गुरुवार, 8 सितंबर 2011

ऑस्टियोपोरोसिस में आसन

ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ती उम्र की एक समस्या है, जो महिलाओं को ज्यादा परेशान करती है। इसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिस कारण शरीर में कई दिक्कतें पैदा होती हैं। इससे बचने के लिए खानपान का तो ख्याल रखना जरूरी है ही, योग और आसन का नियमित अभ्यास भी बेहद लाभकारी साबित होता है।
ऑस्टियोपोरोसिस या अस्थिक्षीणता की समस्या से पूरे विश्व में काफी लोग पीड़ित हैं। सारे संसार में इसके मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण 20 अक्तूबर को ऑस्टियोपोरोसिस दिवस भी मनाया जाता है। 
यह बीमारी बढ़ती उम्र की समस्या है। इसमें हड्डियों का घनत्व एवं अस्थिमज्जा बहुत कम हो जाती है। हमारी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। उसके बाद जब भी उन पर हल्का दबाव पड़ता है तो उस स्थिति में वे टूट जाती हैं। इस बीमारी के कारणों में प्राय: जीवनशैली, योग की कमी, हारमोन्स की कमी, मांस- मदिरा-ध्रूमपान सेवन, भोजन में कैल्शियम और मिनरल की कमी, मोटापा और पैतृक कारण प्रमुख होते हैं। 
यह रोग महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले अधिक होता है, क्योंकि महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हारमोन की कमी होने लगती है। इस कारण शरीर की हड्डियों के द्रव्यमान में कमी आ जाती है। कभी-कभी विटामिन डी और प्रोटीन्स की कमी से भी यह रोग हो जाता है। कहा जाता है कि लगभग 6 करोड़ भारतीय इस रोग से ग्रस्त हैं। 45 वर्ष से अधिक उम्र की 10 महिलाओं में से 4 को यह समस्या होती है। 
योग और खानपान के द्वारा हम काफी हद तक इस समस्या से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। हड्डियों को मजबूत रखने के लिये हमें कैल्शियम के अच्छे स्त्रोतों- दूध, पनीर, दही, खमीर आदि के सेवन की सलाह तो दी ही जाती है, कई योग और आसन हैं, जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करके हम इस रोग से अपना बचाव कर सकते हैं। इन योगासनों में उत्तानपाद आसन, पश्चिमोत्तान आसन, सूर्य नमस्कार, चक्रासन, भुजंगासन, उष्ट्रासन, मकरासन, नाड़ीशोधन, कपालभाति, शवासन प्रमुख हैं। 

चक्रासन विधि: 
पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं और फिर दोनों पैरों को मोड़कर एड़ियों को नितंब से सटा लें एवं दोनों हाथों को कान के पास इस प्रकार रखें कि अंगुलियां पैरों की तरफ रहें। अब धीरे-धीरे सिर की तरफ वजन देते हुए मध्य वाले भाग से पूरे शरीर को ऊपर उठायें। अब इस अवस्था में रुकें, जितनी देर आप आसानी से रुक सकते हैं। ना रुक पाने पर धीरे-धीरे पूर्व की अवस्था में वापस आएं। यह अभ्यास कम से कम 3 बार करें। 

लाभ: 
यह आसन हमारे मेरूदण्ड के लिए रामबाण की तरह है। स्त्रियों के आन्तरिक अंगों के लिये लाभकारी है। यह मोटापा कम करता है। इससे जांघें, मेरूदण्ड व भुजाएं मजबूत होती हैं। यह आसन पीठ, पेट तथा प्रजनन अंगों के लिए बहुत ही लाभकारी है और महिलाओं के गर्भाशय के विकारों को दूर करता है।। 

सावधानियां: 
हृदय रोगी, रक्तचाप, अल्सर, हार्निया के रोगी तथा गर्भवती महिलाएं यह आसन न करें(सुनील सिंह,हिंदुस्तान,दिल्ली,7.9.11)। चित्र विकीपीडिया से साभार।

6 टिप्‍पणियां:

  1. कुमार राध्रमण साहब .अच्छी संपूरक और प्रासंगिक बहु -उपयोगी लिस्ट आपने मुहैया करवाई है .आभार .
    .
    बुधवार, ७ सितम्बर २०११
    किस्मत वालों को मिलती है "तिहाड़".

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  2. अस्थि भंगुरता पर बेहद उपयोगी जानकारी दी है आपने .एक महत्वपूर्ण पोस्ट .

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  3. अच्छी जानकारी ।
    एक गिलास दूध सुबह शाम ज़रूर पियें ।

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