शनिवार, 27 अगस्त 2011

दूध में छिपा है ह्वे प्रोटीन

संतुलित आहार से शरीर को कई प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, ख्निज लवण और विभिन्ना विटामिन। ये सभी शरीर में अवशोषित होकर विभिन्ना क्रियाओं के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। कार्बोहाइड्रेट और वसा से हमें ऊर्जा मिलती है, वहीं प्रोटीन से शरीर का निर्माण होता है। प्रोटीन भी दो प्रकार के होते हैं, प्रथम श्रेणी के प्रोटीन जिसमें आवश्यक एमिनो एसिड्स पाए जाते हैं। यह मांस, मछली, अंडे और दूध आदि से मिलते हैं। दूसरे प्रकार के प्रोटीन में सभी आवश्यक एमिनो एसिड्स उपलब्ध नहीं होते हैं, इसीलिए यह द्वितीय श्रेणी का प्रोटीन कहलाता है। दालों और अनाज में द्घितीय श्रेणी का प्रोटीन होता है। हर घर में दूध एक ऐसा भोज्य पदार्थ है, जो हमेशा उपलब्ध रहता है। यदि दूध व दूध से बनी चीज़ों को नियमित रूप से भोजन में सम्मिलित किया जाए तो आवश्यक प्रोटीन सहजता से मिल जाता है। दूध से बनी चीज़ों के बारे में तो सभी जानते हैं, जैसे दही व पनीर आदि लेकिन दूध से प्राप्त व्हे वॉटर के बारे में कम ही जानते हैं। दूध को फाड़कर छैना या पनीर बनाए जाने पर उसका जो पानी बचता है, यही व्हे वॉटर होता है। इस पानी में जो प्रोटीन निकलता है वह व्हे प्रोटीन होता है। यह आसानी से पचता है और इससे सभी आवश्यक एमिनो एसिड भी मिल जाते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में प्रायः लोग इसे फेंक देते हैं। इस पानी को अन्य भोज्य पदार्थों में मिलाकर भी इस्तेमाल में लिया जा सकता है, जैसे कि इस पानी से आटा गूँथना आदि। प्रोटीन लेने के लिए मांस, मछली, अंडे के स्थान पर व्हे प्रोटीन लेना ज़्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है इसीलिए इसे भोजन में प्रतिदिन सम्मिलित किया जा सकता है(डॉ. शैलजा वायपेयी,सेहत,नई दुनिया,अगस्त तृतीयांक 2011)।

6 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी जानकारी । दूध में प्रोटीन के अलावा कैल्सियम भी होता है जो बुढ़ापे में हड्डियों के लिए बड़ा अच्छा रहता है ।

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  2. जानकारी ही जानकारी दाराल साहेब आपका भी आभार

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  3. जानकारी के लिए धन्यवाद.

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  4. अच्छी लाभकारक जानकारी !
    aabhar ......

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  5. आवश्यक जानकारी!!

    यह बताएं कि क्या मक्खन निकालने के बाद शेष बची छास में यह व्हे वॉटर रहता है?

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  6. क्या भैंस के दूध और थैली वाले दूध दोनों में ये सब होता है, या सिर्फ भैंस के दूध में?

    क्यों कि यहाँ पर तो हम packet वाला दूध ही लेते हैं... भैंस के दूध के लिए सुबह सुबह उठाना मुश्किल लगता है !!

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