सोमवार, 8 नवंबर 2010

आईटी का ग्लैमर देता है महिलाओं को टेंशन!

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर में नौकरी की चकाचौंध और वेतन भले ही बढि़या हो, लेकिन महिलाओं के लिए यह नौकरियां बड़े शारीरिक और मानसिक तनाव का कारण है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। केरल राज्य महिला आयोग के किए गए अध्ययन के अनुसार,आईटी सेक्टर की मोटी तनख्वाह और इससे बढ़ती सामाजिक प्रतिष्ठा ने महिलाओं को यहां पर काम करने के लिए आकर्षित किया है। अध्ययन में आईटी सेक्टर में कार्यरत 150 महिलाओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन में निजी अस्पतालों के नर्सिग क्षेत्र के अलावा भी कई अन्य क्षेत्रों में भी अध्ययन किया गया। अन्य क्षेत्रों की पचास महिलाओं को इस अध्ययन में शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि बैठकर देर तक काम करने के घंटों और काम के दबाव से महिलाएं शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरती हैं। भले ही उनका ऑफिस कितना ही शानदार क्यों न हो। अध्ययन में सलाह दी गई है कि सभी आईटी संस्थानों को महिला कर्मियों का तनाव कम करने के लिए परामर्श (काउंसिलिंग) की व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार की ओर से नियम बनाकर उनके काम करने के घंटों को पुन: निर्धारित किया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा है कि आईटी सेक्टर में काम कर रही महिलाओं को सरकारी नौकरी कर रही महिलाओं की तरह ही मातृत्व सुविधा दी जानी चाहिए। साथ ही उनकी कार्य अवधि पर भी खास ध्यान दिया जाना चाहिए। इस अध्ययन से सहमति जताते हुए टेक्नोपार्क के पूर्व सीईओ एन. राधाकृष्णनन नायर ने कहा कि फिर भी आईटी क्षेत्र में कामकाज का माहौल अन्य क्षेत्रों से कहीं बेहतर है। उन्होंने कहा कि काम खत्म करने की डेडलाइन का दबाव जरूर होता है, लेकिन यह दबाव महिलाओं और पुरुषों दोनों पर ही समान रूप से होता है। उनके मुताबिक बीपीओ क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को जरूर सहायता की जरूरत हो सकती है(दैनिकजागरण,राष्ट्रीय संस्करण में तिरुवनंतपुरम् की रिपोर्ट)।

1 टिप्पणी:

  1. सही बात है, दोहरी जिम्मेवारियों के चलते कामकाजी महिलाओं की जिंदगी वैसे ही काफी कठिन और दुष्कर हो जाती है. ऐसे में कैरियर के क्षेत्र के मानक अवधारणाओं के चलते उनके स्पेसिफ़िक और स्पेशल जरूरतों की अन्देखी होती रहती है. इस विचारोत्तेजक आलेख के लिए आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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