गुरुवार, 22 मार्च 2012

वज्रासनःकब करें,कब नहीं

भोजन के बाद यदि खाना व्यवस्थित ढंग से पच जाए तो शरीर की असंख्य बीमारियां स्वत: ही नष्ट हो जाती हैं। इसके विपरित यदि किसी व्यक्ति को पाचन से संबंधी कोई परेशानी है तो उसे कई प्रकार के रोग होने की पूरी संभावनाएं रहती हैं। भोजन पचाने और पाचन तंत्र को व्यवस्थित रखने के लिए एक सबसे अच्छा योगासन बताया गया है। वह आसन है वज्रासन। 

वज्रासन ऐसा आसन है जो भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इस आसन का सबसे बड़ा लाभ यही है कि खाना पचाने में ये मददगार है। नियमित रूप से वज्रासन किया जाए तो व्यक्ति पूर्णत: स्वस्थ बना रह सकता है।

वज्रासन की विधि- 
खाने के बाद कुछ देर विश्राम करें। फिर किसी शांत एवं समतल स्थान पर कंबल या अन्य कोई आसन बिछाएं। इसके बाद घुटनों को मोड़कर इस तरह से बैठें कि पैरों के पंजे पीछे की ओर हो जाएं और नितंब दोनों एडिय़ों के बीच में आ जाएं। दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलाकर रखें। एडिय़ों में अंतर भी बनाए रखें। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। पीछे की ओर न झुकें और शरीर सीधा रखें। अब हाथों को और शरीर को ढीला छोड़ दें। कुछ देर के लिए अपनी आंखें बंद करें और ध्यान सांस की ओर रखें। इस अवस्था में कुछ देर बैठे रहें। ऐसा प्रतिदिन भोजन के बाद किया जाना चाहिए।

बीबीसी की साईट पर सिद्धार्थ प्रसाद ने भी यही सुझाव दिया हैः
-इसे करने में शुरुआती दिक्कत हो सकती है लेकिन नियमित अभ्यास से आसान हो जाएगा इस आसन में घुटनों को मोड़कर इस तरह से बैठते हैं कि नितंब दोनों एड़ियों के बीच में आ जाएं, दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिले रहें और एड़ियों में अंतर भी बना रहे.

-दोनों हाथों को घुटनों पर रखें. पीछे की ओर ज़्यादा न झुकें. शरीर को सीधा रखें ताकि संतुलन बना रहे.

-हाथों और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें और कुछ देर के लिए अपनी आँखें बंद कर लें.

-अपना ध्यान साँस की तरफ़ बनाए रखें. धीरे-धीरे आपका मन भी शांत हो जाएगा.

-इस आसन में पाँच मिनट तक बैठना चाहिए, ख़ासकर भोजन के बाद. 

वज्रासन किसे नहीं करना चाहिए- 
वे जिनके घुटने कमजोर हैं। जिन्हें गठिया रोग है। जिन्हें हड्डियों से संबंधित कोई बीमारी हो, ऐसे लोग वज्रासन न करें। किसी योग चिकित्सक से संपर्क किया जा सकता है। 

वज्रासन से रक्त का संचार नाभि केंद्र की ओर रहता है जिससे पाचन तंत्र व्यवस्थित होता है और पेट की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं। यह आसन महिलाओं के लिए भी लाभदायक है। इस आसन से महिलाओं की मासिक धर्म की अनियमितता दूर हो सकती है। आसन के संबंध में किसी योग विशेषज्ञ से भी सलाह लेनी चाहिए(दैनिक भास्कर,उज्जैन,21.3.12)। 


वज्रासन अकेला ऐसा आसन है, जिसे भोजन करने के बाद किया जा सकता है, ख़ासकर दोपहर के भोजन के बाद. 


-वज्रासन से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और उससे संबंधित रोग भी धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं. -यह ध्यानात्मक आसन भी है. इसमें कुछ समय तक अपनी सुविधानुसार बैठना चाहिए. 


-जो लोग अधिक देर तक पैर मोड़कर नहीं बैठ सकते वे वज्रासन की स्थिति में बैठकर कुछ देर तक विश्राम कर सकते हैं. 


सिद्धार्थ प्रसाद के कुछ अन्य ख़ास टिप्सः 


-नया-नया अभ्यास करने वालों को घुटनों, जंघों और टखनों में इतना खिंचाव आएगा कि वे इस आसन को करने से घबराएँगे. लेकिन धीरे-धीरे कुछ समय बाद ऐसे लोग भी आसानी से वज्रासन करने लगते हैं. 


 -इस आसन से पाचन तंत्र सुगम रहता है और पेट की दूसरी बीमारियाँ भी दूर होती हैं शुरुआत में एक छोटा तकिया या छोटा कंबल मोड़कर अपने नितंबों और पैरों के बीच में रखना चाहिए. 


 -इससे घुटनों और टखनों पर दबाव नहीं पड़ेगा और आसन करना आसान हो जाएगा. 


-इस आसन को सबसे पहले 10 सेकेंड करें, फिर 20 सेकेंड तक बढ़ाएँ. कुछ दिन तक लगातार अभ्यास करने पर आप एक मिनट तक वज्रासन करने लगेंगे. 


-वज्रासान में अगर पैरों या टखनों में अधिक खिंचाव और तनाव हो रहा हो तो दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठें और पैरों को बारी-बारी से घुटने से ऊपर नीचे हिलाएं. 


-कुछ समय में ही आप इस तरह के दबाव से आज़ाद पाएँगे. 


-जिनके घुटने कमज़ोर हों, जिन्हें गठिया हो या फिर जिनकी हड्डियां कमज़ोर हों, वे लोग वज्रासन न करें.


