बुधवार, 28 जुलाई 2010

निजी अस्पतालों में गरीबों का इलाज मुफ्त कराएगी सरकार

शहरी गरीबों को अब सिर्फ सरकारी अस्पतालों के भरोसे ही नहीं रहना होगा। इनके लिए निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और जांच केंद्रों के दरवाजे भी खुल जाएंगे। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत डॉक्टर मरीजों को योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी भेजेंगे। गरीब मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों को सरकार सीजीएचएस (केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना) की दरों से भुगतान करेगी। इस योजना की खास बात यह है कि पहली बार सरकारी खर्च पर हो रहे इलाज में क्वालिटी की भी गारंटी होगी। इस काम के लिए हर शहर में एक गुणवत्ता आश्वासन समिति या क्वालिटी एश्योरेंस कमेटी (क्यूएसी) गठित की जाएगी। समिति एक या अधिक गुणवत्ता आश्वासन टीम बना कर इस योजना के तहत शामिल किए गए सभी क्लीनिक, अस्पताल, नर्सिग होम, जांच केंद्र और दवा दुकानों का मेडिकल ऑडिट करेगी। जरूरत पड़ने पर यह टीम बाहरी विशेषज्ञों की मदद भी ले सकती है। सिर्फ क्वालिटी गारंटी के इस काम के लिए योजना में छह साल के लिए 291.60 करोड़ का बजट रखा गया है। शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत हर 50 हजार की आबादी पर एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीयूएचसी) का प्रावधान तो किया गया है। लेकिन बड़े खर्च को देखते हुए शुरुआत में नए अस्पताल बनाने की योजना नहीं बनाई गई है। बल्कि स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीज को जरूरत पड़ने पर मौजूदा सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था होगी। इसके लिए निजी अस्पताल, नर्सिग होम, क्लीनिक और जांच केंद्र आदि स्वास्थ्य सेवाओं को संबद्धता दी जाएगी। फिर भेजे गए हर मरीज के इलाज के लिए केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) या राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के तहत तय दरों से भुगतान किया जाएगा। निजी अस्पतालों में इलाज पर आने वाले खर्च के लिए सरकार ने योजना में मोटी रकम भी रखी है। इसके लिए हर प्रत्येक वर्ष प्रति व्यक्ति 655 रुपये का औसत खर्च का अनुमान लगाया है। अंदाजा है कि लगभग 3.13 करोड़ लोगों को इस तरह की रेफरल सुविधा की जरूरत होगी। लगभग इतनी ही संख्या में लोगों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना या आरोग्यश्री जैसी दूसरी योजनाओं का फायदा मिल रहा है। इस तरह मंत्रालय का अनुमान है कि इतने लोगों को रेफरल सुविधा उपलब्ध करवाने पर सालाना 2,046 करोड़ रुपये के हिसाब से 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कुल 10,234 करोड़ रुपये खर्च होंगे। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन की विस्तृत योजना स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार कर ली है। इसके तहत वर्ष 2012 से देश भर के 640 शहरों में रहने वाले गरीब लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का फायदा मिलने लगेगा(मुकेश केजरीवाल,दैनिक जागरण,दिल्ली,28.7.2010)।

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