शनिवार, 2 जुलाई 2011

कैंसर का इलाज़ एसआरबीटी से

कैंसर का खतरा पूरे विश्व में बढ़ रहा है और भारत भी इसका अपवाद नहीं है। आने वाले दो दशकों में कैंसर के मामलों में ५० प्रतिशत तक की वृद्धि होने की आशंका है। कैंसर के इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है कि शुरुआती अवस्था में ही इसके लक्षणों को पहचाना जाए। इससे समय रहते ही कैंसर का निदान हो पाएगा और सही इलाज मिलने से रोकथाम भी बेहतर ढंग से हो सकेगी। हमारे देश में हेल्थ केयर की जो पद्धति है वह कैंसर प्रबंधन को जटिल और चुनौतीपूर्ण बना देती है। इसके लक्षणों की पहचान और इलाज में देरी से कैंसर जैसी बीमारी और भी खतरनाक रूप धर सकती है। एक ज़माना था जब कैंसर के मरीज़ों को इलाज के लिए अमेरिका और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में जाना पड़ता था। उस समय केवल वहीं पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल और विश्वस्तरीय विशेषज्ञ उपलब्ध हुआ करते थे। लेकिन अब भारत में भी तकनीकी विकास के साथ उच्च स्तरीय इलाज संभव है। यहाँ उपलब्ध रेडियो थैरेपी का स्तर योरप और अमेरिका जैसा ही है और इन देशों की तुलना में सस्ता भी है। इसे अनुभवी सर्जिकल और मेडिकल ऑन्कोलॉजी टीम का पूरा सहयोग और समर्थन प्राप्त है।

सबसे आधुनिक रेडियो थैरेपी तकनीक एसबीआरटी यानी स्टोरियोटेटिक बॉडी रेडिएशन थैरेपी है। फेफड़ों के कैंसर, जिगर के कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, हड्डी के सीमित कैंसर आदि विभिन्न प्रकार के कैंसरों के इलाज में इस तकनीक का इस्तेमाल होता है। इससे कैंसर के मरीज़ों का इलाज किया जा रहा है तथा इसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। इसके अंतर्गत ख़ासतौर पर डॉक्टरों के पर्यवेक्षण में इलाज किया जाता है।


इस तकनीक से ज़्यादा मात्रा में रेडिएशन दिया जा सकता है जिसका बहुत कम दुष्प्रभाव होता है। इमेज गाइडेंस और रैपिड आर्क जैसी नवीनतम पद्धतियों से रेडिएशन की सूक्ष्म किरणें सिर्फ कैंसर तक सीमित रखी जाती हैं। सामान्य कोशिकाओं को रेडिएशन से बचाया जा सकता है। यह इलाज १-५ चरणों में पूरा हो जाता है, इसके विपरीत साधारण रेडियोथैरेपी में ३०-३५ चरणों की ज़रूरत होती है।(डॉ. अमित अग्रवाल,सेहत,नई दुनिया,जून चतुर्थांक 2011)

6 टिप्‍पणियां:

  1. कैंसर का खतरा पूरे विश्व में बढ़ रहा है और भारत भी इसका अपवाद नहीं है। आने वाले दो दशकों में कैंसर के मामलों में ५० प्रतिशत तक की वृद्धि होने की आशंका है। कैंसर के इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है कि शुरुआती अवस्था में ही इसके लक्षणों को पहचाना जाए। इससे समय रहते ही कैंसर का निदान हो पाएगा और सही इलाज मिलने से रोकथाम भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।
    जन-जागरण हेतु काम की जानकारी !
    मुबारकबाद !!!
    त्वचा में दर्द के अभिग्राहकः Receptors

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  2. महत्वपूर्ण जानकारी दी आपने।

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  3. कैंसर जैसी भयंकर बीमारी केइलाज़ सम्बन्धी सार्थक जानकारी देनेवाला आपका लेख जनहितकारी है ....

    बहुत-बहुत धन्यवाद स्वीकारें

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