मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

जाती सर्दी में....

आजकल की जाती हुई सरदी में अक्सर बहुत-से लोगों को नजला, जुकाम, खांसी हो जाते हैं। वैसे तो नजला, जुकाम, खांसी को शरीर का मित्र माना गया है, क्योंकि इससे नाक के द्वारा शरीर में एकत्र विजातीय द्रव बाहर निकल जाते हैं। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती तो तब यह रोग उत्पन्न होता है। लेकिन बार-बार इस समस्या का उत्पन्न होना अच्छा नहीं है। यह शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण ज्यादा प्रभावी होता है। इसलिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आसन और प्राणायाम का नियमित अभ्यास करना लाभप्रद हो सकता है।

आहार : वैसे तो यह रोग 2-3 दिन में उपवास रखने एवं गुनगुने पानी में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर पीने एवं आराम करने पर ठीक हो जाता है। दिन में दो-तीन बार अदरक, तुलसी की चाय लें। सादा भोजन, फल एवं सब्जियों का सूप लें। अधिक खांसी होने पर अदरक के रस में थोड़ा शहद मिलाकर दिन में तीन बार लें तो निश्चित तौर पर आपको लाभ होगा।

योग से लाभ
शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सूर्य-नमस्कार, धनुरासन, सर्वागासन, हलासन व मत्स्यासन का अभ्यास किया जा सकता है। इन आसनों को किसी योग गुरु से समझकर करना बेहतर होगा।

मत्स्यायन की विधि : यह फेफड़ों की मजबूती के लिए बहुत ही अच्छा अच्छा आसन है। किसी दरी यी कंबल पर पद्मासन लगाकर बैठ जाएं। अब हाथों का सहारा लेकर धीरे-धीरे कमर के बल लेट जाएं। अब श्वास भरते हुए गर्दन और छाती को ऊपर उठाते हुए शरीर का पिछला भाग जमीन से लगा दें। ध्यान रखें कि कमर जमीन पर नहीं लगेगी। दोनों हाथों से पैर के अंगूठों को पकड़ें। सामान्य श्वासों के साथ यथाशक्ति इसी आसन में रुकें। वापस आने के लिए श्वास छोड़ें, पैर के अंगूठे छोड़ें, गर्दन सीधी करें, पद्मासन को खोलें एवं श्वासन में विश्रम करें।
प्राणायाम : कपालभाति, भस्तिका प्राणायाम भी इस रोग में रामबाण है।
खास बातें : ठंड और धूल से बचकर रहें।
- ठंडा पानी न पियें, गुनगुने पानी का सेवन करें।
- धूप का सेवन अवश्य करें।
- बंद कमरे में न सोएं।
- जलनेति इसमें रामबाण है(हिंदुस्तान,20.2.11)।

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