रविवार, 16 जनवरी 2011

व्यक्तित्व विकास के लिए चरण उद्धृतासन

पर्सनालिटी अर्थात् व्यक्तित्व का क्रेज हमेशा से ही रहा है। समाज में ऐसे व्यक्तियों को ही सम्मान प्राप्त होता है जिसका व्यक्तित्व आकर्षक होता है। पर्सनालिटी डेवलप करने के लिए युवाओं द्वारा कई प्रकार के जतन किए जाते हैं। इन्हीं प्रयासों में चरण उद्धृतासन को भी शामिल करें, बहुत जल्द लाभ प्राप्त होंगे।

चरण उद्धृतासन की विधि
साफ-स्वच्छ और शुद्ध वातावरण वाले स्थान पर कंबल आदि बिछा लें। फिर सीधे खड़े हो जाएं। बाएं पैर पर शरीर का संतुलन बनाते हुए अपने दाएं पैर को घुटनों से मोड़कर बाएं जाघों के ऊपरी हिस्से पर ले जाएं। अब दाएं हाथ को दाएं बगल से घुमाते हुए पीठ के पीछे से लाकर बाई ओर दाएं हाथों को कमर पर रखें। अब गहरी सांस खींचें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकें। बाएं हाथ से फर्श को छुने की कोशिश करें और अपने सिर को बाएं पैर के घुटनों पर टिकाने की कोशिश करें। इस आसन में सिर को आगे झुकाते समय शुरु में जितना संभव हो आगे झुकाएं और कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। इसके बाद पुन: वास्तविक स्थिति में आ जाएं। फिर पैर की स्थिति को बदल कर बाएं पैर से भी इस क्रिया को करें। इस तरह इस क्रिया को कम से कम 5 मिनट तक अवश्य करें।

चरण उद्धृतासन के लाभ
चरण उदधृतासन के अभ्यास से हाथ व पैरों की मांसपेशियां मजबूत औरपुष्ट होती है। यह पैरों के स्नायु सम्बन्धी रोगों को दूर करता हैं। यह शरीर में स्फूर्ति लाता है और शरीर को सुन्दर व स्वस्थ्य बनाता हैं। आपको आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करता है।
 
चरण उद्धृतासन के लिए सावधानी
यह आसन प्रारंभ काफी कठिन रहता है परंतु धीरे-धीरे अभ्यास के साथ इसकी पूर्ण स्थिति प्राप्त की जा सकती है। अत: इसमें जितना संभव हो सिर को घुटने पर व हाथ को नीचे फर्श पर टिकाने की कोशिश करें। जल्दबाजी न करें। यदि कोई बीमारी से पीडि़त हैं तो किसी प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लें(दैनिक भास्कर,उज्जैन,10.1.11)।

1 टिप्पणी:

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।