मंगलवार, 1 मार्च 2011

नाश्ताःक्या लें,क्या नहीं

ब्रेकफस्ट हमारे खाने का सबसे जरूरी और खास हिस्सा होता है। यह हमारे शरीर को दिन भर काम करने के लिए तैयार करता है। आमतौर पर लोग इस फैक्ट से अनजान होते हैं और ब्रेकफस्ट को इग्नोर कर देते हैं। ब्रेकफस्ट क्यों जरूरी है और अच्छा ब्रेकफस्ट किसे कहा जाता है, एक्सपर्ट्स की मदद से बता रही हैं प्रियंका सिंह :

लंच में क्या बनेगा, डिनर में क्या खाना है... ये बातें आम परिवारों में खूब डिस्कस होती हैं लेकिन ब्रेकफस्ट में क्या बनेगा, इस पर चर्चा कम ही होती है। जो भी सामने दिखा, बना लिया या फिर चाय के साथ टोस्ट या बिस्कुट से ही काम चला लिया। आम परिवारों में ऐसा ही होता है क्योंकि हम लोग खाने में ब्रेकफस्ट को सबसे कम अहमियत देते हैं। ज्यादातर फोकस लंच और डिनर पर ही होता है। इसके पीछे यह सोच भी काम करती है कि कुछ देर बाद तो लंच करना ही है, फिर ब्रेकफस्ट इतना क्यों जरूरी?

सबसे जरूरी ब्रेकफस्ट

- ब्रेकफस्ट से करीब 10-12 घंटे पहले हमने आखिरी बार कुछ खाया होता है। आमतौर पर लोग सोने से 2-3 घंटे पहले डिनर करते हैं और उसके बाद 7-8 घंटे की नींद लेते हैं। सोकर उठने के बाद ब्रेकफस्ट करने तक भी घंटे-दो घंटे बीत जाते हैं, यानी 10-12 घंटे का फास्ट हो चुका होता है। ऐसे में सुबह शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है, जिसके लिए खाना जरूरी है।

- ब्रेकफस्ट बेहद जरूरी होता है क्योंकि यह दिन का हमारा पहला खाना होता है। आमतौर पर सुबह 9 बजे से दोपहर 2-3 बजे तक ही हम सबसे ज्यादा ऐक्टिव होते हैं। ऐसे में इस दौरान तन और मन, दोनों का अलर्ट होना जरूरी है। इसके लिए एनर्जी की जरूरत होती है, जो खाने से मिलती है।

- अगर शरीर को ताजा एनर्जी नहीं मिलेगी तो वह रिजर्व एनर्जी की तरफ जाएगा। इससे शरीर पर लोड बढ़ता है और मेटाबॉलिज्म रेट (शरीर काम करने, यहां तक कि सोने, पढ़ने, बैठने आदि के लिए भी जितनी कैलरी इस्तेमाल करता है) कम हो जाता है। वजह, शरीर को महसूस होने लगता है कि उसके पास कुछ खाना नहीं आ रहा और पहले से रिजर्व खाना कम न पड़ जाए, इसलिए वह मेटाबॉलिज्म रेट कम कर देता है। साथ ही, रिजर्व एनर्जी में से वह शरीर के बाकी हिस्सों को सप्लाई कम कर दिमाग को न्यूट्रिशन वैल्यू भेजना शुरू कर देता है। इससे थकान महसूस होने लगती है।

- लंबे समय तक खाना नहीं खाने से पेट में एसिड बन जाता है, जिसकी वजह से एसिडिटी और अपच जैसी दिक्कतें हो जाती हैं।

