बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

डायबेसिटी

न सिर्फ उम्रदराज लोग , बल्कि यंगस्टर्स भी आजकल ‘ डायबेसिटी ’ के शिकार हो रहे हैं। ' डायबेसिटी ' डायबिटीज और ओबेसिटी से मिलकर बना है। वहीं , डायबिटीज और ओबेसिटी भी आपस में लिंक्ड हैं।

मोटापे से ग्रस्त लोगों को डायबिटीज होने का ज्यादा रिस्क रहता है। कुछ पेशंट्स ऐसे भी होते हैं , जिन्हें ये पता ही नहीं होता कि उन्हें टाइप 2 डायबिटीज है। प्रिमस हॉस्पिटल में डायरेक्टर ऑफ एडवांस लेप्रॉस्कोपी एंड बेरियाट्रिक सर्जरी , डॉ . अतुल पीटर्स बताते हैं कि 80 पर्सेंट केसेज में मोटे लोग ही डायबिटीज के शिकार होते हैं। मोटापे से बीपी जैसी और दूसरी बीमारियां होने का खतरा तो रहता ही है , साथ ही डायबिटीज का डर भी बना रहता है।

जेनेटिक या लाइफस्टाइल
डायबेसिटी के पीछे जेनेटिक और लाइफस्टाइल जैसी वजहें हैं। अगर पैरंट्स को इसकी शिकायत हो तो बच्चों में भी बीमारी होने के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे ही किसी प्रेगनेंट लेडी से उसके बेबी में ये आगे ट्रांसफर हो सकती है। वहीं , हमारा बदलता लाइफस्टाइल भी इसका कारण है। डाइटीशियन डॉ . सिमरन बताती हैं कि इस तेज रफ्तार में हम कहीं न कहीं अपनी हेल्थ से समझौता करने लगते हैं। मसलन , डाइट पर ध्यान न देना , एक्सरसाइज न करना और इस तरह की दूसरी चीजें रूटीन से दूर होने लगती हैं। कंप्यूटर और इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ने से हमें एक ही जगह ज्यादा देर बैठे रहना पड़ता है।


नॉर्मल प्रोसेस पर असर 
इससे हमारी बॉडी का नॉर्मल फूड प्रोसेस प्रभावित होता है। डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर हाई रहने लगती है। पेनक्रियाज पूरी मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाती है। इंसुलिन का रोल ग्लूकोज को ब्लडस्ट्रीम से होते हुए मसल्स , फैट और लिवर सेल्स तक पहुंचाना है। जहां ये फ्यूल की तरह यूज होता है। टाइप वन डायबिटीज में तो इंसुलिन के इंजेक्शंस तक लगवाने की जरूरत पड़ती है। गेस्टेशनल डायबिटीज प्रेग्नेंसी के किसी भी टाइम में हो सकती है। 

ऐसे पाएं निजात 
इससे निजात पाने के लिए सबसे पहला और अहम काम है मॉर्निंग वॉक। इससे ब्लड शूगर काफी कंट्रोल में रहता है। मुनासिब हो तो शाम में वॉक करना भी अपने रूटीन में शामिल करें। समय - समय पर अपना शुगर लेवल चेक कराते रहें। खाने में चावल , आलू , मैदा जैसी चीजें अवॉइड करनी होंगी। बकौल डॉ . सिमरन , ' उचित मात्रा में फाइबर , फ्रूट्स , वेजिटेबल व सलाद अपनी डाइट में शामिल करें और एक साथ ज्यादा खाने की बजाय जल्दी - जल्दी छोटी मील ले सकते हैं। डायबिटीक पेशंट्स को हम मेथीदाने का पानी लेने जैसी होम रेमेडी भी बताते हैं। ' 

कैलरी इनटेक 
आपको वेट मेंटेंन करने के लिए कैलरी इनटेक पर ध्यान देना होगा। पौष्टिक भोजन की सही मात्रा लेने से इसे मेंटेन किया जा सकता है। डॉ . सिमरन कहती हैं कि आमतौर पर एक पुरुष को 1500 और महिला को 1200 कैलरी की जरूरत होती है। उनकी ऐज , हाइट और वेट पर भी यह इनटेक डिपेंड करता है। मोटे लोगों को हम नेगेटिव कैलरी बैलेंस की सलाह देते हैं , जिसमें कैलरी इनटेक से ज्यादा बर्न करना होता है। इससे वेट मेंटेन करने में मदद मिलती है। 

