शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

ल्यूकोरिया में योग

अधिकतर महिलाएं ल्यूकोरिया जैसे-श्वेतप्रदर,सफेद पानी जैसी बीमारियो से जुझती रहती हैं, लेकिन शर्म से किसी को बताती नहीं और इस बीमारी को पालती रहती हैं। यह रोग महिलाओं को काफी नुकसान पहुंचाता है। इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए पथ्य करने के साथ-साथ योगाभ्यास का नियमित अभ्यास रोगी को रोग से छुटकारा देने के साथ आकर्षक और सुन्दर भी बनाता है।
यह वो बीमारी है जिससे भरी जवानी में महिलायें बूढ़ी और कमजोर नजर आने लगती हैं। श्वेतप्रदर सफेद पानी, व्हाइट डिस्चार्ज या ल्यूकोरिया महिलाओं की एक आम बीमारी है जिसमें कभी सफेद तो कभी मटमैला या पीला टाइप का दुर्गन्ध द्रव्य योनि से निरन्तर निकलता रहता है जो कई दिनों एवं महीनों तक जारी रहता है । इसे ल्यूकोरिया या श्वेतप्रदर रोग क हते हैं। योनि की भीतरी झिल्ली, गर्भाशय मुख या गर्भाशय से निकलने वाले मांस से धोवन की तरह, कभी योनि में खुजली और जलन पैदा करने वाला, दुर्गन्धयुक्त सफेद पानी के बहते रहने से अक्सर रोगी निर्बल, उदास और परेशान रहती हैं और शर्म के मारे रोग के बारे में किसी को कुछ बताना नहीं चाहती। श्वेतप्रदर के निरन्तर स्त्राव से महिलाएं धीरे -धीरे क मजोर और निढाल हो जाती हैं और भरी जवानी में बूढ़ी नजर आने लगती हैं। रोग उत्पत्ति के कारण अत्यधिक आलस्य भरी जीवन-यापन अर्थात शारीरिक श्रम कम करना, हर वक्त लेटे रहने की आदत, उत्तेजक पदार्थो का अधिक सेवन जैसे मांस, मछली, अंडा, शराब, चाय, काफी, तेल, मिर्च, खट्टी तथा चटपटी चाट आदि बार-बार तथा थोड़ी-थोड़ी देर बाद खाते रहने की आदत, कामोत्तेजक और अश्लील साहित्य, सिनेमा तथा मनोरंजन के साधनों में अधिक रूचि, अत्यधिक सहवास, मासिक धर्म की अनियमितता, छोटी उम्र में गर्भ धारण करना या बार-बार गर्भपात होना, भीतरी योनि में फोड़ा, फुन्सी या रसूली का होना अथवा ट्राइकोमोनास वेजाइनल या फंगस जीवाणु की उपस्थिति होने आदि से ल्यूकोरिया हो सकता है । लक्षण: श्वेतप्रदर में रोगी के हाथ पैर, पिंडलियां, घुटनों और पैर की हड्डियों में काफी दर्द होता है , पेड़ू में भारीपन, शरीर टूटना, कमर दर्द, सिर दर्द, स्मरण शक्ति में कमी, या चक्कर आना, हाथ-पैरों में जलन, योनि का गीला रहना, योनि में खुजली या जलन होना, शरीर में कमजोरी, कैल्शियम की कमी, योनिगंध, योनिशूल, खून की कमी, चेहरे का पीला पड़ना, आंखों का काला होना, चेहरा धंस जाना भूख न लगना, सिर के बाल अत्यधिक मात्रा में झरना ,आंखों का दिनों दिन रोशनी कम होना, कब्जियत बना रहना, बार-बार मूत्र आना, किसी काम में मन न लगना, उत्साहहीनता, चिड़चिड़ापन आदि होना ल्यूकोरिया के लक्षण होते हैं । यौगिक क्रिया: प्राणायाम ओम प्राणायाम 21 बार, क पालभाति 5 मिनट, अणुलोम-विलोम5 मिनट, भ्रामरी प्राणायाम 5 बार। आसन : वज्रासन, शशांकासन, भुजंगासन, अर्धशलमासन,धनुरासन, पश्चिमोत्तोनासन, कन्धरासन। बन्ध : मुलबन्ध का विशेषरूप से अभ्यास इस बीमारी में काफी लाभदायक होता है । मुद्रा : अश्विनी मुद्रा, सहजोली मुद्रा, विपरित क रणी मुद्रा और क्रमवार से धीरे धीरे सूर्य नमस्कार का अभ्यास। अंतत: यथाशक्ति शारीरिक श्रम करें , दिन में सोना बंद करें , आसन, प्रणायाम और प्रात: खुली हवा में प्रत्येक दिन टहलने का दैनिक कार्यक्रम बनायें। क्रोध, चिन्ता, शोक , भय से दूर रहें । सदैव प्रफुल्लित रहें । आहार : सभी हरी शाक -सब्जियां, सूप, खिचड़ी, दलिया, चोकरयुक्त आंटे की रोटी, फल में केला, अंगूर , सेव, नारंगी, अनार, आवंला, पपीता, चीकू , मौसमी, पुराना शाली चावल,चावल का धोवन तथा मांड़ , दूध, शक्कर, घी, मक्खन, छाछ, अरहर और मूंग की दाल, अंकुरित मूंग, मोठ आदि का समुचित प्रयोग करें। स्वच्छतापालन, ध्यान, सत्संग और स्वाध्याय का अभ्यास। अपथ्य : तेज मिर्च मसालेदार पदार्थ, तेल में तले पदार्थ, गुड़ , खटाई, अरबी, बैगन, अधिक सहवास, रात में जागना, उत्तेजक साहित्य, चाय, काफी,अधिक टीवी, संगीत-मजाक से बचे। पथ्य का पालन करते हुए योगाभ्यास के नियमित अभ्यास से कुछ ही दिनों में रोग से तो छुटकारा मिलेगा ही साथ ही साथ आकर्षक और सुन्दर भी आप दिखेंगी-डा. नन्द कुमार झा, योग व प्राकृतिक चिकित्सक(हिंदुस्तान,पटना,20.8.2010)

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