मंगलवार, 17 जुलाई 2012

खुश रहना हो,तो तुलना से बचें

सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर दूसरों की हैपनिंग पोस्ट्स से क्या आपको परेशानी होती है? अगर ये आपको डिप्रेस कर रहे हैं, तो खुश रहने के दो ही रास्ते हैं, तुलना से बचें या नेट पर कम टाइम बिताएं: 

फेसबुक पर आप लॉग-इन तो करते होंगे दोस्तों का पता लगाने और फ्रेश होने के लिए, लेकिन साइट पर सभी के पोस्ट देखकर आपको इतनी परेशानी होती होगी कि आप फटाफट साइन-आउट कर जाते होंगे। दरअसल, एक बार एफबी पर जाने के बाद दूसरों के पोस्ट, मेसेज व पिक्चर्स देखने का लालच छोड़ा नहीं जाता। आखिर इस साइट को बनाया भी तो इसी मकसद से गया है कि लोग अपने रिलेशन, लोकेशन और फोटो अपडेट्स करते रहें। 

लेकिन यहां दूसरों का टशन देखकर अक्सर लोगों का अपना जी जलने लगता है। होता यह है कि वे अपने प्रोफाइल की तुलना दूसरों से करते हैं और अपने पास कुछ भी हैप न पाकर निराश हो जाते हैं। कभी-कभी तो यह निराशा डिप्रेशन तक में बदल जाती है। 

वह मुझसे हैप क्यों 
अब 26 साल के बैंकर श्याम अवस्थी को ही लें, जिन्हें अपने फ्रेंड्स के फोटोज और अपडेट्स हर बार उन्हें चिढ़ाते हुए से लगते हैं। 

श्याम बताते हैं, 'जब भी बढ़िया जगह पर मैं अपने दोस्तों और जानकारों को बढ़िया जगहों मस्ती करते देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। उनके शानदार घर और महंगी चीजें देखकर भी मैं थोड़ा लो फील करता हूं। हालांकि मैं जानता हूं कि मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता, लेकिन उनकी मस्ती देखकर मैं इरीटेट हो जाता हूं। जबकि मेरी लाइन में वर्क प्रेशर ज्यादा है और मुझे देर तक काम करना पड़ता है। फिर मेरा पैकेज भी उतना नहीं है।' 

यह चीज कहीं न कहीं श्याम को पर्सनल लाइफ में भी डिस्टर्ब कर रही है, क्योंकि इन दोस्तों से अक्सर वह सहज नहीं हो पाते। 

नेट ने बढ़ाई प्रॉब्लम 
यह ह्यूमन नेचर है, जो हम दूसरों की कॉपी करना चाहते हैं और नेट वर्ल्ड से इसे पूरा बढ़ावा भी मिला है। साइकॉलजिस्ट आकृति गुप्ता कहती हैं, 'उसने यह किया और मैं पीछे रह गया, यह एक कॉमन सोच है और कहीं न कहीं कई परेशानियों की वजह भी बनती है। फिर सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने इस चीज को बढ़ावा ही दिया है। अब जब भी कोई चाहे, वह, अपने या किसी दूसरे नाम से, लॉग-इन करके दूसरों के अपडेट्स ले सकता है। हालांकि बाद में दूसरों की मस्ती देखकर वे खुद भी परेशान होते हैं।'

आकृति की मानें, तो लो-कॉन्फिडेंस लेवल वाले लोग कोई कॉमेंट या पोस्ट नहीं करते, बल्कि छिपकर दूसरों को देखते हैं। उनका यह व्यवहार उन्हें दूसरों की जिंदगी में झांकने के लिए और उकसाता है। 

लो-एस्टीम है वजह 
जब भी हम किसी से अपनी तुलना करके निराश होते हैं, तो इसका मतलब यही है कि हम अपने आप से और अपने आस-पास की चीजों से खुश नहीं हैं। साइकॉलजिस्ट डॉ. अमित चुग कहते हैं, 'दूसरों से कंपैरिजन पर कॉम्प्लेक्स फील होता है, तो मान लें कि आपको खुद को एक्सेप्ट करने में परेशानी हो रही है। अगर आप हमेशा यही सोचते रहेंगे कि वह बेहतर है या मैं बेहतर हूं, तो कभी भी आपको दिमागी शांति नहीं मिल पाएगी।'  

