शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

वज़न घटाएं,हॉट फ्लैशेज से बचें

लो फैट डायट और प्रचूर मात्रा में फल व सब्जियाँ व अंकुरित साबुत अनाज लेकर महिलाएँ फॉट फ्लेशेज़ की समस्या से निजात पा सकती हैं। आहार में यह सभी चीज़ें शामिल करने से सभी आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं और फैट कम होने के कारण मोटापे की आशंका भी कम होती है। ताज़ा शोध-अध्ययन से पता चला है कि यह रजोनिवृत्ति के समय दिखाई देने वाले अप्रिय लक्षणों और फॉट फ्लेशेज़ से बचने का कारगर उपाय हो सकता है। 

लोफैट आहार लेने के बाद मोटी महिलाओं का वज़न घट गया, जिससे उन्हें पहले की तरह हॉट फ्लेशेज़ और नाइट स्वेट की परेशानी नहीं होती थी। नॉर्दन कैलिफोर्निया के रिसर्च डिविज़न में हुई इस रिसर्च में यह बात सामने आई। यहाँ की सीनियर साइंटिस्ट और रिसर्चर डॉ. बेटी कान के अनुसार डायट में इन सभी बातों का ध्यान रखने पर उन महिलाओं को भी फायदा हुआ, जिनके वज़न में कोई कमी नहीं आई थी। इन्हें रजोनिवृत्ति के समय काफी कम तकलीफें पेश आई थीं। सबसे कम तकलीफें उन महिलाओं को हुई थी जो लंबे समय से इस डायट को फॉलो कर रही थीं जिससे उनका वज़न भी घटा था। जर्नल मेनोपॉज़ में यह शोध प्रकाशित हो चुका है। डॉ. कान के मुताबिक रजोनिवृत्ति के आसपास करीब ८० प्रतिशत महिलाओं को अचानक गर्मी लगने और पसीने छूटने जैसी परेशानियाँ पेश आती हैं। इनमें से लगभग आधी महिलाओं को यह लक्षण गंभीर रूप से महसूस करती हैं। अन्य को हल्के या फिर कुछ अधिक लक्षण महसूस होते हैं। 

एक अन्य अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि जिन महिलाओं का शरीर भारी, बॉडी-मास इंडेक्स अधिक या फिर फैट का प्रतिशत अधिक था उन्हें रजोनिवृत्ति के समय अधिक परेशानियाँ पेश आती हैं। अध्ययन में ४९,००० महिलाएँ शामिल हुई थीं, जिनमें से ४० प्रतिशत लो फैट डायट ले रही थीं। बाकी ६० प्रतिशत महिलाओं को तुलनात्मक अध्ययन के लिए शामिल किया गया था। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय रोग, फ्रैक्चर, स्तन कैंसर और कोलोन कैंसर जैसी बीमारियों में लो फैट डायट के प्रभावों का अध्ययन करना इस शोध का मुख्य उद्देश्य था। डॉ. कान और उनकी टीम ने १७,००० से भी अधिक महिलाओं पर अध्ययन को केंद्रित किया था। शोध शुरू होने के समय इनकी उम्र ५० से ७९ वर्ष थी। इनमें से कोई भी महिला हारमोन थैरेपी पर नहीं थी। 

लो फैट डायट लेने वाली महिलाएं केवल 20प्रतिशत कैलोरी फैट के ज़रिए प्राप्त कर रही थीं। ये फलों और सब्ज़ियों के 5 सर्विंग और साबुत अनाज के 6 सर्विंग रोज़ाना ले रही थीं। इन सभी महिलाओं ने रजोनिवृत्ति के समय पेश आने वाले लक्षणों के बारे में बताया कि उन्हें क्या-क्या लक्षण महसूस हुए,यह कितनी बार और किस तीव्रता से सामने आए।

लक्षण
-हल्के लक्षण, जिनसे दिन ब दिन की गतिविधियाँ प्रभावित नहीं होती।

-कुछ अधिक, जिससे दैनिक जीवन थोड़ा बहुत प्रभावित होता है।

-गंभीर लक्षण, जिनके कारण महिलाएँ अपने रोज़मर्रा के कार्य भी नहीं कर पाती थी। 

क्या आया सामने? 
शोध के शुरूआत में २६ प्रतिशत महिलाओं को हॉट फ्लेशेज़ की समस्या होती थी। इन्हें हल्के लक्षण महसूस होते थे। २७ प्रतिशत को नाइट स्वेट के हल्के लक्षण महसूस होते थे। जिन महिलाओं ने लो फैट डायट फॉलो की, उनका वज़न घटने की संभावना ३ गुना अधिक थी।

इसके विपरीत लो फैट डायट नहीं लेने वाली महिलाओं में वज़न बढ़ने की आशंका २ गुना अधिक थी। एक साल से लो फैट डायट ले रही महिलाओं में रजोनिवृत्ति के कारण होने वाली समस्याएं कम होने की संभावना कहीं अधिक पाई गई। 

जिन महिलाओं को थोड़े अधिक या गंभीर लक्षण महसूस होते थे,वे 22 पाउंड वज़न घटाकर इन तक़लीफों को काफी कम कर पाईं थीं। जिन महिलाओं को हलके लक्षण महसूस होते थे,उन्हें केवल 10 पाउंड वज़न घटाकर ही इन लक्षणों से निज़ात मिल गई थी। 

अध्ययन में एक आश्चर्यजनक बात यह सामने आई कि लो-फैट डायट ले रही उन महिलाओं को भी फ़ायदा हुआ जिनके वज़न में कोई कमी नहीं आई थी या फिर जिनका वज़न कम होने की बजाए थोड़ा बढ़ गया था। डॉ. कान ने इस अध्ययन में पाया कि आहार में परिवर्तन के ज़रिए वज़न घटाकर रजोनिवृत्ति के कारण होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है और इनसे निज़ात भी पाई जा सकती है(सेहत,नई दुनिया,अगस्त,2011 तृतीयांक)

1 टिप्पणी:

  1. डायट संतुलित वजन संतुलित हो
    नियमित योग ध्यान हो तो, रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक
    प्रक्रिया ही नहीं, इससे गुजरना काफी आसान हो जाता है !
    अच्छी पोस्ट ...आभार !

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