ब्रेकफस्ट कब करें

उठने के बाद जितना जल्दी हो सके, ब्रेकफस्ट कर लेना चाहिए। असल में, ब्रेकफस्ट शब्द का मतलब भी यही है, यानी पिछले 10-12 घंटों से जो फास्ट चल रहा है, उसे खत्म करें। सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास पानी पिएं। उसके बाद जूस (फल खाना बेहतर) या चाय ले सकते हैं। इसके बाद ब्रेकफस्ट कर लें। उठने के डेढ़-दो घंटों के भीतर ब्रेकफस्ट कर लेना चाहिए। शुगर के मरीजों को तो फ्रेश होने के फौरन बाद कुछ खा लेना चाहिए।

कैसा हो ब्रेकफस्ट
- ब्रेकफस्ट ताजा होना चाहिए। रात का बासी खाना खाने से बचना चाहिए क्योंकि इस वक्त पेट साफ होता है और शरीर की अब्जॉर्ब करने की कपैसिटी काफी ज्यादा होती है। ऐसे में बासी खाने से शरीर को नुकसान ज्यादा होता है।

- ब्रेकफस्ट पोषक होना चाहिए। भारी और तले-भुने खाने की बजाय पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाएं, मसलन आलू के परांठों की बजाय मेथी के कम घी वाले परांठे खाएं। वाइट ब्रेड की बजाय मल्टिग्रेन ब्रेड खाएं।

- इसमें अनाज होना चाहिए। इसके लिए ओट्स (जई), दलिया, चपाती, वीट फ्लैक्स आदि ले सकते हैं। कॉर्नफ्लैक्स की बजाय वीट फ्लैक्स लेना बेहतर है।

- ब्रेकफस्ट में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट, तीनों होने चाहिए। कुछ लोग सिर्फ टोस्ट और चाय ले लेते हैं या सिर्फ फ्रूट्स ले लेते हैं। यह सही नहीं है। इनसे फौरी तौर पर शुगर तो मिलती है लेकिन बाद में बॉडी लो में चली जाती है और कुछ देर बाद फिर से भूख लग जाती है। इन चीजों से सिर्फ एनर्जी मिलती है, पूरा पोषण नहीं। इनकी जगह दलिया, पोहा, ओट्स जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स लेने चाहिए क्योंकि ये धीरे-धीरे शुगर रिलीज करते हैं। साथ में, प्रोटीन भी लेना चाहिए इसलिए दूध, पनीर, अंकुरित दालें या अंडा (वाइट वाला हिस्सा) ले सकते हैं। सुबह प्रोटीन लेने से एनर्जी की लगातार सप्लाई के साथ-साथ पेट भी भरा हुआ महसूस होता है और जल्दी भूख नहीं लगती। ब्रेकफस्ट के साथ ऑरेंज जूस ले सकते हैं क्योंकि इसमें विटामिन-सी होता है, जो पोषक तत्वों को बॉडी में अब्जॉर्ब करने में मदद करता है। इसी तरह फैट के लिए भीगे हुए पांच बादाम लेना बेहतर है।

- रोजाना एक तरह के ब्रेकफस्ट की बजाय अलग-अलग तरह का ब्रेकफस्ट करें। इससे टेस्ट भी बना रहता है और शरीर को सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं। एक चीज में जिन तत्वों की कमी होती है, दूसरी चीज उस कमी को पूरा कर देती है।

- बेहतर होगा अगर ब्रेकफस्ट के साथ तरल पदार्थ न लें। पीना ही चाहें तो ग्रीन टी, वेजिटेबल जूस, छाछ या दूध ले सकते हैं।

क्या न खाएं
- ब्रेकफास्ट के साथ चाय न पिएं। चाय में टैनिन और कैफीन होते हैं, जो पोषक तत्वों (खासकर कैल्शियम और आयरन) को बॉडी में अब्जॉर्ब नहीं होने देते। चाय पीनी है तो ब्रेकफास्ट से आधा-एक घंटा पहले या बाद में पिएं।

- सुबह-सुबह नॉनवेज न खाएं क्योंकि उस वक्त सिस्टम बिल्कुल फ्रेश होता है और हेवी प्रोटीन खाने से एसिडिटी या गैस हो सकती है। साथ ही लिवर पर जोर भी पड़ सकता है। खाना ही चाहें तो चिकन या फिश के एक-दो पीस खा सकते हैं।

