बुधवार, 6 जून 2012

बढ़ता वज़न और अनियमित मासिक है ख़तरनाक

अगर आपका वेट लगातार बढ़ रहा है या पीरियड्स रेग्युलर नहीं हो रहे, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं। यह पीसीओएस डिजीज हो सकती है। इसमें जहां महिलाओं में कंसीव करने की पावर कम होती जाती है, वहीं कैंसर होने के चांस भी कई बढ़ जाते हैं। जानते हैं इसके बारे में : 

अगर आपकी बॉडी और फेस के बालों की लेंथ अचानक बढ़ने लगी है या वेट बढ़ रहा है, तो इसे हल्के से न लें। दरअसल, ये पीसीओएस डिजीज (पॉलीसाइटिस ओवेरियन सिंड्रोम) हो सकती है। बता दें कि पीसीओएस एक ऐसी डिजीज है जिससे कैंसर होने के चांस 10 फीसदी बढ़ जाते हैं। यही नहीं, इससे कंसीव न करने के चांस भी 70 पर्सेंट बढ़ जाते हैं। गौरतलब है कि इसमें पीरियड्स भी रेग्युलर नहीं होते। 

आईवीएफ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह प्रॉब्लम 80 प्रतिशत हॉर्माेन से जुड़ी हुई है और 20 प्रतिशत हेरिडिटी से। इसमें महिला की ओवरी में एक हार्ड लेयर डेवलप हो जाती है जिससे ओवेल्यूशन नहीं हो पाता। नतीजतन बॉडी में एंड्रोजेन और एलएच हॉर्माेन का लेवल बढ़ने लगता है। इसी वजह से कंसीव करने में दिक्कत आती है। आईवीएफ एक्सपर्ट आंचल कहती हैं, 'पीसीओएस की प्रॉब्लम होने पर पीरियड रेग्युलर नहीं होते और बॉडी फैट बढ़ता जाता है। इसमें एक समय बाद बीमारी पर कंट्रोल पाना खासा मुश्किल होता है, जिससे कई महिलाएं मेंटल टेंशन में आ जाती हैं।' 

कैंसर का खतरा 
अगर इस पर प्रॉब्लम समय रहते कंट्रोल ना किया जाए, तो कैंसर की चपेट में भी आ सकती हैं। आईवीएफ एक्सपर्ट नीरा कहती हैं कि पीसीओएस की प्रॉब्लम से जूझ रही महिलाओं की ओवरी में हार्मोन सामान्य से अधिक बनते हैं। इसकी वजह से अंडाणु सिस्ट या गांठ में तब्दील हो जाता है और कई बार कैंसर का रूप भी ले लेती है। वहीं, आंचल बताती हैं कि ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा शेप में होती हैं, जिनमें लिक्विड भरा होता है। इनका शेप धीरे- धीरे बढ़ता जाता है। 

पीरियड रेग्युलर नहीं 
न महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा जल्दी अटैक करती है , जिनमें पीरियड्स रेग्युलर नहीं रहते। फेस , स्टमक और फिंगर्स जैसी जगहों पर अधिक बाल आने लगते हैं। इसके अलावा , स्किन ऑयली होती जाती है , बाल गिरने लगते हैं और फेस पर दाग धब्बे और मुंहासे हो जाते हैं। अगर समय रहते केयरफुल होकर न चला जाए , तो बच्चा न होना , शुगर और हाई कॉलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम हो सकती है। 

युवा भी चपेट में 
3 से 5 फीसदी युवा लड़कियों में यह बीमारी पाई जाती है , तो महिलाओं में इसका प्रतिशत 8 से 10 है। बच्चा न होने की यह खास वजह होती है। 16 से 25 वर्ष की युवतियां इसकी ज्यादा चपेट में हैं। डॉ . आंचल बताती हैं कि आमतौर पर यह प्रॉब्लम महिलाओं में 16 साल से लेकर 45 साल तक असर डालती है। 

इलाज है आसान 
पीसीओएस के इलाज के लिए कई दवाएं हैं। ऑपरेशन से भी सिस्ट निकाल कर बाहर किया जा सकता है। लेकिन अगर रुटीन ठीक रखा जाए , तो इस प्रॉब्लम से कई काफी हद तक छुटकारा खुद - ब - खुद मिल जाता है। वैसे , इस बीमारी की खास वजह फैट है। दरअसल , फैट बढ़ने से एस्ट्रोजन हॉर्मोन की क्वांटिटी में तेजी से इजाफा होता है जो ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 

बॉडी में दिखें चेंज 
- बॉडी व फेस पर बालों का बढ़ना 
- स्किन प्रॉब्लम्स मसलन , दाग 
- धब्बे , मुंहासे और ब्राउन धब्बे होना। 
- पीरियड्स रेग्युलर न होना 
- कंसीव न कर पाना। 

ध्यान दें इन पर 
- जरूरी है रेग्युलर एक्सरसाइज 
- वेट को कंट्रोल करें 
- स्ट्रेस से दूर रहें 
- रुटीन को मैनेज करें 
- आईवीएफ कंसल्टेंट से एडवाइस लें(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,6.6.12)

3 टिप्‍पणियां:

  1. जागरूक करती पोस्ट ...बहुत उपयोगी आभार !

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  2. ये तो बड़े काम की जानकारी अपने लगा रखी है।

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