रविवार, 21 मार्च 2010

बिन डाक्टर हेल्थ फॉर ऑल

एक तो मेडिकल की पढाई मे वक्त बहुत लगता है,दूसरे,पढाई के तुरंत बाद कमाई की भी गारंटी नहीं होती। आपाधापी भरी इस ज़िंदगी में उस पीढी का धैर्य टूट रहा है जो तुरंत अपनी मंजिल पाना चाहता है। यही कारण है कि अब छात्रों में डाक्टरी के प्रति अरूचि बढ रही है। ग्रामीण डाक्टरी के लिए कम समय की डिग्री देने की पहल छात्रों को इस ओर आकर्षित करने का एक अच्छा माध्यम बन सकती थी लेकिन डाक्टर बिरादरी के विरोध के चलते अभी कुछ कह पाना कठिन है। हमारे देश में,प्रति हजार जनसंख्या पर डाक्टर का अनुपात पहले ही से चिंताजनक रूप से कम है। ऐसे मे क्या होगा केंद्र सरकार के हेल्थ फॉर ऑल नारे का?

2 टिप्‍पणियां:

  1. जो डॉक्टर हैं उनमें कई व्यपारी बन गए हैं....सेवा भाव की इच्छा वाले अपने को फंसा हुआ महसूस करते हैं....कहां से लाएं वो हिम्मत जो उन्हें कम धन में गुजारा करने से रोक सके...

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