- रिफाइंड या प्रोसेस्ड चीजें न खाएं जैसे कि नूडल्स, पित्जा, बर्गर आदि। बहुत ठंडी चीज न खाएं, न ही ठंडा दूध पिएं। हमारे शरीर का डाइजेशन टेंपरेचर करीब 37 डिग्री होता है। बेहद ठंडा खाने से डाइजेशन सिस्टम को नुकसान होता है।


- मैदा और सूजी से बनी चीजों (काठी रोल, उपमा, उत्पम आदि) को बेहतर ऑप्शन नहीं माना जाता क्योंकि ये रिफाइंड आटा हैं, लेकिन बिना घी के बनाया जाए तो कभी-कभी ले सकते हैं। 
- कॉर्न फ्लैक्स की बजाय वीट या ओट्स फ्लैक्स बेहतर हैं क्योंकि इनमें फाइबर ज्यादा होता है।

फायदे तमाम
- ब्रेकफस्ट करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है। जिनका मेटाबॉलिज्म रेट अच्छा होता है, उनकी कैलरी ज्यादा जलती हैं और शरीर पर एक्स्ट्रा चर्बी नहीं चढ़ती।

- जो बच्चे ब्रेकफस्ट करते हैं, उनकी मानसिक क्षमता काफी अच्छी होती है और वे स्कूल में एक्टिव रहते हैं।

- ब्रेकफस्ट न करने से शरीर में कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड बढ़ता है। दरअसल, ब्रेकफास्ट न करने से शरीर पहले से जमा (रिजर्व) ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। जो ग्लूकोज बच जाता है, वह फैट के रूप में जमा हो जाता है और कॉलेस्ट्रॉल व मोटापा बढ़ता है, जबकि खाने से मिलनेवाला ताजा ग्लूकोज फौरन इस्तेमाल हो जाता है।

- ब्रेकफस्ट करने से ज्यादा एनर्जी का अनुभव होता है और बीच-बीच में भूख नहीं लगती। इस तरह बिंज ईटिंग (बार-बार छिट-पुट खाना) से दूर रहते हैं।

- आजकल लोग इतने बिजी रहते हैं कि लंच या तो छूट जाता है या काफी लेट होता है। ऐसे में ब्रेकफास्ट ढंग से करना और भी जरूरी है। इससे पेट में एसिड भी नहीं बनता।

कितना फासला जरूरी
- एक्सरसाइज करने के कम-से-कम 30-45 मिनट बाद ब्रेकफस्ट करें। जब हम एक्सरसाइज करते हैं तो खून का दौरा पैरों और दूसरे हिस्सों में जाने लगता है। पाचन के लिए खून के दौरे का पेट की तरफ होना जरूरी है, इसलिए एक्सरसाइज और खाने के बीच फर्क होना चाहिए।

- अगर खाने के बाद सैर (ब्रिस्क वॉक) करना चाहें तो भी डेढ़-दो घंटे का फासला जरूर रखें।

- ब्रेकफस्ट और लंच के बीच में 4-5 घंटे का फर्क होना चाहिए। इस बीच स्नैक्स ले सकते हैं, जैसे कि फल, अंकुरित दालें, छाछ, मुरमुरे, पोहा, सलाद आदि। जो किसी वजह से ब्रेकफास्ट और लंच के बीच ज्यादा फासला नहीं रख पाते, उन्हें बीच में स्नैक्स नहीं लेना चाहिए।

