शनिवार, 20 अगस्त 2011

क्यों आते हैं चक्कर?

लंबे समय तक खड़े रहने पर लोग अक्सर अचानक चक्कर खाकर गिर जाते हैं। कई बार तो शारीरिक रूप से सक्षम और मज़बूत कद-काठी वाले लोग भी इस तरह गिर पड़ते हैं। काफी समय तक ऑफिस में कंप्यूटर पर या किसी एक ही जगह बैठे-बैठे काम करते रहने के बाद जब कर्मचारी खड़ा होता है तो उसे अचानक चक्कर आने लगते हैं। लेकिन अचानक चक्कर आने का कारण है क्या? हमारे मस्तिष्क की संरचना जटिल होती है, जिसे काम करने के लिए ऑक्सीजन अत्यावश्यक होती है। यही इसकी प्राथमिक आवश्यकता है, इसके अलावा ग्लूकोज़ के बिना भी मस्तिष्क का काम नहीं चल सकता है। चक्कर आने जैसी स्थितियाँ मुख्य रुप से मस्तिष्क में अपर्याप्त रक्त संचार होने पर बनती हैं। लंबे समय तक खड़े रहने से हृदय जो रक्त पाँव की ओर पंप करता है, उसे गुरुत्वाकर्षण की विपरीत दिशा में हृदय की ओर वापिस चढ़ने में अत्यधिक परेशानी होती है। इस वजह से रक्त पिंडलियों में जमा हो जाता है और पिंडलियों की मांसपेशियों का पर्याप्त व्यायाम नहीं होने से रक्त ऊपर नहीं चढ़ पाता, इस प्रकार मस्तिष्क में रक्त की कमी हो जाती है। इसी वजह से व्यक्ति चक्कर खाकर गिर जाता है। ज़मीन पर गिरने के बाद व्यक्ति का सिर और पैर एक ही स्तर पर आ जाते हैं व पैरों से हृदय और मस्तिष्क की ओर रक्त संचार पुनः स्थापित हो जाता है। इस तरह मस्तिष्क को रक्त के द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन तथा ग्लूकोज़ की आपूर्ति हो जाती है। इसी तरह लंबी हवाई यात्राओं में हमेशा निर्देश दिए जाते हैं कि अपनी पिंडलियों की मांसपेशियों का व्यायाम करते रहें, वो इसलिए ताकि पैरों में रक्त जमा न होने पाए। लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों को भी ध्यान देना चाहिए कि अपनी आँखों को नियमित विश्राम देने के अलावा पिंडलियों का व्यायाम भी करते रहें, जैसे पंजों को चलाना आदि। ताकि न आएँ चक्कर... ऐसी स्थितियों से बचने के लिए शारीरिक फिटनेस बहुत ज़रुरी है। फिटनेस के लिए ज़रुरी है एक संयत जीवनशैली तथा नियमित रूप से व्यायाम करना। इसके लिए ये हैं आवश्यक - -प्रतिदिन छह घंटे की नींद और तीस मिनट का व्यायाम -संतुलित भोजन,फास्ट फूड से परहेज -तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी,शराब से दूरी -फिटनेस के लिए टेनिस,फुटबॉल,बैडमिंटन जैसे खेलों में हिस्सा ले सकते हैं। साल में एक बार पहाड़ पर चढ़ने जाएं। यह अत्यावश्यक है कि पिंडलियों की मांसपेशियों को ज़रूरी शक्ति प्रदान की जाए ताकि रक्ता का संचार जारी रहे और यह प्रभावी रूप से पुनः संचारण में आता रहे(डॉ. अनिल भदौरिया,सेहत,नई दुनिया,अगस्त द्वितीयांक 2011)

5 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसा तो हमारे साथ भी कई बार होता है। देखते हैं आपकी सलाह आजमा कर।

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  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  3. इतनी उपयोगी जानकारी उपलब्ध करने के लिए आपका आभार

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  4. sach kaha aapne blood circulation proper na hone ki wajeh se hi aisa hota hai aksar...aaj ye baat apke lekh se hame confirm ho gayi aur treatment bhi mil gaya.

    shukriya.

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  5. सुन्दर जानकारी आजमाकर देखते हैं बहुत - बहुत शुक्रिया |

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