बुधवार, 2 नवंबर 2011

मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए आप कितने प्रयासरत हैं?

स्वस्थ रहने का अर्थ है- व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनो रूप से स्वस्थ रहे। विश्वभर में मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो कि चिंता का विषय है। ऐसे में इन समस्याओं से निपटने और बचने के तरीकों की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।  

बढ़ रहा है मानसिक रोग 
आँकड़ों के अनुसार विश्व की १२ प्रतिशत आबादी मानसिक बीमारियों की शिकार है। दुनियाभर में हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के मानसिक रोग से प्रभावित होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष २००२ में दुनियाभर के करीब साढ़े पंद्रह करोड़ लोग अवसाद के शिकार हुए थे। अवसाद यानी व्यक्ति का गंभीर रूप से उदास हो जाना। यह एक प्रकार का मानसिक रोग है, जिससे व्यक्ति का जीवन काफी प्रभावित होता है। अवसाद, शिज़ोफ्रेनिया और बायपोलर डिऑर्डर के मामले विश्व भर में अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे हैं। लेकिन कई लोग समाज में मज़ाक का पात्र बनने के डर से मानसिक रोग से पीड़ित होने की बात को स्वीकारना ही नहीं चाहते हैं। इसी वजह से वे मनोचिकित्सक से संपर्क करने में भी हिचकिचाते हैं और इलाज न होने के कारण रोग के शिकंजे से बाहर निकलना उनके लिए और मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर के पास वे तब पहुँचते हैं जब मामला काफी बिगड़ चुका होता है। 

मानसिक रोगों के इलाज के लिए शुरुआत में चिकित्सक से संपर्क कर लें तो इनसे उबरना संभव है। उलझी हुई जीवनशैली अपना रहे लोग मानसिक रोगों की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना एक बहुत ही संवेदनशील विषय है, इसलिए स्थिति बिगड़ने या जीवन को खत्म करने की कगार पर पहुँचने से पहले हल निकलना बहुत ज़रूरी है। यही कारण है कि आज मानसिक रोगों से प्रभावित होने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है। विभिन्ना माध्यमों से लोगों को अपनी मानसिक तकलीफों के बारे में बेझिझक बताने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।  

शिज़ोफ्रेनिया और मिर्गी अन्य कारणों में शामिल हैं। अचानक हुई शारीरिक अक्षम्यता व अन्य बीमारियाँ भी मानसिक रोगों का कारण हो सकती हैं। अध्ययन में प्रसवोत्तर अवसाद की दर ११ प्रतिशत पाई गई,जिसके पीछे आय कम होना,लड़की का जन्म,गर्भावस्था के समय हुआ हादसा या दाम्पत्य जीवन की परेशानियां जिम्मेदार थे। ऐसे मामलों को परिवार के हर सदस्यों के प्यार,सहयोग,काउंसिलिंग और मदद के जरिए कम किया जा सकता है। इसके अलावा,कई सेलेब्रिटी भी मानसिक रूप से टूट कर अवसादग्रस्त हो जाते हैं। जाहिर है,इसके लिए उनका उथल-पुथल भरा जीवन और रोज़ का मानसिक संत्रास होता है। इससे यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि अवसाद या मानसिक रोग केवल गरीबों को या रईसों को ही प्रभावित करते हैं। यह किसी को भी जकड़ सकते हैं। इसलिए,हरेक को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। आखिर,स्वस्थ दिमाग के बल पर ही बेहतर जीवन संभव है(डॉ. सुनील मित्तल,सेहत,नई दुनिया,अक्टूबर तृतीयांक 2011)। 
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शाम सात बजे जानिएः


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6 टिप्‍पणियां:

  1. मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल ज़रूरी है..... जागरूक करती पोस्ट

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  2. कुछ ध्यान, कुछ योग और कुछ सैर कर लेता हूं।

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  3. जानकारीपरक, सार्थक पोस्ट आभार

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  4. बहुत बढ़िया जानकारी है !
    शारीरिक स्वाथ्य के लिये अच्छी डायट
    और मानसिक स्वास्थ्य के लिये योग
    बहुत जरुरी है मै तो इन्ही का अनुसरण करती हूँ !

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  5. शरीर का हर अंग ज़रूरी है हर मर्ज की दावा ज़रूरी है फिर चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक....
    .समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  6. सकरात्मक सोच , हंसमुख व्यक्तियों का साथ , सबके प्रति स्नेह भाव , उस परम सत्ता पर विश्वास आदि मानसिक स्वास्थ्य की सबसे बेहतरीन औषधि है , योग या दवा के साथ इनका होना भी आवश्यक है !

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