ब्रंच का फंडा
हाल के दिनों में ब्रंच (ब्रेकफस्ट और लंच साथ) काफी चलन में है, लेकिन यह हेल्दी आदत नहीं है क्योंकि इससे अगली बार के खाने में काफी अंतर आ जाता है। हालांकि जो लोग शिफ्ट में काम करते हैं या रात में बहुत देर से सोते हैं, वे ब्रंच कर सकते हैं। यह ब्रेकफस्ट के मुकाबले हेवी होता है। इसमें परांठा-सब्जी, रोटी-सब्जी, काठी-रोल आदि खा सकते हैं। ब्रंच करने वाले लोगों को दो बार हल्के स्नैक्स लेने के बाद शाम को जल्दी डिनर कर लेना चाहिए।

कितनी कैलरी ब्रेकफस्ट से
हमारी दिन भर की कैलरी का एक-तिहाई हिस्सा ब्रेकफस्ट से मिलना चाहिए। मसलन, अगर दिन में 1800-2000 कैलरी लेनी हैं तो करीब 600-700 ब्रेकफस्ट से मिलनी चाहिए। इतनी ही लंच से और करीब 100-100 कैलरी दो बार के स्नैक्स से लेनी चाहिए। बची हुई कैलरी डिनर से लेनी चाहिए। डिनर सबसे हल्का होना चाहिए। वैसे, अगर ज्यादा एक्टिव रहते हैं तो ज्यादा कैलरी की जरूरत होती है, जबकि डेस्क जॉब में हैं, यानी दौड़-भाग ज्यादा नहीं करनी होती तो 1500 से 1800 कैलरी काफी हैं। आमतौर पर पुरुषों को महिलाओं से 300-400 कैलरी ज्यादा की जरूरत होती है।

ध्यान दें जरा
कभी भी पेट भरकर न खाएं। सब कुछ इकट्ठा लेने के बजाय ब्रेक करके लें और हर तीन घंटे में कुछ-न-कुछ खाते रहें, वरना मेटाबॉलिज्म रेट डिस्टर्ब होता है। जैसे कि सलाद खाने की बजाय अलग-से स्नैक्स टाइम में ले सकते हैं। लंच में दही खाने की बजाय बाद में हल्का नमक मिलाकर छाछ ले सकते हैं। ऑफिस में हैं तो साथ में चना, स्प्राउट्स आदि रखें। बादाम, बिना नमक का पिस्ता, मूंगफली और अखरोट आदि नट्स को मिलाकर भी रख सकते हैं और बीच-बीच में खाएं।

टिफिन कैसा हो
स्कूल जाने वाले बच्चों का टिफिन अच्छा होना चाहिए क्योंकि वे अक्सर सुबह ढंग से ब्रेकफस्ट नहीं कर पाते। आमतौर पर 11 बजे के करीब लंच ब्रेक में ही उनका पहला खाना होता है। बच्चों के टिफिन में मेथी या पालक परांठा, दाल परांठा, ढोकला, वेज सैंडविच, पोहा आदि होना चाहिए। साथ में, कोई मौसमी फल भी दें।

ब्रेकफास्ट के बेस्ट आइटम
1. वेज/पनीर/ स्प्राउट्स सैंडविच + दूध/छाछ

सैंडविच के लिए मल्टिग्रेन ब्रेड और खूब सारी ताजा सब्जियां लें। पनीर डबल टोंड दूध से बना होना चाहिए। टेस्टी होने के साथ-साथ सैंडविच पोषण से भी भरपूर होता है क्योंकि इसमें फाइबर, विटामिन ई और बी, आयरन, मैग्निशियम और जिंक होता है। होल-वीट ब्रेड इस्तेमाल करनी चाहिए। इसमें फैट काफी कम होता है। ताजा सब्जियों या पनीर की स्टफिंग से सैंडविच कंप्लीट ब्रेकफस्ट बन जाता है। साथ में, दूध से कैल्शियम, विटामिन ए और बी, प्रोटीन, जिंक, पोटैशियम और फॉस्फोरस मिलता है।

