सोमवार, 21 मई 2012

एक प्रकार का ध्यान है टहलना

टहलना एक श्रेष्ठ व्यायाम है। इससे हृदय शक्तिशाली होता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। रक्तचाप सामान्य हाता है और दिल का दौरा पड़ने की आशंका कम होती है। हानिकारक कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। शरीर के जोड़ों व माँसपेशी में शक्ति आती है।  

टहलने से शरीर की अनावश्यक कैलोरी जल जाती है व मोटापा आसानी से नियंत्रित हो जाता हैं व वजन पर नियंत्रण हो जाता है व शरीर सुड़ौल व तेजस्वी हो जाता है। जैसे-जैसे युवा अवस्था खत्म होकर प्रौढ़ावस्था आती है तो हड्डियों में कमजोरी आने लगती है। यदि नियमित रूप से टहला जाए तो हड्डियों में मजबूती आती है। ३० मिनट नियमित रूप से टहलने से न पर्याप्त कैल्शियमयुक्त आहार लेने से अस्थिक्षण की आशंका कम हो जाती है।  

श्रेष्ठ स्वास्थ्य पाने के लिए आवश्यक है कि टहलने का तरीका व वातावरण सही होना चाहिए। टहलने का श्रेष्ट समय प्रातःकाल सूर्योदय के पूर्व ही है। प्रातःकाल वातावरण में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन होती है व वातावरण बहुत ही कम प्रदूषित होने की वजह से श्वसन प्रणाली को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त होती है। प्रातःकाल टहलने से हृदय को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होता है। हृदय बहुत ही तेज गति से चलता हैं और शरीर के समस्त अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजनित रक्त प्राप्त होता है। रक्त संचार बढ़ने से रक्तचाप ही नियंत्रित नहीं होता है वरन नियमित रूप से लंबे समय तक टहलने से कॉलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित होता है। इससे संपूर्ण शरीर की कार्यक्षमता में भी वृद्धि होती है साथ ही रक्त में ऑक्सीजन परिवहन की क्षमता में भी वृद्धि होती है।  

स्वस्थ त्वचा 
जो व्यक्ति त्वचा संबंधी अनेक परेशानियों का सामना करते है उनके लिए पैदल टहलना श्रेष्ठ व्यायाम है क्योंकि प्रातःकाल टहलने से शरीर के रोम छिद्रों को पर्याप्त मात्रा में प्रदूषण से मुक्त ऑक्सीजन मिलने से उनकी कार्यक्षमता में अपार वृद्धि होती है व उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होने से शरीर से पर्याप्त मात्रा में विषाक्त पसीने का निष्कासन होता है जिससे त्वचा में निखार आता है। साथ ही प्रातःकाल की गुनगुनी धूप से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी प्राप्त होता है।

एक प्रकार का ध्यान है टहलना 
अकेले प्रातःकाल टहलना एक प्रकार के ध्यान का अभ्यास है। जीवन की भागदौड़ व तनाव की अवस्था में जीवन से जब आनंद समाप्त हो जाता है तब टहलना मन को तनाव मुक्त होकर ऊर्जा प्राप्त करता है। अनावश्यक मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है। दिनभर मन प्रसन्ना व ऊर्जा का अनुभव कर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इससे त्वचा की ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ने से शरीर सहनशील बनता है, अतः नियमित रूप से टहलने वालों को थकने की चिंता नहीं करनी चाहिए। टहलने से मन खुश रहता हैं व मन प्रसन्नाता से भर जाता हैं और मानसिक अवसाद कम हो जाता है। 

टहलने का सही तरीका 
टहलने के पूर्व वार्म अप अवश्य कर लेना चाहिए जिससे शरीर लयबद्ध तरीके से टहलने के लाभ प्राप्त कर सके। प्रायः टहलने वाले प्रारंभ में ही टहलने की गति को बहुत तेज कर देते हैं जिससे लाभ के स्थान पर हानि होने की संभावना हो जाती है व टहलने वाला व्यक्ति जल्दी थक जाता है, अतः प्रारंभ के २-३ मिनट धीमी गति से टहलना चाहिए, बाद में कुछ मिनटों के लिए अपनी क्षमतानुसार तेज गति से चलना चाहिए। यदि थम जाते है तो तुरंत गति को धीमा कर दें और यदि ज्यादा थम जाते है तो कुछ देर विश्राम भी कर सकते है। नियमित रूप से ३० मिनट तक पैदल चलना चाहिए। एक घंटे में ३-५ किलोमीटर तक चलना चाहिए। पैदल चलते समय पहले एड़ी को जमीन पर रखे फिर पंजों को रखे इस प्रकार से टहलने से पर्याप्त लाभ मिलेगा।टहलते हुए कुल्हों को बारी-बारी से आगे व पीछे करना चाहिए। टहलते समय धड़ को सीधा रखना चाहिए व हाथॅं को व हाथों की गति आगे व पीछे करना चाहिए। सिर और गर्दन को सीधा रखना चाहिए। दृष्टि सामने की ओर होना चाहिए। यदि प्रातःकाल के अतिरिक्त यदि टहलते है तो खाली पेट ही टहलना चाहिए। भोजन करने के १ घंटे बाद धीमी गति से टहला जा सकता है। भोजन के तुरंत बाद कभी भी नहीं टहलना चाहिए।

