रविवार, 13 मार्च 2011

भारतीय वैज्ञानिकों ने ढूंढा नपुंसकता का इलाज

भारतीय वैज्ञानिकों ने अब पुरुषों में नपुंसकता दूर करने का तोड़ ढूढ़ लिया है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) से पुरुषों में होने वाले इस समस्या को दूर करने लिए एंजियोप्लास्टी थेरेपी का इस्तेमाल होगा। ईडी समस्या में पुरुषों में यौन उत्तेजना उत्पन्न करने वाली नसों में रक्त का बहाव धीमा हो जाता है। जिसे एंजियोप्लास्टी थेरेपी के माध्यम से खून के जमाव वाली धमनी के ऊपरी हिस्से पर एक कृत्रिम नलिका लगा दी जाती है। नतीजतन रोगी की स्थिति पहले जैसी सामान्य हो जाती है। इस विधि से45 की आयु पार करने वाले 100 पुरुषों पर किए गए अन्तिम ट्रायल के शत प्रतिशत परिणाम मिले हैं जिसकी रिपोर्ट इंडियन मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हो चुकी है। एशिया पेसिफिक वैस्कुलर इंटरवेंशनल कोर्स के चेयरमैन एवं अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डा. एनएन खन्ना ने यहां चल रहे तीन दिवसीय वास्कुलर इंटरवेंशन सम्मेलन के दौरान यह जानकारी दी। 

डा. खन्ना ने कहा कि इस विधि का रोगियों पर प्रयोग करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद(आईसीएमआर), औषध नियंत्रक को केस हिस्ट्री भेजा गया है। उम्मीद है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर अधिकृत एजेंसियां अपनी जल्द ही स्वीकृति देगी। इस समस्या से देश में 45 की उम्र पार करने वाले 20 फीसद रोगी हैं। जिन्हें यह समस्या है उन्हें बाद में हार्ट अटैक या दिल की बीमारियां होने का खतरा होता है। यह मामला साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप की दवाएं लेने वाले पुरुषों में ईडी रोग होने की सामान्य रोगियों की अपेक्षा 80 फीसद तक ज्यादा संभावनाएं रहती है। इस विधि के इस्तेमाल से यह तय है कि पुरुषों की आयु सीमा बढ़ेगी। डा. खन्ना ने कहा धमनियों की लाइलाज बीमारियों का इलाज अब आसान हो गया है। लेजर सर्जरी, स्टेंट थेरेपी और एंजियोप्लास्टी जैसी वैस्कुलर इंटरवेंशन के क्षेत्र में विकसित नई तकनीकों की मदद से अब सर्जरी के बिना ही धमनियों की उन बीमारियों का उपचार संभव हो गया जिनके उपचार के लिए पहले सर्जरी ही एक मात्र विकल्प होती थी। मल्टी लेर्यड, एंजियोप्लास्टी एवं लेजर थेरेपी नई तकनीकों में प्रमुख है।
(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,13.3.11)

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