसीमिया वाहक हैं।
सरकार के निर्णय से खिले चेहरे : सरकार के फैसले से पीड़ित बच्चों के परिजनों के चेहरे खिल पड़े हैं। आजाद ने बताया कि एक आम आदमी के लिए इतना महंगा इलाज करवा पाना संभव नहीं है। हर महीने इतनी कमाई नहीं होती जितना बच्चे के इलाज में खर्च हो जाता है।
सरकार ने यह कदम उठाकर हम गरीबों के बच्चों के लिए सराहनीय कदम उठाया है। पांच वर्षीय थैलीसीमिया पीड़ित बच्ची की परिजन अंजलि नागपाल ने कहा कि सरकार का यह निर्णय प्रशंसनीय है। इस फैसले से अब वो अपने बच्चे की जिंदगी को लेकर श्योर हो गए है।
क्या कहते हैं अधिकारी
थैलीसीमिया फाउंडेशन के महासचिव रविंद्र डूडेजा ने कहा कि संस्था के अथक प्रयासों पर हरियाणा सरकार ने मोहर लगा दी। इसके लिए संस्था के पदाधिकारी काफी समय से प्रयास कर रहे थे। इसे लेकर वे मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और डीजी हेल्थ डा. नरवीर सिंह से मिले थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वो इन बच्चों के लिए जल्द ही कोई कदम उठाएंगे। (दैनिक भास्कर,फरीदाबाद,17 मई,2010)

1 टिप्पणी:

  1. अगर हमारे नेताओ का पेट दर्द और पाचन दुरुस्त हो जाए (यानि वो देश को खाना कम कर दे तो)थैलीसीमिया क्या सारी बीमारीयों का इलाज़ फ्री हो सकता है |

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