शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

फल,सब्जी और रस पर उपवास

उपवास के तुल्य कोई औषधि नहीं है। उपवास से कुपित दोष दूर हो जाते हैं। जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है। शरीर हल्का हो जाता है। भूख-प्यास एवं भोजन में रुचि आ जाती है। आंव का पाचन होकर ओज और बल आ जाता है। आरोग्य आ जाता है।
फल एवं सब्जी पर उपवासताजे फलों एवं सब्जियों में सभी तत्व पाए जाते हैं। इनमें प्रोटीन, वसा, क्षार, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, प्राकृतिक लवण, फुजला एवं प्राकृतिक जल भी होता है। ये अमृत भोजन भी कहलाते हैं। इनमें पाई जाने वाली फल शर्करा आसानी से पचकर शरीर में आत्मसात हो जाती है और पाचनतंत्र को अधिक काम नहीं करना पड़ता है।
इनमें उच्चकोटि के प्राकृतिक लवण, विटामिन, एंजाइम एवं फुजला या रफेज होने के साथ शरीर को शोधन करने की अद्भुत शक्ति होती है। काष्ठज फलों में उच्चकोटि का प्रोटीन और न जमने वाला वसा होता है। सेब, संतरा, अमरुद, अंगूर, अनार, तरबूज, सेब, खरबूजा, आंवला, खीरा, टमाटर, गाजर, पालक, मेथी इत्यादि फलों-सब्जियों पर रोगी अनेक दिनों तक रह सकता है। इससे अनेक जटिल रोग ठीक हो जाते हैं।
ये सारे फल पोटेशियम से भरपूर होते हैं जिससे उच्च रक्तचाप, गठिया, जोड़ों का दर्द, हृदय रोग, मोटापा आदि रोग ठीक हो जाते हैं। किसी भी रसाहार पर रहने से पहले आठ-दस दिन इस आहार पर रहने से किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। सभी दूषित पदार्थ शरीर से साफ होकर रक्त-क्षारीय हो जाता है।
शरीर में स्थित बलगम, आंव व श्लेषमाओं का शोधन हो जाता है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। सारे शरीर का शोधन कर देती है। हमारे ऋषि-मुनि इस प्रकार का आहार लेकर प्रकृति के बीच उच्च अवस्था में रहते थे। पूर्णायु प्राप्त कर स्वस्थ रहते थे और मानसिक रूप से भी अत्यंत विकसित थे। महान ग्रंथों की रचना करते थे।
रसोपवास
इस उपवास में अन्न फलादि ठोस आहार नहीं लिए जाते। केवल फलों के रस या साग-सब्जी के जूस-सूप पर ही रहा जाता है। इस उपवास में एनीमा लेते रहना चाहिए। ‘रस-उपवास ही उपवास की सर्वोत्तम विधि है।’ इससे सभी प्रकार के रोग ठीक होते हैं।
(डॉ. सरला तिवारी की पुस्तक ‘सौ साल स्वस्थ कैसे रहें’ के अंश हिंदुस्तान,दिल्ली,23.11.2010 अंक में)

2 टिप्‍पणियां:

  1. फल सब्जी और रसों के औषधीय गुणों पर उपयोगी जानकारी के लिए आभार।

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  2. उपयोगी जानकारी के लिए आभार।

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