गुरुवार, 6 सितंबर 2012

हड्डियां कमजोर कर सकते हैं तेज खर्राटे

अपने देश में करीब 70 लाख लोग र्यूमेटाइड ऑर्थराइटिस से परेशान हैं। हर 3 में से एक महिला इस बीमारी की शिकार है। इसकी बड़ी वजह है तेज खर्राटे। सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के सीनियर ऑर्थोपेडिक और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. बीरेन नादकर्णी बता रहे हैं कि इस तकलीफ को करीब आने से कैसे रोक सकते हैं। 

अक्‍सर हम अपने घर के सदस्यों से सुनते हैं कि तुम्हारे खर्राटों ने मेरी नींद खराब कर दी। अगर आप भी तेज खर्राटे लेते हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि ये खर्राटे खुद आपकी नींद भी उड़ा सकते हैं। हाल ही में ताइवान की मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार जो लोग सोते वक्त तेज खर्राटे लेते हैं, उनमें हड्डियों की घातक बीमारी र्यूमेटायड ऑर्थराइटिस होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। स्वीडन के करोलींस्का इस्टीटय़ूट में हुए अध्ययन के अनुसार अगर आप हफ्ते में तीन बार या उससे अधिक बीयर का सेवन करते हैं तो भी इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। 

रयूमेटाइड ऑर्थराइटिस रोगी को पंगु बना बिस्तर पर ला देती है। खास बात यह है कि यह बीमारी अधिकतर युवाओं व मध्य आयु के लोगों को अपना शिकार बनाती है। यह बीमारी 20 से 50 साल के लोगों में ज्यादा पाई जाती है और अधिकतर महिलाओं को होती है। रयूमेटायड ऑर्थराइटिस की वजह से जोड़ ढीले, असामान्य, कम गतिशील हो जाते हैं और उनमें ताकत समाप्त हो जाती है। 

एक अनुमान के अनुसार भारत में रयूमेटायड अर्थराइटिस से लगभग 70 लाख लोग पीड़ित हैं। चिंता की बात यह कि इनमें से अधिकतर लोगों को बहुत देर से चलता है कि वे इस असहनीय बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इसका मुख्य कारण जानकारी का अभाव है। 

यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है जिसमें रोगी के शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली ही उसके शरीर को नुकसान पहुंचाने लगती है। इस तरह शरीर में कुछ ऐसे एंटीजन पैदा होते हैं जो कई हानिकारक रसायन जैसे साइटोकाइनिन्स उत्पन्न करते हैं। 

इन रसायनों के कारण जोड़ों में पाया जाने वाला द्रव्य साइनोवियल सूखने लगता है तथा उनका आकार बिगड़ने लगता है, प्रभावित जोड़ के आसपास की त्वचा लाल व गर्म हो जाती है और इसके साथ-साथ असहनीय दर्द भी उत्पन्न होता है। 

इलाज है 
रोग का पता प्रारंभिक अवस्था में लग जाए तो बहुत हद तक इस पर काबू पाया जा सकता है, किंतु बिगड़े हुए मामलों में अधिक समय लगता है। रोग के अलग-अलग पहलुओं को ध्यान में रखकर ही इसका इलाज शुरू किया जाता है। देर से पता चलने पर जोड़ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है और उसमें असहनीय दर्द होता है। ऐसी अवस्था में शल्य चिकित्सा का सहारा लेना पडता है। इस रोग में एक से अधिक जोड़ों के प्रभावित होने की वजह से शल्यचिकित्सा आसान नहीं होती है। 

समय पर पहचान जरूरी 
शुरू में रोगी को थकान, भूख न लगना, कमजोरी आदि महसूस होती है। अधिकतर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। विषेशज्ञों के अनुसार यही इस बीमारी के बढ़ने व तकलीफदेह होने की मुख्य वजह हैं। 

इसका इलाज सामान्य ऑर्थराइटिस से कहीं अधिक जटिल होता है। बीमारी बढ़ने पर हाथ-पैर की उंगलियों, कलाइयों और घुटनों में सूजन आ जाती है। यह समान्यत: दाएं व बाएं दोनों तरफ के जोड़ों में समान रूप से दिखाई पड़ती है। जोड़ों में सूजन के साथ दर्द होता है। जकड़न और दर्द सुबह के समय अधिक होता है। इस बीमारी में कुछ समय बाद हाथ व पैरों की उंगलियों में जकड़न के साथ टेढ़ापन आने लगता है जो बाद में अन्य जोड़ों में भी फैल जाता है। 

इसके कारण उठने-बैठने, चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने, कंघी करने, लिखने, कपड़े निचोड़ने जैसे दैनिक कामों में भी बहुत ज्यादा तकलीफ का सामना करना पड़ता है(हिंदुस्तान,दिल्ली,30.8.12)।

14 टिप्‍पणियां:

  1. ओपन परामर्श अच्छा है.
    आधुनिकता के साये में कामकाजी पति-पत्नी
    http://auratkihaqiqat.blogspot.in/2012/09/blog-post.html

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  2. आमतौर पर ये जानकारी होती नहीं लोगों को...
    आभार आपका सचेत करने के लिए..