2. स्टफ्ड रोटी + दूध/दही

अनाज में फाइबर और प्रोटीन भरपूर होते हैं और फैट बहुत कम होता है। गेहूं के आटे के साथ सोयाबीन, रागी या जई का आटा मिलाकर मूली, पालक, मेथी, गाजर आदि सब्जियां भरकर रोटियां बनाएं। परांठे खाने का मन हो तो बिल्कुल हल्का घी लगाएं लेकिन बेहतर रोटी खाना ही है। इससे देर तक एनर्जी मिलती है और खूब सारा फाइबर होने के कारण डाइजेशन भी आसानी से हो जाता है।

3. वेज दलिया + दही या दूध और दलिया

दलिया को आप चाहें तो दूध में बना लें या पानी में बनाकर ऊपर से दूध या दही मिला लें या फिर सब्जियों के साथ बना लें, यह हर तरीके से काफी पौष्टिक ब्रेकफस्ट है। कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मिनरल से भरपूर दलिया आसानी से पच भी जाता है। गेहूं के अलावा रागी का दलिया भी बना सकते हैं। इसमें बाकी चीजों के मुकाबले आयरन काफी ज्यादा होता है। यह बीपी कम रखता है और अस्थमा के अलावा लिवर और दिल की समस्याओं से बचाता है। शुगर के मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद है।

4. ओट दलिया + दो एग वाइट

ओट (जई) हमारे लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इसमें फाइबर काफी ज्यादा होता है। इसमें ऐंटि-ऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो खून जमने से रोकते हैं और दिल की बीमारियों से भी बचाते हैं। ओट इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है और शुगर व कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है। इससे लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास भी होता है और बीच-बीच में छिट-पुट खाने की जरूरत महसूस नहीं होती। साथ में, प्रोटीन से भरपूर दो अंडों का वाइट हिस्सा भी ले सकते हैं।

5. ऑमलेट/ उबला अंडा + ब्रेड स्लाइस

अंडे में प्रोटीन और विटामिन, ए, बी व ई होते हैं। कैल्शियम, पोटैशियम, सल्फर और मिनरल्स भी खूब होते हैं। सल्फर बालों और नाखूनों के लिए काफी फायदेमंद है। बच्चों को पूरा अंडा दे सकते हैं, जबकि बड़े लोग अंडे का पीला वाला हिस्सा निकाल दें क्योंकि इसमें फैट काफी ज्यादा होता है। ऑमलेट बनाएं तो घी बहुत कम इस्तेमाल करें और इसमें सब्जियां डाल लें। साथ में, एक या दो ब्रेड स्लाइस ले सकते हैं।

6. बेसन/ मूंग दाल का चीला + दही/लस्सी

बेसन या मूंग दाल का चीला अच्छा ब्रेकफस्ट माना जाता है। चीले के घोल में गाजर, शिमला मिर्च, बींस जैसी सब्जियां बारीक काट कर डाल लें या फिर अंदर पनीर की स्टफिंग कर लें। चीला बनाते हुए घी/तेल का इस्तेमाल बहुत कम करें। चीला के साथ छाछ या दही लें। पेट लंबे समय तक भरा-भरा रहेगा।

7. इडली + सांभर + दही

चावल से बनी इडलियों में कार्बोहाइइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल खूब होते हैं। इनमें कैलरी काफी कम और एनर्जी काफी ज्यादा होती है। साथ ही, आसानी से पच भी जाती हैं। सांभर के साथ खाना बेहतर है क्योंकि इसके जरिए सब्जियां और दाल का पोषण भी मिल जाता है। इडली का घोल बनाने में मेहनत लगती है इसलिए एक बार बनाकर इसे तीन-चार दिन यूज कर सकते हैं क्योंकि यह फ्रिज में चार दिन तक खराब नहीं होता।