यही नहीं, ऐसी तुलना से आप अपनी स्पिरिट भी खोने लगेंगे। हालांकि देखने में आया है कि ऐसे लोग रियल लाइफ में भी दूसरों से कंपैरिजन कर ऐसे ही दुखी रहते हैं। 

कैसे बचें 
किसी भी तरह के कॉम्प्लेक्स से बचने का बेस्ट तरीका है कि आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को एक्सेप्ट कर लें। जितना आप अपने साथ सहज होंगे, दूसरों की चीजें आपको उतना ही कम परेशान करेंगी। जब आप खुद को पसंद करने लगेंगे, तो आपको क्या फर्क पड़ेगा कि कौन क्या कर रहा है और कहां जा रहा है। 

आकृति कहती हैं कि अगर आप अपने बारे में अच्छा नहीं सोच सकते, तो कोई आपको अच्छा महसूस करवा भी नहीं सकता है। 

...तो मिलेगी खुशी 
- सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लिमिटेड टाइम गुजारें। 

- याद रखें कि आप और बाकी सभी लोग अपने-आप में यूनीक हैं और सभी के पास अपना टैलंट है। 

- अपनी तुलना बस खुद से ही करें और अपनी इंप्रूवमेंट के लिए कुछ गोल्स तय कर लें। 

- अपने इंटरेस्ट की ऐक्टिविटीज में इंवॉल्व होकर नेगेटिव थॉट्स को दूर रखें। 

- अगर कभी फ्रस्ट्रेशन हो, तो अपने विचारों को लिखें या फिर किसी फ्रेंड से शेयर करें। 

- खुद से सवाल करें कि दूसरों की बड़ी समस्याओं के आगे आपकी यह लो-फीलिंग कितना मायने रखती है। 

- और अगर यह सब आपके लिए काम नहीं करता है, तो बेहतर होगा कि आप अपना अकाउंट ही डिलीट कर दें(नभाटा,दिल्ली,15.7.12)।

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही कहा आपने ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  2. किसी अनुशासन को सामूहिक रूप से माने बिना समस्याओं का निराकरण असंभव है.
    बहुत नेक सलाह.

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  3. खुश रहना हो,तो तुलना से बचें
    आजकल के हालात पर यह एक काफी उपयोगी
    पोस्ट है ...

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  4. खुश रहना हो,तो तुलना से बचें

    सही

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  5. जब आप अपने से बेहतर लोगों को देककर दुखी होने लगते हैं तब आपको चाहिए उनके बारे में सोचें जो आप से भी कम भाग्यशाली हैं। आपको जो मिल गया उसे ईश्वर का प्रसाद समझकर कृतज्ञ भाव से संतोष करिए और खुश रहिए।

    यदि आप अपनी पुरानी चप्पल की तुलना में पड़ोसी के चमचमाते जूते से हीनताबोध के शिकार हो रहे हैं तो उनके बारे में सोचिए जिनके पैर ही नहीं है।

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  6. यह मानवीय प्रवृति है . दूसरों को आगे बढ़ता देखकर जलन सी होती है .
    लेकिन लोग भी काफी एग्जीबीश्निज्म में विश्वास रखते हैं . इसलिए ज्यादा परेशानी होती है .

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  7. खुश रहना है तो तुलना से बचे
    बेहतरीन सलाह..
    बहुत अच्छी पोस्ट:-)

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  8. एक बहुत सामयिक और सार्थक पोस्ट -अंतर्जाल मनुष्य के मनोविज्ञान पर निश्चित बड़ा प्रभाव दाल रहा है !

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  9. ये सलाह केवल अंतर्जाल पर ही नहीं वास्तविक जिंदगी में भी लागू होती है बहुत सुन्दर आलेख बेहतरीन

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  10. अपनी तुलना ना करे,न करे किसी से होड,
    इस सलाह को मानिए, नही है दूसरा तोड़,,,,,,,

    RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

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  11. तुलना पैदा करती है जलन और-
    फिर सेहत चिंता से खराब होने लगती है-
    सचेत करती पोस्ट ||

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  12. राधारमण जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'स्वास्थ्य सबके लिए' से लेख भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 3 अगस्त 'को खुश रहना हो, तो तुलना से बचें' शीर्षक के लेख को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद
    फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

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