    अनु

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  3. ये बहुत अच्छी जानकारी दी है..
    आभार....
    :-)

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  4. उपयोगी जानकारी आभार !

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  5. बहुत ही अच्‍छी जानकारी देता आलेख ... आभार

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  6. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  7. हमको तो खर्राटे आते ही नही,
    अच्छी जानकारी,,,,,

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  8. kharraton ke bare men to koi soch bhi nahin sakta ki ye itne khatarnak haen. ACHHI JANKARI

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  9. वाह !
    दूर किसी जगह जा कर सोना
    लगता है रहेगा ठीक !

    बगल में लेटी हुवी
    बीबी अगर खर्राटे भरेगी
    हड्डियाँ अगर रोज रात
    को पतिदेव की हिलेगी
    आज नहीं तो कल
    कमजोर हो ही जायेंगी
    खर्राटे बढ़ते चले अगर तो
    किसी दिन टूट भी जायेंगी !

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    उत्तर
    1. उल्लू पिटता जा रहा, बड़ी घनेरी धूप |
      खर्राटों से जगे जब, बीबी बदले रूप |
      बीबी बदले रूप, खुले बिन आँखें पिटता |
      खर्राटे दिन-रात, हड्डियाँ रहता घिसता |
      बोले है उल्लूक, रहम हम पर अब करिए |
      रही हड्डियाँ तोड़, तनिक कौवे से डरिये ||

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  10. वैद्यराज कुमार राधारमण जी,

    खर्राटे से कोई परेशानी नहीं.... फर्राटे से 'कलाई में होने वाली पीड़ा' पर कोई लेख लिखिए.... जितने भी संभव हों ईलाज बताइये. यदि आपको आगे भी उचित प्रतिक्रिया चाहिए तो जल्द बताइये .पिछले तीन माह से मेरे दायें हाथ की कलाई में असहनीय पीड़ा है.... आरम्भ में १० दिन एलोपेथी की शरण में बैठा था... फिर घरेलु उपचार किये....और फिर आयुर्वेद की राह भी पकड़ी.... लेकिन लाभ न हुआ... और अब मैं इसकी तरफ से इतना लापरवाह हो गया हूँ कि इस कलाई पीड़ा की सेवा करना छोड़ दिया है.... जब बर्दाश्त नहीं होता तो कलाईवाला दस्ताना पहन लेता हूँ फिलहाल दो दवा कर रहा हूँ... 'दिव्य पीड़ान्तक तेल ' और 'योगराज गुग्गुल' नाम की. कच्ची-पक्की रोटी भी बाँध लेता हूँ.

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  11. कविवर,
    दर्द-निवारण के लिए दो उपायः
    1. अरण्डी के तेल में धीमी आंच पर लहसुन की कली को जलने दें। फिर उसे छानकर मालिश करें, लाभ होगा।
    2.एक साफ बोतल में पुदीनासत्व(आसमान तारा) डालें। उसमें 10 ग्राम अजवायन का सत्व और 10 ग्राम कपूर को पीसकर डालें और ढक्कन बंद कर दें। थोड़ी देर में यह मिलकर द्रव रूप हो जाएगा। इसे ही "अमृतधारा" कहते हैं। अब 250 ग्राम सरसों का तेल गर्म करें और उसके ठंडा होने पर उसमें लहसुन के छोटे-छोटे टुकड़े करके डालें और तेल को तेज आंच पर तब तक गरमाएं जब तक लहसुन की कलियां जलकर काली न हो जाएं। अब तेल को नीचे उतारकर उसमें 20 ग्राम रतनजोत डालें जिससे तेल का रंग लाल हो जाएगा। इस तेल को ठंडा कर बोतल में भर लें और इसमें पहले तैयार अमृतधारा तथा 100 ग्राम तारपीन का तेल मिला ले। इस प्रकार तैयार "लाल तेल" सभी दर्दों को हरने वाला बताया गया है।

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