बुधवार, 23 नवंबर 2011

बैरियैट्रिक सर्जरी यानी 'टू इन वन'

अगर आप मोटे हैं और साथ में आपको डायबिटीज भी है तो समझिए यह "टू इन वन" इलाज आपका इंतजार कर रहा है। मोटापे से छुटकारे की बैरियैट्रिक सर्जरी कराइए, मधुमेह अपने आप ठीक हो जाएगा। इस सर्जरी को लेकर बहुत तरह की भ्रांतियाँ हैं जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है। मसलन, यह सर्जरी कराने से व्यक्ति का शरीर प्रोटीन से महरूम हो जाता है। शरीर में विटामिन एवं खनिज लवणों की कमी भी हो जाती है। यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। 

बैरियैट्रिक सर्जरी कई तरह की होती हैं। चूँकि भारत में ज्यादातर लोग शाकाहारी होते हैं, इसलिए हम यहाँ बैरियैट्रिक सर्जरी का वह प्रकार चुनते हैं जिसके बाद प्रोटीन की कमी नहीं हो। बैरियैट्रिक सर्जरी का यह प्रकार है गैस्ट्रिक बाइपास। यहाँ हम प्रोटीन की कमी पैदा करने वाली "ड्यूडोनल स्विच सर्जरी" नहीं करते। यह सर्जरी वैसे लोगों के लिए है जो मांशाहारी रह चुके हैं। बैरियैट्रिक सर्जरी के बाद कैल्शियम, विटामिन बी -१२ एवं फोलिक एसिड की कमी जरूर हो जाती है लेकिन इतनी कमी भी नहीं हो जाती है कि इस बेहद लाभकारी सर्जरी से परहेज करने लगें। थोड़ी कमी हो भी गई तो इस सर्जरी के बाद हुए बेहद अल्प आहार में इनकी कमी पूरी करने के लिए एक टेबलेट भी जोड़ देते हैं। इस सर्जरी को लेकर एक भ्रांति भी यह है कि इसके बाद शरीर से चर्बी के निकल जाने से त्वचा झूलने लगती है, शरीर में कई जगह बैग जैसा झूलने लगता है। इसे ठीक करने के लिए कई बार प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ती है। अब तक का अनुभव बताता है कि मोटापा कम करने की तमाम कोशिशों के बाद जब आदमी थक जाता है तो अंततः यह सर्जरी ही काम आती है। 

सही बात यह है कि वर्जिस कर शरीर में भूख बढ़ाने वाले हॉरमोन "घ्रेटिन", जिसे "हंगर हॉरमोन" भी कहते हैं, को मारना बेहद कठिन काम है। डायटिंग करने के बाद इसका उत्पादन इतना बढ़ जाता है कि अंततः मोटापा घटाने की हमारी इच्छाशक्ति अपने घुटने टेक देती है। कुछ दिन डायटिंग के बाद ५ किलो घटा लिया तो "घ्रेटिन" के फिर हावी होने पर वह कसर निकाल लेता है यानी ५ किलो की जगह शरीर पर १० किलो चर्बी जमा हो जाती है। भले ही मोटापा घटाने की कई गोलियाँ आ गई हैं, "वेट लॉस" क्लिनिक खुल गए हैं लेकिन अब देखा जा रहा है कि वजन कम करने की सबसे प्रभावी विधि बैरियैट्रिक सर्जरी ही है। 

इस सर्जरी में एक बैंड के जरिए पेट के आकार को कम कर दिया जाता है। तब आधी-एक रोटी से ही लगने लगता है कि बहुत खा लिया। इस सर्जरी के पहले जो आदमी लजीज भोजन पर टूट पड़ता था, वह एक रोटी में ही बस बोल जाए तो फिर इससे बेहतर डायटिंग और क्या होगी भला। अब खूब खाने की आदत रही है लेकिन बाहर से कुछ आ नहीं रहा है तो इतने दिनों में जमा चर्बी ही शरीर के काम आने लगती है। 


नतीजतन तेजी से वजन घटने लगता है। लेकिन वजन घटाने की इस सर्जरी से मधुमेह का दूर होना एक बहुत बड़ी खोज है। वह दिन दूर नही जब यह सर्जरी ही मधुमेह की "फर्स्ट लाइन" इलाज हो जाएगी। मोटापे को नापने का फार्मूला है बीएमआई यानी शरीर का वजन (किलोग्राम) बटा मीटर में लंबाई का वर्ग। बीएमआई जितना अधिक होगा उतनी ही अधिक चिंता की बात होगी। पहले हम केवल ४० बीएमआई वाले मोटे लोगों में ही यह सर्जरी करते थे लेकिन सर्जरी की बड़ी संख्या हो जाने पर बैरियैट्रिक सर्जरी करने वाले विशेषज्ञों को यह देख कर सुखद आश्चर्य हुआ कि ८५ प्रतिशत लोगों में मधुमेह विलुप्त हो गया। दवा या इंसुलिन लेने की जरूरत ही खत्म हो गई। भारत सहित एशियन मूल के लोगों को पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में मधुमेह और मोटापे का जोखिम अधिक होता है। इसलिए यहाँ के लिए तो यह सर्जरी मानिए वरदान ही है। किसी को मधुमेह हो गया तो फिर हार्ट, किडनी और लीवर सब खतरे में पड़ गया। मधुमेह पर बैरियैट्रिक सर्जरी के इस प्रभाव को देख कर फिर हमने ३७.५ बीएमआई में यह सर्जरी शुरू कर दी। फिर ३५ एवं ३२.५ बीएमआई में यही सर्जरी करने लगे हैं । अब वैसे लोगों में भी यह सर्जरी होने लगी है जो मधुमेह से पीड़ित तो हैं लेकिन मोटे नहीं हैं यानी जिनका बीएमआई २७.५ ही है । इस सर्जरी से मधुमेह के इलाज में किसी शक की गुंजाइश नहीं रह गई है क्योंकि इंटरनेशनल डायबेटिक फेडरेशन ने बीते मार्च में सर्वसम्मति से मधुमेह के इलाज के लिए इस सर्जरी को हरी झंडी दे दी।(डा. अतुल पीटर्स,सेहत,नई दुनिया,नवम्बर तृतीयांक 2011)। 


कल सुबह सात बजेः 


शरीर में गांठें हों,तो एनएफसी जांच ज़रूर कराएं

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