वेट लॉस सर्जरी 
वैसे तो इस सर्जरी का डायबेसिटी से सीधा लिंक नहीं है, लेकिन अधिकतर केसेज में ओबेसिटी से ही डायबिटीज के चांस बढ़ते हैं , इसलिए ओबेसिटी को कंट्रोल करना फायदेमंद हो सकता है। डॉ . पीटर्स के मुताबिक , ' वेट लॉस सर्जरी से हम ओबेसिटी का इलाज करते हैं। इसलिए इसके असर से एक हद तक डायबिटीक होने की टेंडेंसी को क्योर किया जा सकता है। वैसे भी , फिलहाल डायबिटीज को सिर्फ कंट्रोल किया जाता है, पर आपके डायबिटीक होने की टेंडेंसी बनी रहती है। ' 

हालांकि , आपको बता दें कि ये सर्जरी अधिकतर बड़े निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। वहीं , इस पर करीब 3 लाख या इससे भी ज्यादा खर्चा आता है। 

इनफर्टिलिटी लिंक 
हाल ही के सालों में नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ( एनआईएच ) ने एक स्टडी के रिजल्ट में बताया कि ज्यादा वेट गेन करने वाले पेशंट्स में इंफर्टिलिटी के चांस 10 पर्सेंट बढ़ जाते हैं। इसमें 20 से 30 साल के जेंट्स में मोटापे और लोअर स्पर्म काउंट के बीच लिंक पाया गया था। यह स्टडी ' जर्नल ऑफ फर्टिलिटी एंड सटर्लिटी ' में छपी भी थी। डॉ . पीटर्स बताते हैं कि डायबेसिटी से न सिर्फ इंफर्टिलिटी बल्कि बीपी , स्लीप ऐप्निया ( सांस की बीमारी ), जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। 

ऐसे बचें 
इसके लिए एक फिटनेस गोल तय करना जरूरी है। दिन में करीब 30 मिनट तो एक्सरसाइज के लिए जरूर निकालें। अगर आपको कोई एक्सरसाइज ' बडी ' मिल जाता है तो अच्छा होगा। क्योंकि उसके साथ एक्सरसाइज करने का रूटीन बना रहेगा। योगा से आपकी बॉडी और माइंड की फिटनेस बने रहने में हेल्प मिलती है। बोरियत से बचने के लिए आपकी एक्टिविटीज में वरायटी होना जरूरी है। स्विम , साइकल , वॉक , योगा या दूसरी ग्रुप एक्सरसाइज भी जारी रखें। साथ ही आपको डाइट की तरफ भी ध्यान देना होगा। फास्ट फूड , फैट बढ़ाने वाले फूड व ऐसी दूसरी चीजों को अवॉइड करें।
(गरिमा शर्मा,नवभारत टाईम्स,12.2.11)

7 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे आलेखों को आजकल खोज खोज कर पढता हूं। रोगी जो हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढिया जानकारी के लिए शुक्रिया....

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक ऐसी बीमारी जिससे एक बहुत बड़ा वर्ग पीड़ित है. यहाँ कम से कम रोग के विषय में तथ्यपरक जानकारी, निदान और बचाव के बारे में जाना जा सकता है!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. जागरूक करती बढ़िया पोस्ट...
    राधारमण जी मेरा मुख्य ब्लॉग "हँसते रहो" http://hansteraho.com है जहाँ पर आपको हँसने...हँसते रहने के लिए भरपूर सामग्री मिलेगी :-) जबकि आप मेरे दूसरे ब्लॉग "हँसते रहो हंसाते रहो" (जो कि एक सामूहिक ब्लॉग है)...पर ही टिप्पणी करके लौट जाते हैं :-(

    उत्तर देंहटाएं
  5. डाइबिटीज जब अधिक समय से हो तो बहुत कमजोरी लगती है |क्या इसका कोई उपाय सम्भव है |मुझे ३० वर्ष से डाइबिटीज है अब इन्सूनिं भी लगता है |इससे मुझे बहुत मानसिक तनाव रहता है |क्या करना चाहिए
    आशा

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।