शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

पेन किलर

आमतौर पर जिस दर्द को सिर्फ एक टेबलेट के लायक समझा जाता है, आगे चलकर वह इलाज कितना महंगा साबित होता है, यह एक नए शोध से साबित हो रहा है।
ब्रिटेन के रिसर्चरों के हवाले से जर्नल ह्यूमन रिप्रॉडक्शन में छपी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पैरासिटामॉल, एस्प्रिन या आईब्रूफेन आदि पेनकिलर किसी दर्द से फौरी राहत भले ही दिला दें पर इनके असर से भावी पीढ़ी में प्रजनन संबंधी गड़बडि़यां पैदा हो सकती हैं। खास तौर से जब गर्भवती स्त्रियां इन पेनकिलर्स का बहुतायत से इस्तेमाल करती हैं तो खतरा यह है कि उनके बेटे अपनी प्रजनन क्षमता खो बैठें। साइंटिस्टों का मानना है कि पिछले कुछ दशकों में पुरुषों की प्रजनन संबंधी समस्याओं में जो इजाफा हुआ है, उसके लिए ये पेनकिलर्स जिम्मेदार हो सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक जो गर्भवती महिलाएं ये पेनकिलर्स लेती हैं, उनमें ये खतरे 7 से 16 गुना तक बढ़ जाते हैं। पर सिर्फ गर्भवती महिलाएं ही दर्द से निजात पाने के लिए इनका इस्तेमाल नहीं करतीं। अक्सर परिवार के सभी लोग डॉक्टर की पर्ची के बगैर केमिस्ट की दुकान पर मिलने वाली इन दवाओं पर निर्भर होते हैं। इसके लिए कभी टीवी का कोई विज्ञापन उन्हें प्रेरित करता है, तो कभी दफ्तर या आस-पड़ोस में रहने वाला कोई परिचित। ये पेनकिलर्स किसी दर्द से तात्कालिक राहत भले ही दिला दें, पर ये समस्या का सही निदान नहीं करते। कई बार ऐसा होता है कि लोग अक्सर उठने वाले दर्द को पेनकिलर्स से दबाते रहते हैं जिस कारण कोई छोटा मर्ज आगे चलकर बड़ी बीमारी के रूप में प्रकट होता है। और तब उसका इलाज असंभव हो जाता है। अमेरिका के ड्रग अब्यूज वॉर्निंग नेटवर्क का आकलन है कि वहां हर साल करीब 70 हजार बच्चे ओवर द काउंटर मिलने वाली ऐसी ही दवाओं के गलत इस्तेमाल की वजह से अस्पतालों में भर्ती कराने पड़ते हैं। ज्यादातर मामलों में पेनकिलर्स की ओवरडोज उन्हें अस्पताल पहुंचाती है या गलत दवा खा लेने से उनकी हालत बिगड़ जाती है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत जैसे देश में ये पेनकिलर्स लोगों कितना भारी नुकसान कर रहे होंगे। क्योंकि यहां न तो सेहत के मामले में पर्याप्त जागरूकता है और न ही इलाज की समुचित सुविधाएं लोगों को हासिल हैं। सरकार के स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की जिम्मेदारी यह बनती है कि वे आम जनता को इस बारे में सचेत करें। लेकिन लोग खुद भी अपने ऊपर डाक्टरी करने से बचें तो ज्यादा अच्छा होगा(संपादकीय,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,12.11.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा , सेल्फ ट्रीटमेंट नहीं करना चाहिए । डॉक्टर्स की देख रेख में ली गई दवा से हानि होने की सम्भावना काफी कम रहती है ।

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  2. मानसिक रोगों पर सरल भाषा में कुछ जानकारी मिल सकेगी क्या?

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