गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

कमर दर्द में "पूर्वोत्तानासन"

यह आसन बच्चों और युवाओं के लिए विशेष फायदेमंद हैं। पूर्वोत्तानासन से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इससे कमर दर्द को दूर करने में सहायक है।

आसन की विधि:
समतल स्थान पर कंबल बिछाएं। दोनो पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं। पैर सीधे और मिलाकर रखें। दोनों हाथों को पीछे की ओर नितंब के पास जमीन पर रखें, हाथ सीधे रहेंगे और उंगलियों का पीछे की ओर रहेंगी। रीढ़ भी सीधी रखें।
 
अब सांस भरें और अपने हाथों पर दबाव बनाते हुए कमर को जमीन से ऊपर उठाएं। ताकि पूरा शरीर सीधा हो जाए और पैरों के तलवे जमीन से स्पर्श हो जाए। गर्दन को पीछे की ओर ढीला छोड़ दें, आंखे खुली रखें और सांस रोकें और इस स्थिति में पांच सेकंड रुकें। उसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर को नीचे कर लीजिए और फिर से प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं. इस आसन को तीन बार दोहराएं।
 
आसन की सावधानियां
इस आसन में शरीर का भार हथेली और कलाई पर आता है. जिनकी कलाई ज्यादा भार उठाने में अक्षम हो वे ये आसन करते समय सावधानी बरतें अन्यथा न करें। जिन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अल्सर की शिकायत हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
 
आसन के लाभ:
यह आसन बच्चों और युवाओं के लिए विशेष फायदेमंद हैं। पूर्वोत्तानासन से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इससे कमर दर्द को दूर करने में सहायक है। इस आसन से कंधे और बाजुओं की मांसपेशियों की शक्ति बढ़ती है। इससे फेफड़ों का व्यायाम होता है जिससे छाती का विकास होता है(दैनिक भास्कर,उज्जैन,30.11.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. Radharaman ji,

    इस तरह से समझ पाना थोडा मुश्किल है, अगर आप तस्वीरों के साथ पोस्ट कर सकें तो बेहतर रहेगा.
    ये नितंब क्या होता है ?
    पैरों के तलवे ज़मीन से कैसे टच होंगे ? अगर हम लेते हुए हैं तो
    और अगर तलवे ज़मीन पर लगेंगे तो टांगें तो मुडेंगी ही.

    जवाब देंहटाएं

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