रविवार, 27 मई 2012

आंसुओं को बेकार न बहने दें

आँसू आना एक सामान्य बात समझी जाती है। ग़म हो या खुशी आँसुओं पर किसी का नियंत्रण नहीं है। दिल में हलचल हुई तो बस समझ लीजिए आँसू बरबस ही आ जाएँगे। यह प्रकृति प्रदत्त अविभिन्न तंत्र है जो जन्म से मृत्यु तक कार्य करता है।  

अधिक आँसू बहना 
अधिक आँसू बहने के दो कारण हो सकते हैं - आँसू का अधिक बनना और आँसू का सामान्य मात्रा में ही बनना लेकिन अश्रु तंत्र के अवरुद्ध होने से आँखों के बाहर बहना। आँसुओं के अधिक बहने के तीन कारण हैं - भावनात्मक कारण जैसे- रोना, आँखों में खुजली या जलन होने पर जैसे तेज़ रौशनी, तेज़ हवा, धुएँ से संपर्क या आँखों में कचरा पड़ने पर। तीसरा कारण है आँखों में संक्रमण या चोट लगना। आँखों में कचरा पड़ गया हो तो इसे निकालने से आँसू थम जाते हैं। संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवा देने से आँसू बंद हो जाते हैं।  

नलिका तंत्र में रूकावट के कारण 
पलकों के अपने स्थान से हटने से, चेहरे का लकवा, आँख का ठीक से बंद न हो पाना, अश्रुनलिका के छिद्र का आँख से संपर्क न रह पाना, अश्रुनलिका के छिद्र में असामान्यता, जन्मजात अनुपस्थिति, महीन कण का फँसना, अश्रुपथरी, चोट से इसमें सिकुड़न, आदि कारणों से मार्ग बंद हो जाता है और आँसू बहने लगते है। अश्रुनलिका के छिद्र को साफ करके कचरा निकालकर ठीक किया जा सकता है। नलिका के सिकुड़ने के कारण आँसू आ रहे हों तो इलाज करके रास्ता साफ किया जाता है। नवजात शिशुओं की आँख से आँसू आना काफी आम है। शिशुओं में अश्रु ग्रंथी और नाक को जोड़ने वाली नली अविकसित होती है इसलिए मार्ग अवरुद्ध रहता है। इस स्थिति में एक आँख ही प्रभावित होती है। प्रभावित आँख अधिक नम दिखाई देती है। इसमें संक्रमण होने पर आँसू के साथ सफेद डिस्चार्ज भी आने लगता है। इस बीमारी में अश्रु थैली को दबाकर साफ करके मालिश करने की सलाह दी जाती है। बाद में करीब छह माह की उम्र में नीडल डालकर रास्ता बनाया जाता है।  

वयस्कों में इसके कारण 
वयस्कों में अश्रु थैली में संक्रमण हो सकता है। मामूली संक्रमण होने पर अश्रु ग्रंथि के हिस्से में सूजन, दर्द के साथ बुखार आ सकता है। इसमें एंटीबायटिक व दर्द निवारक दवा दी जाती है। पुराना संक्रमण होने पर आँखों से पानी आने, सफेद डिस्चार्ज आने की शिकायत होती है। यह समस्या अधिकतर महिलाओं में होता है क्योंकि इनमें अक्सर नाक और अश्रु ग्रंथि को जोड़ने वाली नलिका संकरी होती है। इस स्थिति में सिरिंजिंग व प्रोबिंग द्वारा सफाई की जाती है। अंत में ऑपरेशन कर रास्ता बनाया जाता है। बच्चों में खसरा, मम्पस आदि रोगों के साथ अश्रु ग्रंथि का संक्रमण हो सकता है। टीबी व सिफलिस आदि रोग लंबे समय से बने हों तो मरीज़ में अश्रु ग्रंथी के गंभीर संक्रमण की आशंका होती है। ऐसे में मूल बीमारी के उपचार के साथ ही उचित एंटीबायोटिक भी दी जाती हैं। अश्रु ग्रंथि ट्यूमर भी हो सकता है। इसे बायोप्सी, रेडियोथैरेपी या ऑपरेशन से ठीक किया जाता है। आँखों के स्वास्थ्य, पोषण व सुरक्षा के लिए आँसूओं का नियमित बनना ज़रूरी है।  
 
गर्मियों में सूख जाती हैं आँखें 
-गर्मियों में आँखों में सूखापन आ जाता है। इसके कई कारण हैं जिसमें मौसम की खुश्की प्रमुख है। इसका इलाज नेत्ररोग विशेषज्ञ से ही कराना ठीक होता है लेकिन कुछ सावधानियाँ रखकर इस समस्या को दूर रखा जा सकता है। 

-नेत्ररोग विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए आई ल्युब्रिकेंट का नियमित उपयोग करें।

-सूखी आँखों में कोई दूसरे आईड्राप न डालें क्योंकि वे आँखों में किसी संक्रमण को ठीक करने के लिए बनाए गए हैं(डॉ. दिनेश मिश्र,सेहत,नई दुनिया,मई तृतीयांक 2012)।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है.......
    याने रखा भी हो तो दिखेगा कहाँ????

    अनमोल आँखों के लिए आपकी अनमोल पोस्ट का शुक्रिया.

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  2. आँखों की देखभाल ज़रूरी है । सही सुझाव ।

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  3. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 28-05-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-893 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  4. आँखों की देखभाल जरुरी है | महत्वपूर्ण जानकारी ........

    RECENT POST ,,,,, काव्यान्जलि ,,,,, ऐ हवा महक ले आ,,,,,

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  5. जानकारी से लबाल बढ़िया आलेख .शुक्रिया सांझा करने के लिए ..
    और यहाँ भी दखल देंवें -
    ram ram bhai
    सोमवार, 28 मई 2012
    क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का नतीजा है ये ब्रेन फोगीनेस
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  6. वाह ...बहुत ही ज्ञानवर्धक जानकारी ... आभार

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