रविवार, 2 जनवरी 2011

ज़रूरी हैं न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स

रोजाना के भोजन के अतिरिक्त भी शरीर को पौष्टिक पूरक पदार्थों की जरूरत होती है। पौष्टिक पूरक शरीर को बीमारियों से सुरक्षित रखने में सहायक होते हैं। कई बार हमें लगता है कि हम पर्याप्त भोजन कर रहे हैं इसलिए अलग से कुछ और लेने की जरूरत नहीं है। यह पूर्ण सच नहीं है, क्योंकि केवल आहार से ही सभी विटामिन्स और मिनरल्स की पूर्ति नहीं हो पाती है।

किन्हें चाहिए पोषक पूरक आहार

-वे जो सिर्फ शाकाहारी भोजन करते हों।

-किसी मरीज को कोई गंभीर बीमारी हो या संक्रमित हो अथवा उसकी सर्जरी की गई हो।

-शरीर में पौष्टिक पदार्थों की कमी पाई गई हो।

-गर्भवती महिलाएँ अथवा स्तनपान कराने वाली महिलाएँ।

यह भी जानना जरूरी है कि हमें कितने पौष्टिक आहार की जरूरत है। अमेरिका में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक कोई इंसान ऐसा नहीं है, जो अपने आहार से १०० प्रतिशत आवश्यक पौष्टिक पदार्थ जैसे मैग्नीशियम, विटामिन ई और जिंक प्राप्त कर लेता हो। इसी तरह फोलेट, कैल्शियम और विटामिन सी की भी पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती है इसीलिए पोषक पूरक आहार की जरूरत होती है।


चाय है ज्यादा फायदेमंद
दुनिया में पानी के बाद सबसे अधिक कोई पेय पिया जाता है तो वह है चाय। उच्च रक्तचाप के मरीजों में काली चाय की अपेक्षा ग्रीन टी ज्यादा फायदेमंद साबित होती है।

आहार का विकल्प नहीं है डाइटरी सप्लीमेंट
जिन्हें बहुत कम पौष्टिक आहार मिलता हो।ऐसे मरीजों को न्यूट्रीशनल डाइटरी सप्लीमेंट की जरूरत होती है। अध्ययनों से जाहिर हुआ है कि जो लोग अपर्याप्त पौष्टिक आहार लेते हैं वे जल्दी ही बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
हमेशा यह याद रखिए कि नियमित और संतुलित आहार का विकल्प डाइटरी सप्लीमेंट्स नहीं हो सकते। संतुलित आहार जीवन में आपके प्रदर्शन को शिखर तक पहुँचा सकता है। डाइटरी सप्लीमेंट्स की दूसरी दिक्कत यह है कि इसमें ओवरडोज होने का खतरा हमेशा बना रहता है। मसलन कई तरह के डाइटरी सप्लीमेंट्स में एक जैसे विटामिन्स या खनिज हो सकते हैं। इससे किसी भी विटामिन या खनिज के ओवरडोज होने का जोखिम होता है।

किसी भी विटामिन या खनिज का शरीर में बढ़ा हुआ स्तर नुकसानदायक होता है, मसलन विटामिन ए की अधिकता से फेफड़ों का कैंसर होने का जोखिम है या हड्डियों के क्षरण होने की आशंका रहती है। पोषक पूरक आहार से उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियाँ, कैंसर, डायबिटीज, अल्जाइमर्स, ओबेसिटी, आर्थराइटिस और प्रजनन संबंधी समस्याओं में फायदा होता है। ओट्स के उत्पाद और लो फैट डाइट से उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की समस्या से निपटा जा सकता है।

पोटेशियम की मात्रा का सीधा संबंध उच्च रक्तचाप से है। कैल्शियम सप्लीमेंट्स से गर्भवती महिलाओं में उच्च रक्तचाप में नियंत्रण किया जा सकता है। २००२ में हुए एक अध्ययन के मुताबिक सोया दूध के प्रयोग से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। इसी तरह ओमेगा-३ फैटी एसिड्स से भी उच्च रक्तचाप को काबू में रखा जा सकता है। ओटमील फायबर के नियमित उपयोग से उच्च रक्तचाप को कम करने के प्रमाण उपलब्ध हैं। लायकोपीन नामक पदार्थ टमाटर, पपीता, जामफल और एप्रीकोट में पाया जाता है। इससे उच्च रक्तचाप के मरीजों को फायदा होता है।
(डॉ. ए.के. पंचोलिया,सेहत,नई दुनिया,दिसम्बर 2010 तृतीय अंक से साभार)

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सार्थक रचना .....धन्यवाद जानकारी देने के लिए

    आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की बहुत शुभकामनाये

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