शनिवार, 15 जनवरी 2011

सिंघाड़ाःशिशु के लिए अमृत,कील-मुहांसों के लिए अचूक

सिंघाड़े से सभी जन परिचित हैं। यह जल में होने वाली वनस्पति का फल है। आयुर्वेद में इसे श्रृंगाटक कहते हैं, क्योंकि इसके फल में श्रृंग (सींग) जैसे काँटे होते हैं। इसके फलों को कच्चा, उबालकर, सुखाकर आटा बनाकर प्रयोग करते हैं।

आयुर्वेद में सिंघाड़े को त्रिकोणफल, त्रिपुटक, श्रृंगाटक, श्रृंगकंद, जलकंद, जलफल, जलाश्रया, जलवल्ली आदि नामों से जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम "ट्रेपा बाईस्पाइनो सा" है। इसके फलों में मुख्य रूप से मैंगनीज एवं स्टार्च पाया जाता है। यह शुक्र, पित्त एवं दाह को दूर करने वाला, दुग्धवर्धक, शरीर की थकावट को दूर करने वाला, शरीर के ताप को कम करने वाला, रुचिकारक एवं जीवन प्रदान करने वाला बताया गया है। यह पचने में भारी, मधुर एवं शीत तासिर वाला है। इसके पौष्टिक फल शुक्र को बढ़ाते हैं एवं नियमित प्रयोग से यह शारीरिक दुर्बलता कम करता है।

*सामान्यतः इसके फलों का प्रयोग आहार के रूप में किया जाता है, परंतु इसके कुछ औषधीय प्रयोग भी हैं।

*दुर्बल व्यक्तियों को या मांसपेशियों को सशक्त बनाने के लिए इसका प्रयोग अश्वगंधा चूर्ण के साथ २-६ ग्राम की मात्रा में दूध के साथ निरंतर प्रयोग करना चाहिए।

*शिशु के पोषण हेतु इसके आटे को दूध में पका कर शकर डालकर आहार के रूप में देना चाहिए, सिंघाड़े का आटा पचने में किंचित भारी होता है। अतः आटे में चुटकी भर सोंठ मिलाकर देने पर यह उत्तम शिशु आहार है।

*गर्भ के पोषण हेतु आयुर्वेद में गर्भिणी स्त्री को ७वें महीने में अन्य औषधियों के साथ सिंघाड़े का प्रयोग किया जाना वर्णित है।

*दुग्धपान कराने वाली माता को दूध बढ़ाने के लिए सिंघाड़े का आटा,शतावरी और सोंठ को दूध में पकाकर सेवन करना चाहिए।

*आहार के रूप में व पौष्टिक होने पर इसका प्रयोग उपवास में भी किया जा सकता है। इसका हलवा और शाक स्वास्थ्यवर्द्धक है।
सिंघाड़े की सब्ज़ी
आयुर्वेद में सिंघाड़े की शाक या सब्जी बनाकर प्रयोग करने का वर्णन है।

सामग्री : कच्चे सिंघाड़े की गिरी २५० ग्राम, तेल, जीरा, हींग, धनिया, सेंधा नमक, हल्दी, अदरक या सोंठ, काली मिर्च, लौंग (समस्त सामग्री स्वादानुसार एवं आवश्यकतानुसार)।

विधि : कच्चे सिंघाड़े की गिरी निकाल कर उसे पानी से धो लें, इसके बाद कढ़ाई में तेल डालकर जीरा, हींग, धनिया, हल्दी, अदरक या सोंठ एवं काली मिर्च आदि डालकर भून लें। मसाले भूनने पर उसमें गिरी डालकर अच्छी तरह मिला लें एवं पकाएँ। यह शाक शरीर के लिए शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, रुचिकारक व पौष्टिक है।

सिंघाड़े का हलवा
सिंघाड़े के आटे को घी डालकर अच्छी तरह भून लें। चुटकी भर पिसी सोंठ,काली मिर्च,इलायची चूर्ण एवं शक्कर मिलाकर दूध डालें तथा उसके बाद पकाएं। पकने पर गर्मा-गर्म सेवन करें। यह सुबह के नाश्ते का अच्छा भारतीय विकल्प है जिससे काफी ज्यादा ऊर्जा मिलती है।
कील-मुंहासे का घरेलू इलाज़
*चंदन और हल्दी पावडर का पेस्ट दूध के साथ मिलाकर बना लें। पानी के साथ घिसा हुआ जायफल भी एक्ने और पिंपल के इलाज में कारगर होता है।

*ग्वारपाठे के रस के नियमित सेवन से त्वचा के कई रोग खत्म होते हैं। ग्वारपाठे का रस सीधे त्वचा पर भी लगाया जा सकता है। इसे आधाकप सुबह शाम लेना चाहिए। गर्भवती महिलाएँ इसका सेवन न करें।

*रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह से साफ करें। एक चम्मच खीरे के रस में हल्दी मिलाकर चेहरे पल लगा लें। आधे घंटे बाद धो लें।

*एक चाय के चम्मच भर जीरे का पेस्ट बना लें। चेहरे पर एक घंटे तक लगा रहने दें। बाद में धो लें।

*चेहर पर झाइयाँ होने का कारण पित्त कुपित होना है। यह कई कारणों से कुपित हो सकता है। खानपान की अनियमितता से लेकर नींद के प्रति लापरवाही भी प्रमुख कारणों में से है। झाइयों को हटाने के लिए कई घरेलू नुस्खे हैं जिनमें पपीते के पल्प को चेहरे पर १५ मिनट तक घिसने से सनटैन से छुटकारा मिल जाता है। इसी तरह अधिक देर तक धूप में रहने और खानपान में अनियमितता होने से भी त्वचा पर झाइयाँ पड़ जाती हैं।

*पाँच बादाम को एक चम्मच फ्रेश क्रीम में नींबू की कुछ बूँदों के साथ मिलाइए। इस पेस्ट को चेहरे और गरदन पर लगाइए। १५ मिनट बाद हटा लीजिए।

*तिल्ली और हल्दी को सम मात्रा में मिलाकर पीस लीजिए। इसे थोड़े से पानी में मिलाकर चेहरे पर लगा लें। इसी तरह तुलसी की पत्तियों का लेप भी लगाया जा सकता है(डॉ. संजीव कुमार लाले,सेहत परिशिष्ट,नई दुनिया,प्रथमांक,जनवरी-2011) ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस फल के इन गुणों के बारे में तो जानता नहीं था।

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  2. सिघाड़े की इन खूबियों से तो अनभिज्ञ ही थे अभी तक ...आभार इस सुन्‍दर जानकारी के लिये ।

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  3. वाह सिंघाड़े इतना फायदा करता है पता ही नहीं था हम तो उसका उपयोग बस व्रत में फलहार के रूप में ही करते देखा था |

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