सोमवार, 18 अप्रैल 2011

दिल की हिफाज़त इंटरनेट से

चिकित्सा वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिसकी मदद से इंटरनेट के जरिए दिल की हिफाजत की जा सकेगी और उसकी गडबडि़यों को भी ठीक किया जा सकेगा। यह तकनीक अब भारत में भी उपलब्ध है।पिछले दिनों इस तनकीक की मदद से दुबई में रहने वाले डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के एक मरीज की जान बचाई गई। इंटरवेंशनल कार्डियोलाजिस्ट डॉ ऋषि गुप्ता ने पिछले दिनों फरीदाबाद स्थित एशियन इंस्टीटच्यूट आफ मेडिकल साइंसेस (एआईएमएस) में मरीज के शरीर में उक्त तकनीक पर आधारित अत्यंत छोटे आकार खुद व खुद हृदय की पंम्पिग क्षमता में सुधार करता है। यह उपहरण हृदय की गडबडि़यों पर नजर रखता है और कंपन के जरिए मरीज को सतर्क करता है। इसके साथ ही साथ यह हृदय के संबंध में सभी जानकारियों को इंटरनेट के जरिए संबंधित अस्पताल को भेज देता है।

एआईएमएस के निदेशक डॉ एन के पाण्डे ने बताया कि यह उपकरण एक साथ कई तरह के कार्य करने में सक्षम है और इसे हृदय के प्रत्यारोपण से पहले दिन के मरीजों के लिए सवरेत्तम एवं सर्वाधिक कारगर उपकरणों में से एक माना जाता है। यह उपहरण हृदय की पंम्पिग क्षमता में सुधार करता है और हृदय के आकार को घटाता है। अनियमित हृदय धड़कन होने की स्थिति में यह दिल की धड़कन को खुद ठीक करता है और दिल के काम करना बंद कर देने पर यह हृदय को स्वत शॉक देकर उसे दोबारा चालू करता है। दिल की धड़कन के शुरु नहीं होने पर यह पेसिंग शुरु कर देता है।


डायलेट कार्डियोमायोपैथी वैसी घातक स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और हृदय की दीवार पतली हो जाती है जिसके कारण उसकी पंम्पिग क्षमता घट जाती है। इसमें हृदय का आकार बडा हो जाता है।

डॉ. एन के पाण्डे ने बताया कि यह उकपरण हृदय की अनियमित धड़कन से संबंधित सभी तरह की जानकारियों को दर्ज करता है। अनेक कार्य करने वाला यह उकपरण मरीज को अनायास होने वाली मौत से बचाता है। उनके जीवन काल को बढाता है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।

अध्ययनों से पता चला है कि यह बीमारी हर एक लाख लोगों में से पांच से आठ लोगों को होती है। इस बीमारी के लिये आनुवांशिक, पारिवारिक कारण और वायरल संक्रमण मुख्य रुप से जिम्मेदार होते हैं। यह बीमारी कोई लक्षण प्रकट किये बगैर बनी रह सकती है। इससे हृदय का आकार धीरे-धीरे बढ जाता है। सांस लेने में दिक्कत होती है तथा पैरों और शरीर के अन्य अंगों में सूजन हो जाती है(दैनिक भास्कर,दिल्ली,18.4.11)।

3 टिप्‍पणियां:

  1. सर अच्छी खबर ,पर खर्च कितना आयेगा ?

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  2. अद्भुत खोज ....वरदान साबित होगी

    जानकारी के लिए आभार

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  3. Please tell us in detail aboutthis achievement.Still waiting forinformations/trainers contact no./address regarding MARM CHIKITSA.Pl respond and oblige.
    dr.bhoopendra singh
    mp

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