शनिवार, 19 मई 2012

सुरक्षित है चिकनपॉक्स का टीका

बच्चों में चिकनपॉक्स एक साधारण बीमारी है। इसमें एक-दो दिन हल्के बुखार के बाद शरीर में मसूर जितने छोटे-छोटे दाने आने लगते हैं। शुरुआत में यह छाती, पेट व पीठ में आते हैं फिर चेहरे, व हाथ-पैर पर भी दिखने लगते हैं। धीरे-धीरे इन दानों में पानी भर जाता है और फिर यह फूटकर सूख जाते हैं। इन पर पपड़ी पड़ जाती है जो धीरे-धीरे झड़ जाती है और हल्का दाग़ रह जाता है। नए दाने दो-तीन दिन तक आते रहते हैं। इस तरह चिकनपॉक्स तीन से पांच दिन में अपने आप ठीक हो जाती है। छोटे बच्चों में कुछ दाने ही आते हैं और परेशानी कम होती है लेकिन बड़े लोगों में ज़्यादा बड़े दाने आते हैं और बीमारी उग्र हो जाती है।  

यह बड़ी माता नहीं है  
बड़ी माता ज़्यादा खतरनाक बीमारी थी जिसके दाग़ ज़िंदगीभर रह जाते थे, प्रभावी टीकाकरण से यह पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है। चूंकि चिकनपॉक्स बच्चों की साधारण बीमारी है और इससे जान का खतरा नहीं रहता है इसलिए यह टीका निहायत ज़रूरी नहीं है। इसे १५ माह की उम्र के बाद कभी भी लगाया जा सकता है। चिकनपॉक्स के टीके से पूरी सुरक्षा मिलती है परंतु कभी-कभी टीका लगवा लेने के बाद भी चिकनपॉक्स हो जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहने से हो सकता है। जो लोग घनी बस्तियों में रहते हैं उन्हें यह समस्या होती है। टीके का बाद समस्या खड़ी होने से शरीर पर कुछ ही दाने आते हैं और बीमारी बढ़ती नहीं है। इससे बचने के लिए हाल में ही "कमेटी ऑफ इम्मुनाइजेशन" ने चिकनपॉक्स का दूसरा टीका पॉंच वर्ष की उम्र से लगाने की सिफारिश की है(डॉ. प्रदीप सिहारे,सेहत,नई दुनिया,मई द्वितीयांक 2012)।  

कैसे होती है  
चिकनपॉक्स छूत की बीमारी है। रोगी की खॉंसी व दानों से संक्रमण फैलता है। रोगी के संपर्क में आने से दूसरे लोगों को करीब १४ दिन बाद चिकनपॉक्स हो जाता है। शरीर चिकनपॉक्स के खिलाफ प्रतिरोधक शक्ति बनाकर इसे ठीक कर लेता है। एक बार यह बीमारी होने के बाद शरीर में इसके खिलाफ प्रतिरोध जीवनभर बना रहता है। यही कारण है कि यह दोबारा नहीं होती। अगर बचपन में ही चिकनपॉक्स हो जाए तो बाद में इसका खतरा नहीं होता है। बचपन में न हो तो दस वर्ष की उम्र के बाद चिकनपॉक्स परेशानी पैदा कर सकती है। वयस्कों में दाने बड़े होते हैं व इनके दाग़ भी गहरे पड़ते हैं। १०-२० साल पहले तक यह बीमारी प्रायः बचपन में ही हो जाती थी परंतु जीवन स्तर में सुधार और अच्छी साफ-सफाई की वजह से कई लोगों को बचपन में नहीं होती। इससे इन्हें आगे परेशानी हो सकती है।

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