बुधवार, 24 नवंबर 2010

अमीर मरीजों का 'गरीबखाना' बन गया है एम्स

गरीब मरीजों का "मक्का" समझे जाने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अमीर मरीजों की मौज है। प्राइवेट वार्ड के ३५० खास कमरों में उन्हें कौ़ड़ी के भाव पंचतारा अस्पतालों का ऐशो आराम मिल रहा है। चुभने वाली बात यह है कि इन प्राइवेट कमरों में रहने वाले ये मरीज सिर्फ सस्ते कमरे में ही नहीं रहते बल्कि उन सस्ती सुविधाओं पर भी "डाका" डालते हैं जिनकी कीमत गरीब मरीजों को ध्यान में रख कर तय की गई है। गरीब मरीजों को तो धक्के खाने प़ड़ते हैं, वहीं इन निजी कमरों में रहने वाले खास मरीजों के जल्दी व प्राथमिकता के आधार पर इलाज की भी गारंटी है। लेकिन आंतरिक संसाधन जुटाने के लिए तैयार एक ताजा प्रस्ताव अमल में आ गया तो फिर अमीर मरीजों का यह "गरीबखाना" महंगा हो सकता है।

प्राइवेट वार्ड में कमरे का अलग किराया जरूर है, जांच सहित इलाज की तमाम सुविधाओं की कीमत वही है जो आम मरीजों के लिए तय है। ताजा प्रस्ताव में प्राइवेट वार्ड के कमरे का भा़ड़ा ब़ढ़ाकर पंचतारा अस्पतालों के बराबर करने के साथ साथ जांच व इलाज की अन्य सुविधाओं की अलग कीमत भी तय की गई है। प्रस्ताव के पक्षधर एम्स के एक आला अधिकारी ने कहा कि मंशा है अमीर मरीजों से मिले पैसे से गरीबों की सुविधाएं ब़ढ़ाना और उसका खर्च निकालना। संसद के कानून से बने इस अस्पताल में जब प्राइवेट वार्ड के खर्च को ब़ढ़ाने की कोई कोशिश होती है तो एम्स को निजीकरण के रास्ते पर धकेलने के षडयंत्र का हौवा ख़ड़ा कर दिया जाता है। असलियत में देखा जाए तो एम्स का निजीकरण हो गया है। यहां प्राइवेट वार्ड में रहने वाले मरीजों को ही इलाज और अन्य सुविधाएं मयस्सर हो रही हैं। दस दिन बाद आकर "फॉलोअप" कराना है तो प्राइवेट वार्ड के मरीज कमरा नहीं छो़ड़ते। कमरे में ताला लगा कर चले जाते हैं। प्राइवेट वार्ड के सभी ३५० कमरे हमेशा भरे रहते हैं।

प्राइवेट वार्ड में प्रतिदिन का भा़ड़ा ११०० रुपए है। मजे की बात है कि पंचतारा अस्पताल के अमीर मरीजों को भी जब वहां का खर्च खलने लगता है तो वे भी एम्स के इन निजी रूमों की राह पक़ड़ते हैं। पंचतारा अस्पतालों में एक कमरे का प्रति दिन का सिर्फ भा़ड़ा ३०००-४००० रुपए है। अन्य खर्चों को जो़ड़ दिया जाए तो इन अस्पतालों में एक कमरे का प्रतिदिन का खर्च ८००० रुपए का होता है(धनंजय,नई दुनिया,दिल्ली,23.11.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. गरीब तो खैर किसी भी तरह के आराम का हकदार नहीं है इस देश में जो सिर्फ मजबूरी में प्राइवेट वार्ड लेकर जल्द ही इलाज करा के जाना चाहे उसे भी ये कमरे कभी नहीं मिलते।

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