शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010

महज मीठी गोलियां नहीं हैं होम्योपैथी की दवाइयां

छह महीने पहले ब्रिटिश मेडिकल असोसिएशन द्वारा होम्योपैथी के वैज्ञानिक आधार को लेकर लगाए गए सवालिया निशान का भारत के वैज्ञानिकों ने करारा जवाब दिया है। आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने अपने एक शोध में साबित किया है कि होम्योपैथी की छोटी, उजली और मीठी गोलियां नैनोटैक्नॉलजी के सिद्धांत पर काम करती हैं।

आईआईटी बॉम्बे ने हाल ही में 'अलसेवियर' मैगजीन में ' होम्योपैथी ' पर एक रिसर्च प्रकाशित किया है। इसमें कहा गया है कि होम्योपैथी पिल्स में सोना, तांबा और लोहा जैसे नैचरल मेटल्स होते हैं। इनके घुलने की क्षमता मीटर के एक अरबवें हिस्से तक की होती है।

गौरतलब है कि आईआईटी बॉम्बे के केमिकल इंजिनियरिंग के वैज्ञानिकों ने होम्योपैथिक पिल्स के घुलने की क्षमता का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने गोलियों के घुलने के बाद शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से इस घोल का अध्ययन किया और उनमें मौजूद मेटल्स के नैनो पार्टिकल्स का पता लगाया।

वैज्ञानिकों की टीम में शामिल डॉक्टर जयेश बेल्लारी ने बताया, 'निश्चित रूप से अतिघुलनशील होने के बावजूद होम्योपैथी पिल्स में मापने योग्य मेटल्स मौजूद होते हैं।' सीधी भाषा में समझें तो 4 लाख कणों में से एक कण के कंसन्ट्रेशन के बावजूद यह गोलियां असरकारक होती हैं।

डॉक्टर जयेश ने बताया कि उनके छात्र प्रशांत चिक्रमाने ने ' एक्सट्रीम होम्योपैथिक डायल्यूशन्स रिटेन स्टार्टिंग मटीरियल्स : अ नैनोपार्टिकुलेट पर्सपेक्टिव ' पर थीसिस लिखा है। होम्योपैथी मॉर्डन मेडिसिन के लिए पहेली बना हुआ है। इसके डॉक्टरों ने इसकी घुलनशीलता और मेटल्स की मौजूदगी पर काफी अध्ययन किया है। इसे हर तरह से जांचा परखा है, लेकिन इसके मैकेनिज्म पर अब भी काफी काम किया जाना बाकी है(नवभारत टाइम्स,मुंबई,16.12.2010)।
टाइम्स ऑफ इंडिया,मुंबई संस्करण(16.12.2010) में मालती अय्यर की रिपोर्टः
Six months after the British Medical Association wrote off homoeopathy as witchcraft that had no scientific basis,we may now have an irrefutable answer to what makes this ancient form of medicine click.Scientists from the Indian Institute of Technology-Bombay (IIT-B ) have established that the sweet white pills work on the principle of nanotechnology.
Homeopathic pillsmade of naturally occurring metals such as gold and copper-retain their potency even when diluted to a nanometre or one-billionth of a metre,states the IIT-B research published in the latest issue of Homoeopathy,a peer-reviewed journal published by the reputed Elsevier.IIT-Bs chemical engineering department bought commonly available homoeopathic pills from neigbourhood shops,prepared highly diluted solutions and checked under powerful electron microscopes to find nanoparticles of the original metal.
Our paper showed that certain highly diluted homoeopathic remedies made from metals still contain measurable amounts of the starting material,even at extreme dilutions of 1 part in 10 raised to 400 (200C), said Dr Jayesh Bellare.His student,Prashant Chikramane,presented the paper Extreme homoeopathic dilutions retain starting materials: A nanoparticulate perspective,as part of his doctoral thesis.

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