शुक्रवार, 9 मार्च 2012

नवजात पर पर्याप्त ध्यान दे लेने के बाद ही गर्भधारण उचित

दो साल से कम उम्र का बच्चा पूरी तरह माँ पर निर्भर रहता है। अगर इस दौरान वह फिर गर्भवती हो जाती है तो बच्चे पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाएगी। ऐसी माँ के शरीर में आयरन और इसी तरह के अन्य पौष्टिक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं होते। अगर वह प्रसव के दो साल के भीतर फिर गर्भवती हो जाती है तो उसे और उसके पेट में पल रहे बच्चे दोनों को जानलेवा बीमारियों का खतरा रहता है। इसलिए जब बच्चा ४ या ६ महीने का हो जाए और दलिया, दाल, खिचड़ी जैसे अर्ध-तरल पदार्थ खाने लगे तो अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए गर्भ निरोधक के किसी तरीके का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 

नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें? 
नवजात शिशु विशेष तौर से रोगों के प्रति असुरक्षित होते हैं। यदि परिवारों द्वारा सरल व्यावहारिक उपाय अपनाए जाएँ तो रोके जा सकने वाले रोगों का निवारण और नवजात की मौत को रोका जा सकता है। प्रसव पूर्व अवधि के दौरान गर्भवती महिलाओं को टिटेनस टॉक्साइड का इंजेक्शन दिया जाना चाहिए । यह माता और नवजात में टिटेनस की रोकथाम करने के लिए जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान कम से कम तीन बार जाँच अवश्य कराएँ।

-माताओं को प्रसव स्वास्थ्य केंद्र में ही करवाना चाहिए ।

-शिशु को बहुत सारे व्यक्ति न उठाएँ। शिशु को भीड़-भाड़ के स्थानों पर नहीं ले जाना चाहिए। अतिसार और खाँसी जैसे संक्रामणों से ग्रस्त लोगों को बच्चे को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए। 
 
-नवजात शिशु को सदा गर्म रखा जाना चाहिए। छोटे बच्चे अपने शरीर के तापमान को बनाए नहीं रख सकते हैं। यदि उनको देखरेख के बिना छोड़ा जाए तो उनको तेजी से ठंड लग जाएगी और वे हाइपोथर्मिया से मर सकते हैं।

-जैसे ही शिशु का जन्म हो उसे सूती कपड़े से पोंछना चाहिए। प्रसव के पश्चात सिर की त्वचा को तेजी से सुखाना विशेष तौर पर महत्वपूर्ण है। प्रसव के पश्चात बच्चे को स्तनपान करवाने से भी शिशु को गर्म रखने में सहायता मिलेगी।

-शिशु को हवा के झोंकों से बचाकर रखना चाहिए, शिशु को पंखे के नीचे और कूलर के सामने नहीं रखा जाना चाहिए। शिशु को रखे जाने वाले कमरे को काफी गर्म रखा जाना चाहिए। 

-जब शिशु बीमार होता है तो अधिकतर माताएँ पहचान सकती है। कुछ में तो चिकित्सा सहायता लेना चाहिए, क्योंकि नवजात की दशा बहुत जल्दी ही खराब हो जाती है। यदि शिशु में कोई खतरे के चिह्न दिखाई दे तो उसे तत्काल ही स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया जाना चाहिए(डॉ. इक़बाल मोदी,सेहत,नई दुनिया,मार्च प्रथमांक 2012)।

3 टिप्‍पणियां:

  1. दोनों के ही स्वास्थ्य का खयाल रखना चाहिये.

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  2. बहुत ही बढ़िया जानकारी आभार.....किन्तु अक्सर गर्मियों में जन्म लेने वाले शिशुओं को लोग पंखे या कूलर के सामने रखते है। क्या यह सही है ?

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  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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