शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

घुटने की चोट में क्या करें?

घुटने की चोट सिर्फ खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि शारीरिक तौर पर सक्रिय रहने वाले किसी भी व्यक्ति को लग सकती है। अक्सर घुटने की चोटों को नज़रअंदाज़ किया जाता है। लंबे समय तक इलाज न किया जाए तो समस्या गंभीर हो जाती है। 

घुटने के जोड़ में जाँघ और पैरों की हड्डी के बीच मेनिस्कस नामक लचीला गद्देनुमा पदार्थ होता जो चलते या दौड़ते समय दोनों हड्डियों को एक-दूसरे से टकराने नहीं देता। घुटने की चोटों में सबसे अधिक मेनिस्कस ही क्षतिग्रस्त होता है। मेनिस्कस आमतौर पर खेलकूद जैसी सघन गतिविधियों के दौरान ही फट जाता है। कई बार मोटरसाइकल अथवा दो पहिया वाहन चलाने के दौरान हुई दुर्घटना में भी घुटना क्षतिग्रस्त हो जाता है। उम्रदराज़ होने पर मेनिस्कन घिसने लगता है। 

पुरुषों में घुटने की सबसे आम समस्या कौन सी है? मेनिस्कस फटना पुरुषों के घुटने की एक समस्या है। यह एक गद्देदार तश्तरीनुमा कुशन होता है जो घुटने को स्थिरता प्रदान करता है।

इसमें चोट कैसे लगती है? 
मेनिस्कस में आगे या पीछे की ओर झुकने अथवा तेजी से मुड़ जाने के कारण चोट लगती है। ऊँकड़ु बैठने के दौरान भी यह क्षतिग्रस्त हो सकता है।

घुटने की चोट की गंभीरता कैसे पता चल सकती है? 
मेनिस्कस फटने के अधिकांश मरीज घुटने में एक खुजलाहट महसूस करते हैं। आमतौर पर इस तरह की चोटों में सूजन आ जाती है। घुटने का जोड़ एकाएक लॉक भी हो जाता है। 

चोट लगने पर क्या करें? 
 यदि आपको यह आशंका है कि आप ऐसी किसी चोट के शिकार हैं तो तुरंत चिकित्सक की मदद लेना चाहिए। इस तरह की चोट में आराम करना श्रेयस्कर होता है। कई बार मेनिस्कस टिश्यू जोड़ में फँस जाता है जिससे घुटना लॉक हो जाने जैसा एहसास होता है।

घुटने की चोट का इलाज क्या है? 
मेनिस्कस की चोट को आमतौर पर ऑर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी से ठीक किया जाता है। सर्जरी के दौरान घुटने के जोड़ में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं जिससे होकर सर्जरी का औजार शरीर के अंदर प्रविष्ट कराया जाता है। फटे हुए मेनिस्कस में से अस्थिर टिश्यू को काटकर निकाला जाता है। कई बार फटे हुए मेनिस्कस को टाँके लगाकर पुनः सिल दिया जाता है। ओपन सर्जरी में बड़ा चीरा लगाया जाता है जिससे कई तरह की परेशानियाँ भी बढ़ जाती हैं। इन दिनों नई तकनीक से घुटने की चोट का इलाज किया जाता है जिससे मरीज न्यूनतम समय में काम पर लौट जाता है।

ठीक होने में कितना समय लगता है? 
 सामान्य रिसेक्शन सर्जरी के बाद दो दिन में ही मरीज बैसाखी के सहारे चल सकता है। पूर्णतः ठीक होने में चार से छः हफ्ते का समय लगता है। कई मरीजों को अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है।

चोट की क्या गंभीर स्थिति हो सकती है? 
मेनिस्कस प्रकृति द्वारा दिया गया शॉक एब्जार्बर है। इसे काटकर निकालने से ऑर्थराइटिस की समस्या उभरने का जोखिम है। जहाँ तक संभव हो क्षतिग्रस्त ऊतकों की रिपेयरिंग करना ठीक होता है(डॉ. कमल वैद,सेहत,नई दुनिया,नवम्बर तृतीयांक 2011)।

9 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी जानकारी दी है आपने।

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. मेनिस्कस इंजरी में अर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए । मामूली टियर अपने आप आराम करने से भी ठीक हो जाता है ।

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  5. अच्छी जानकारी देती रचना |
    आशा

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  6. जानकारी अच्छी है।धन्यवाद॥

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  7. Agar Girne par accident hone par ghutno main
    Agar Lag Jaye to uska koi bhi medicine ya doctor ilaj Bataye

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