8. स्प्राउट्स + ब्रेड + छाछ

स्प्राउट्स यानी अंकुरित दालों की चाट बनाकर सुबह-सुबह खाना सेहत के लिहाज से बहुत अच्छा है। स्प्राउट्स को ब्रेड के अंदर भरकर सैंडविच भी बना सकते हैं। स्प्राउट्स के साथ दही या छाछ अच्छा कॉम्बिनेशन हो सकता है। एनर्जी से भरपूर स्प्राउट्स में फैट काफी कम होता है। साथ में, होल वीट या मल्टि-ग्रेन ब्रेड ले लें, जिनसे लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास होता है। इसके अलावा छाछ भी ले सकते हैं।

9. ओट्स/वीट फ्लैक्स + दूध

किसी भी रूप में अनाज खाने से शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और फाइबर मिलते हैं। खास यह है कि इनमें फैट काफी कम होता है, जबकि आयरन, मैग्निशियम, कॉपर, फॉस्फोरस आदि मिनरल अच्छी मात्रा में होते हैं। रिसर्च कहती हैं कि जो लोग ब्रेकफस्ट में अनाज खाते हैं, उनमें बीमारियों से लड़नेवाले ऐंटि-ऑक्सिडेंट ज्यादा पाए जाते हैं। इनसे देर तक भूख नहीं लगती। साथ में दूध पीने से कैल्शियम की कमी भी पूरी होती है।

10. पोहा/उपमा + दही/छाछ

पोहा या उपमा को अकेले बहुत अच्छा ब्रेकफस्ट नहीं माना जाता लेकिन खूब सारी सब्जियां और नट्स मिलाने से ये काफी पोषक हो जाते हैं। तब इनसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और विटामिन मिलता है। सूजी में सोडियम काफी होता है और कॉलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। इनके साथ में छाछ या दही ले सकते हैं।

ये भी फायदेमंद
ब्रेकफस्ट में सिर्फ फल खाने की सलाह नहीं दी जाती लेकिन बाद में स्नैक्स में फलों की चाट बनाकर खा सकते हैं या फिर अगर ब्रेकफस्ट में कुछ और हल्का खा रहे हैं तो साथ में फ्रूट चाट खा सकते हैं। फल विटामिन, मिनरल, फाइबर, प्रोटीन के अलावा ऐंटि-ऑक्सिडेंट भी भरपूर होते हैं। कई सारे फल एक साथ मिलाकर खाना और अच्छा है। साथ में ताजा दही भी मिला सकते हैं, जिससे कैल्शियम बढ़ जाता है और स्वाद भी बढ़ जाता है। फल ताजे और मौसमी हों तो बेहतर है।

नोट: आयुर्वेद में नमकीन खाने के साथ दूध के कॉम्बिनेशन को सही नहीं मानता। जो लोग इसमें भरोसा करते हैं, उन्हें दूध की बजाय छाछ लेनी चाहिए। बड़ों को दूध डबल टोंड लेना चाहिए और छाछ भी डबल टोंड दूध की बनी होनी चाहिए।

एक्सपर्ट्स पैनल
- डॉ. शिखा शर्मा, न्यूट्री-डाइट एक्सपर्ट
- डॉ. रितिका समादार, रीजनल हेड, डाइटेटिक्स, मैक्स हेल्थकेयर
- डॉ. सीमा गुलाटी, चीफ प्रोजेक्ट ऑफिसर, डीएफआई(नवभारतटाईम्स,दिल्ली,28.2.11)

4 टिप्‍पणियां:

  1. आद. राधारमण जी,
    आज का लेख बेहद उपयोगी लगा !
    आभार !

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  2. आज आपने हमारा फास्ट ब्रेक कर दिया। मात्र चाय पर ब्रेक फास्ट करने का आदी हूँ। आपनें आज आंखे खोल दी। अब आदतें सुधारेंगे।

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  3. बहुत ही अच्छी जानकारी दी है...कभी-कभी आप खुद भी सब बातें जानते हैं लेकिन अमल नही करते और कभी किसी के कहने का असर इतना होता है कि आप बातें फॉलो करना शुरू कर देते हैं...
    अच्छी पोस्ट

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  4. बेहद उपयोगी लेख| धन्यवाद|

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