बुधवार, 3 अगस्त 2011

बवासीरःसर्जरी है कारगर इलाज

लक्षण : गुदा से खून रिसना, शौच करते समय दर्द होना, गुदा के आसपास खुजली होना।

निदान : पाइल्स का पता लगाने के लिए प्रॉक्टोस्कोपी की जाती है। साथ ही सिग्मायडोस्कोपी भी ज़रूरी होती है, ताकि ऊपर की आंत में कैंसर या अन्य कोई गंभीर समस्या हो तो उसका भी पता लगाया जा सके।

बचाव : पाइल्स से बचाव के लिए ज़रूरी है कि कब्ज़ियत खत्म की जाए, ताकि शौच के समय ज़ोर देने की ज़रुरत न पड़े।

इलाज : कई मरीज़ों में कब्ज़ियत खत्म हो जाने से राहत मिल जाती है। गर्भवती महिलाओं में पाइल्स की बीमारी ज़्यादा पाई जाती है। गर्भावस्था में तरल पदार्थ, हरी सब्ज़ियाँ, फल आदि का प्रचुर मात्रा में सेवन करने से पाइल्स की तकलीफ कम से कम समय होगी। अधिकांश गर्भवती स्त्रियों की तकलीफ प्रसव के बाद काफी कम हो जाती है। वहीं कई मामलों में किसी न किसी तरह के इलाज की ज़रुरत होती है। पहली और दूसरी के पाइल्स के लिए अब तक इंजेक्शन, रबड़ बैंड एवं कयो सर्जरी की तकनीक उपयोग होती आई है। इलाज के लिए इंफ्रारेड किरणों का प्रयोग नवीनतम तकनीक है। यह एक सक्षम और दर्दरहित तकनीक है। यह इलाज केवल ४-५ मिनट में हो जाता है, इसके लिए मरीज़ को बेहोश भी नहीं करना पड़ता। इलाज के तुरंत बाद ही मरीज़ बगैर दर्द के काम पर जा सकता है। पाइल्स के लिए दूरबीन तकनीक से ऑपरेशन भी किया जा सकता है। इसके लिए स्टेपलर मशीन उपयोग में लाई जाती है। इसके द्वारा पाइल्स का १-२ इंच हिस्सा काट दिया जाता है और बाकी का हिस्सा स्टेपल कर दिया जाता है। मरीज़ को १-२ दिन तक पूरा आराम करना होता है। इसके अलावा तीसरी और चौथी डिग्री के पाइल्स में ओपन सर्जरी ही कराना पड़ती है। इसमें ज़्यादातर मरीज़ों को २-३ दिन तक अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है। बाद में भी कुछ दिनों तक ड्रेसिंग करानी पड़ती है, साथ ही एनल डायलेटर का इस्तेमाल करना होता है, ताकि गुदा का मार्ग सिकुड़े नहीं। सर्जरी के ३-४ हफ्ते बाद मरीज़ पूरी तरह अच्छा हो जाता है। इसलिए यदि चिकित्सक पाइल्स के लिए सर्जरी का बोले तो इसे कराने में संकोच या देरी न करें। यह जल्द से जल्द कराना ही ठीक होगा(डॉ. संजय माहेश्वरी,सेहत,नई दुनिया,जुलाई पंचमांक 2011)।

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