बुधवार, 27 जून 2012

इन दिनों रहता है डिहाइड्रेशन का खतरा

इन दिनों घर से निकलते ही मौसम की मार ने बुरा हाल कर रखा है। ऐसे में डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम बड़ी कॉमन है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखने से आप इससे बच सकते हैं:  

सबसे पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि डिहाइड्रेशन है क्या बला? दरअसल, जब आप जितने फ्लुइड्स लेते हैं, उससे ज्यादा लूज करते हैं तो डिहाइड्रेशन के हालात बनते हैं। इसका मतलब यह होता है कि आपकी बॉडी को अपने ऑपरेशंस के लिए जरूरत से कम वॉटर मिल रहा है। हालांकि कुछ बातों का ध्यान रखकर डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है। 

-अपनी डाइट में ढेर सारे फ्लुइड्स को शामिल करें। खासतौर पर हॉट और ड्राई दिनों में। 

-जब आपको प्यास न लगी हो, तब भी लिक्विड फूड लें। दरअसल, जब आपको प्यास लगती है, तब तक डिहाइड्रेशन की सिचुएशन बनने लगती है। 

-एक्सर्साइज करने से पहले फ्लुइड्स लें। बता दें कि वर्कआउट के दौरान हर 15-20 मिनट पर आपको 8-12 आउंस की जरूरत होती है। जाहिर है कि एक्सर्साइज के बाद भी आपको पानी की जरूरत है। 

-अगर आप कोई मेडिकेशन या सप्लिमेंट्स ले रहे हों, तो फ्लुइड रिटेंशन पर इनके साइड इफेक्ट्स चेक करें। दरअसल, कई बार इनसे फ्लुइड पर नेगेटिव इफेकट पड़ता है। 

-लूज-फिटिंग क्लोद्स पहनें और हैट को न भूलें। धूप में निकलने पर लाइट कलर के एब्जॉर्बेंट क्लोद्स पहनें। इससे बॉडी कूल रहती है और स्वेटिंग होने पर कम फ्लुइड्स लूज होते हैं। 

- कैफीन वाले अल्कोहल और ड्रिंक्स अवॉइड करें। ये भी डिहाइड्रेशन की खास वजह हैं। 

- कार्बोनेटेड फूड आइटम्स को अवॉइड करें , इसकी वजह से अपनी जरूरत भर फ्लुइड्स नहीं ले पाते। 

- हेवी एक्सर्साइज के दौरान भले ही आपके ट्रेनर ने आपको स्पोर्ट्स ड्रिंक लेने की सजेशन दी हो , लेकिन याद रखिए कि प्लेन वॉटर से बेहतर कोई भी ड्रिंक नहीं। 

- बच्चों में डिहाइड्रेशन हो जाने पर वॉटर या मिल्क के साथ सीरिअल्स को मिक्स करके दें। इससे लॉस्ट फ्लुइड्स रिप्लेस हो जाते हैं। 

- ओरल रिहाइड्रेशन सिस्टम ( ओआरएस ) और हाफ - स्ट्रेंथ ऑरेंज जूस इससे निबटने के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। 

- डिहाइड्रेशन हो जाने पर अपना काम बंद करके बॉडी को पूरा आराम दें। डाइरेक्ट सनलाइट में न जाएं और किसी ठंडी जगह पर रेस्ट करें। 

- जहां तक संभव हो , शेड वाले एरिया में रहें। स्किन को सन ब्लॉक से कवर करें। 

 - डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम बच्चों और बुजुर्गों को होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसलिए पहले से ही एहतियात बरतें। 

- केवल धूप में ही नहीं , ह्यूमिड वेदर में भी वॉटर इनटेक का खयाल रखें। (रुचिरा भल्ला के ये टिप्स नभाटा में १५.६.१२ को प्रकाशित हुए हैं)

6 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन जानकारी ... आभार

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  2. बहुत उपयोगी जानकारी....आभार

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  3. जी |
    सचेत करती रचना |
    भीषण गर्मी के बाद व्यक्ति
    लापरवाह भी तो हो जाता है |
    सादर ||

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