वज्रासन के फ़ायदे 
-वज्रासन से रक्त का संचार नाभि केंद्र की ओर रहता है. इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट से संबंधित रोग भी दूर होने लगते हैं. 


-महिलाओं के लिए भी वज्रासन उपयोगी है. इससे मासिक धर्म की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.

17 टिप्‍पणियां:

  1. bahut laabhkari post.aabhar mere liye to bahut upyogi hai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिन्हें घुटनों में दर्द रहता है उनके लिए क्या सुझाव है ?
    मतलब समान लाभ वाला कोई दूसरा आसन ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    इंडिया दर्पण की ओर से शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सहज सरल अनुकरणीय .लेकिन इसे कुछ लोगनहीं अपना सकते वे जिन्हें फुट ड्रॉप है जो अपने पंजो के बल बैठ नहीं सकते, पालथी मारके भी नहीं बैठ सकते ,इंडियन स्टाइल का टायलित नहीं स्तेमाल कर सकते उनके लिए भी कोई विकल्प होगा ज़रूर ?कृपया बताएं यदि है तो .

    उत्तर देंहटाएं
  5. उपयोगी एवं महत्‍वपूर्ण जानकारी ...आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अत्यंत लाभदायी पोस्ट...
    सादर आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  7. नियमित अभ्यास के बाद इसे करना बेहद सरल है....
    बहुत बढ़िया जानकारी राधारमण जी.
    शुक्रिया.

    उत्तर देंहटाएं
  8. पैगम्बर हजरत मौहम्मद साहब स. ने फ़रमाया है कि 'नमाज़ में शिफा है'
    नमाज़ में खड़े होने से लेकर बैठने तक जितनी भी हालतें हैं वे सभी हालतें हिन्दी में आसन कहलाती हैं. जिस तरीके से नमाज़ में बैठा जाता है उसे हिंदी में वज्रासन कहा जाता है. वज्रासन के बहुत फ़ायदे बताये जाते हैं लेकिन नमाज़ में जिस तरीके से बैठा जाता है उसके फायदे वज्रासन से भी ज्यादा हैं. इसकी वजह यह है कि वज्रासन में तो योगी अपने दोनों पैर के पंजे पीछे निकाल देता है जबकि नमाज़ी अपने दाहिने पैर का पंजा ज़मीन पर ही रखता है. इस तरह पैर के अंगूठे पर ख़ास तौर पर प्रेशर पड़ता है. एक्यूप्रेशर और सु-जोक के मुताबिक़ पैर के अंगूठे का ताल्लुक़ दिमाग़, आँख, नाक,कान,गला और गर्दन से होता है. इस तरह बैठने से पैर के तलवों और पिंडलियों पर भी दबाव थोडा ज्यादा और बेहतर तरीके से पड़ता है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. See
    http://tibbe-nabvi.blogspot.com/2012/03/blog-post_22.html

    उत्तर देंहटाएं
  10. 'नमाज़ में शिफा है'
    पैगम्बर हजरत मौहम्मद साहब स. ने फ़रमाया है कि 'नमाज़ में शिफा है'
    नमाज़ में खड़े होने से लेकर बैठने तक जितनी भी हालतें हैं वे सभी हालतें हिन्दी में आसन कहलाती हैं. जिस तरीके से नमाज़ में बैठा जाता है उसे हिंदी में वज्रासन कहा जाता है. वज्रासन के बहुत फ़ायदे बताये जाते हैं लेकिन नमाज़ में जिस तरीके से बैठा जाता है उसके फायदे वज्रासन से भी ज्यादा हैं. इसकी वजह यह है कि वज्रासन में तो योगी अपने दोनों पैर के पंजे पीछे निकाल देता है जबकि नमाज़ी अपने दाहिने पैर का पंजा ज़मीन पर ही रखता है. इस तरह पैर के अंगूठे पर ख़ास तौर पर प्रेशर पड़ता है. एक्यूप्रेशर और सु-जोक के मुताबिक़ पैर के अंगूठे का ताल्लुक़ दिमाग़, आँख, नाक,कान,गला और गर्दन से होता है. इस तरह बैठने से पैर के तलवों और पिंडलियों पर भी दबाव थोडा ज्यादा और बेहतर तरीके से पड़ता है.

    उत्तर देंहटाएं
  11. Dear Sir,
    I am Shashank Singh, working with Lead India Group as a Sub Editor and Assignment Head.
    On Behalf of Lead India Group, I want to publish your Article in our website and Newspaper www.insidestorymedia.com in Opinion Section. So, Kindly send your mail at author@insidestorymedia.com, insidestoryauthor@gmail.com.
    It is the Hindi News Portal of Lead India Group.
    Lead India Group is holding Seven Websites:
    www.leadindiagroup.com (Official & English News Website)
    www.insidestorymedia.com (Hindi News Portal)
    www.lipa.co.in (Publishers Association)
    www.bestpromotionplan.com (Advertisement Booking)
    www.leadindiajobs.com (Jobs Place)
    www.leadindiatech.com (Technical Solution)
    www.liimt.com (Media Training Institute)
    So, kindly send us your response.

    Yours,
    Shashank Singh
    Sub Editor and Assignment Head
    +91-9990892816, 22526645/46
    Lead India Group

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Please go ahead but forget not to send me the link. Regards.

      हटाएं
    2. ok .
      See
      चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (१६)
      http://www.merasarokar.blogspot.in/2012/03/blog-post_22.html

      हटाएं
    3. Your post on 'Blog ki khabren'
      http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/03/vajrasan.html

      Please leave your email id in comment box also.

      हटाएं
  12. काफ़ी लाभकारी है यह आसन।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत अच्छी जानकारी ... आभार ... :)

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।