सोमवार, 19 अप्रैल 2010

विकृत मूत्रांग के इलाज़ में नई क्रांति

छोटे बच्चों के मूत्रांग की जन्मजात विकृतियों या कंजेनाइटिल एनामली को ठीक कर फिर से प्राकृतिक अवस्था में लाने की दिशा में एक भारतीय डाक्टर ने ब्रेक-थ्रू डेवलपमेंट किया है। ये कारनामा हुआ है बीकानेर के एस.पी.मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभाग के डाक्टर अमीलाल भट्ट की बदौलत। प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डा.वारेन स्नॉडग्रेस ने अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन की प्रतिष्ठित जर्नल "द जर्नल ऑफ यूरोलॉजी" में डाक्टर भट्ट की ईजाद पर "ए फेयरवैल टू कॉर्डी" यानी ऑपरेशन की पुरानी तकनीक को अलविदा शीर्षक से संपादकीय लिखा है। । कैलेलिस एंड बेलमैन की "टैक्स्ट बुक ऑफ पीडिएट्रिक यूरोलॉजी" के नए संस्करण में भी "डा.भट्ट्स टैक्नीक ऑफ कार्डी करेक्शन" को शामिल किया गया है। इसके ऑपरेशन पहले भी होते थे मगर बाद में कई जटिलताएं सामने आती थीं-खासकर संतान उत्पत्ति में सक्षम न रह जाने जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका। पारंपरिक रूप से इसके इलाज़ के लिए पाइप स्टेम यूरीथ्रा बनाया जाता है । मगर, डाक्टर भट्ट ने,जिन ऊतकों को बेकार फाइब्रस सेल बताकर काटकर हटा दिया जाता था, उसी का उपयोग कर डायनैमिक यूरीथ्रा विकसित किया। "भट्ट्स टैक्नीक ऑफ कॉर्डी करेक्शन" तकनीक को अब पूरी दुनिया ने मान्यता दे दी है। इस कार्डी करेक्शन तकनीक का आलेखों में तो संदर्भ दिया ही जाता है, पाठ्यपुस्तक में भी इसे शामिल किया गया है। डाक्टर भट्ट इस तकनीक से अब तक लगभग आठ सौ ऑपरेशन नई कर चुके हैं। उन्होंने एक एल्गोरिद्म भी तैयार कर दी है जिसके विजुअल इफेक्ट के सहारे दुनिया कहीं भी बैठा सर्जन ऑपरेशन कर सकता है। इस विषय में दैनिक भास्कर में आज छपी धीरेन्द्र आचार्य की खबर कहती है कि डाक्टर भट्ट की शुरूआती ईजाद को कपोलकल्पना मानकर, जर्नल ने छापने से मना कर दिया था। उनकी पहल को पहली बार 2005 में,कांग्रेस ऑफ द इंटरनेशनल सोसायटी ऑन हाइपोस्पेडियाज एंड इंटरसेक्स डिसॉर्डर में गंभीरता से लिया गया। द जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में इस तकनीक के प्रकाशन के बाद दुनिया भर के सर्जन ने इस तकनीक को अपनाना शुरु किया और हाइपोस्पेडियाज पर होने वाले हर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डाक्टर भट्ट को बुलाया जाने लगा। पिछले साल ब्रिटेन में 28-29 मई को हुए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डाक्टर भट्ट को उनके काम के लिए रेड कार्पेट दिया गया जो एक भारतीय डाक्टर को दुनिया का सलाम था।

3 टिप्‍पणियां:

  1. डा भट्ट हमारे वार्डन हुआ करते थे ...बीकानेर मैडीकल कालैज मैं....सर्जरी के बहुत ही अच्छे अध्यापक थे.....उनसे यही उम्मीद थी

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  2. आगरा के डॉ असोपा ने भी काफी काम और नाम कमाया है इस सर्जरी में

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  3. मुबारक हो बीकानेर के डॉक्टर भट्ट को.....इंडिया इज बेस्ट. बस एक ही ख्वाहिश है की 70 फीसदी गरीबों तक भी ईलाज की सुविधा पहुंचे..

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