रविवार, 8 अगस्त 2010

लीलावती अस्पताल है मेटाबोलोमिक्स टेक्नोलॉजी से कृत्रिम गर्भाधान कराने वाला एशिया का पहला अस्पताल

कृत्रिम गर्भाधान (टेस्ट ट्यूब) के वक्त अब संतानहीन या फिर बांझ दंपति बेहतर और स्वस्थ भ्रूण का चयन कर सकेंगे। आशा की यह नई किरण इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) यानी टेस्ट ट्यूब के क्षेत्र में मेटाबोलोमिक्स टेक्नोलॉजी के आने से जागी है।
यह जानकारी मुंबई स्थित लीलावती अस्पताल के आईवीएफ सेंटर के अध्यक्ष डॉ. ह्रषिकेश पै और डॉ. नंदिता पालशेतकर ने दी। लीलावती अस्पताल मेटाबोलोमिक्स टेक्नोलॉजी स्थापित करने वाला एशिया का पहला अस्पताल है। डॉ. पै का कहना है कि मेटाबोलोमिक्स टेक्नोलॉजी कृत्रिम गर्भाधान के दर को बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होगा। इस टेक्नोलॉजी की वजह से उन महिलाओं को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जिनका टेस्ट ट्यूब का प्रयास जल्द ही विफल हुआ है। डॉ. पालशेतकर का कहना है कि मेटाबोलोमिक्स टेक्नोलॉजी की मदद से बेहतर और स्वस्थ भ्रूण का आसानी से चयन किया जा सकेगा। जिससे महिलाओं को कृत्रिम गर्भाधान की जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि भारत में पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म 1985 में हुआ। इस वक्त 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में कृत्रिम गर्भाधान की सफलता का दर 50-55 प्रतिशत जबकि इससे अधिक उम्र की महिलाओं में यह दर 50-55 प्रतिशत है(दैनिक भास्कर,मुंबई,8.8.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. गर्भाधान इस देश की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या है

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