सही जूतों का चुनाव 
जूते पहनकर ही टहलना चाहिए। इसके साथ ही प्रायः यह देखा गया है कि पैदल टहलते समय कई व्यक्ति बिना खषल के जूतों से टहलते है जिससे वे ठीक प्रकार से टहल नहीं पाते है और स्पोर्ट्‌स जूते नहीं पहनने की वजह से उनके घुटने घीसने का भी भय रहता है व पैरों, कुल्हों, जोड़ों व पीठ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। क्योंकि जब हम सख्त सतह पर टहलते है तो जूते नहीं पहनने की वजह से घुटनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सही तरह से टहलने के लिए जूतों का चुनाव आवश्यक है। जूते मोटे तलवे वाले होना चाहिए। सही तरह के जूतों को पहनकर टहलने से संपूर्ण लाभ तो मिलते तो है ही साथ लयबद्ध तरीके से टहलना हो जाता है। किसी प्रकार का रोग होने पर टहलना प्रारंभ करने से पूर्व अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लेना चाहिए(डॉ. जगदीश जोशी,सेहत,नई दुनिया,मई द्वितीयांक 2012)।

19 टिप्‍पणियां:

  1. टहलने के लिए जब आदमी निकले तो वह अल्लाह की नेमतों पर ध्यान दे।
    अपने पैरों पर ध्यान दे।
    जिस ज़मीन पर टहल रहा है, उसकी बनावट पर और उसकी हरियाली पर ध्यान दे।
    उगते हुए सूरज की किरणों पर ध्यान दे।
    सूरज निकलता है तो उसकी किरणें पेड़ पौधों के पत्तों पर पड़ती हैं तो तब वे फ़ोटोसिंथेसिस की क्रिया करते हैं। इस तरह वे ऑक्सीजन छोड़ते हैं जो कि हमारे जीवन और हमारी सेहत के लिए ज़रूरी है और वे हमारी छोड़ी हुई कार्बन डाई ऑक्साइड को सोख लेते हैं जो कि हमारे लिए जानलेवा है।
    रौशनी, हवा, ज़मीन और हमारा शरीर, इनमें से हरेक चीज़ ऐसी है कि इन पर ध्यान दिया जाए।
    जब यह ध्यान दिया जाएगा तो टहलना एक सहज ध्यान बन जाएगा और मालिक का शुक्र दिल से ख़ुद ब ख़ुद निकलेगा।
    जो लोग सहज ध्यान नहीं कर पाते वे जीवन भर असहज ही रहते हैं।
    दिल मालिक के शुक्र से भरा हो, उसकी मुहब्बत से भरा हो तो जीवन से शिकायतें ख़त्म हो जाती हैं।
    प्रकृति सुंदर है, हमारा शरीर सुंदर है।
    सुंदरता पर ध्यान देंगे तो जीवन में मधुरता और सकारात्मकता आएगी।
    सुबह सुबह अच्छा काम करेंगे तो शाम तक का समय अच्छा गुज़रेगा।
    See
    http://commentsgarden.blogspot.com/2012/05/blog-post_20.html

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  2. ाच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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  3. 100 बिमारीयो को खत्‍म करने वाल यही नुस्‍का है उपयोगी जानकारी
    युनिक ब्‍लाग

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  4. हानिकारक कॉलेस्ट्रॉल होता है = हानिकारक कॉलेस्ट्रॉल कम होता है

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  5. टहलना हौले हौले चलने को कहते हैं . बेहतर रहेगा यदि इसे वॉगिंग कहें ( ब्रिस्क वॉक ) .
    तेज चलने से बढ़िया एरोबिक एक्सेरसाइज़ होती है .

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  6. बहोत अच्छा लेख
    टहलना तो सबसे आसान तरीका है रोंगो से बचने का

    http://HindiXpress Blog

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  7. अच्छी जानकारी/लाभदायक प्रस्तुति....
    प्रथम पैरा में “हानिकारक कॉलेस्ट्रॉल होता है।“ वाक्य में शायद एक शब्द “कम” छूट गया है प्रिंट होने से...
    सादर आभार।

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  8. आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार २२ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

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  9. बेहतरीन पोस्ट ....

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  10. यह पोस्ट हमें छोटी-छोटी भूल की तरफ़ याद दिलाती है।

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  11. बिलकुल दुरुस्त है....ध्यान से कम नहीं होता घूमना...

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  12. बहुत उपयोगी हमेशा अमल करने योग्य

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