शनिवार, 25 अगस्त 2012

मुखरोग का सीधा संबंध तनाव से है

तनाव का असर पूरे शरीर पर पड़ता है। यह मुंह की सेहत भी खराब कर देता है। तनाव की अधिकता की वजह से सिरदर्द, पेटदर्द या उच्च रक्तचाप होने के साथ-साथ ही दाँतों, मसूड़ों और मुँह में छाले भी हो जाते हैं।

तनाव और बेवजह की चिंताओं से मुँह की अंदरूनी सतह पर खराशें पड़ सकती हैं। केंकर सोर या कोल्ड सोर हो सकते हैं। दाँत भींचने की भी शिकायत हो सकती है। दाँत भींचने और सोते समय दाँत पीसने से दाँत खराब हो सकते हैं या मुँह में घाव हो सकते हैं। दाँतों की नियमित सफाई न होने एवं नियत समय पर भोजन न कर पाने के कारण मुँह में संक्रमण हो सकता है। केंकर सोर संक्रामक नहीं होते। 

क्या करें 
केंकर सोर आमतौर पर १० दिन में अपने आप खत्म हो जाते हैं। राहत पाने के लिए केमिस्ट से पूछकर छालों की कोई क्रीम लगाई जा सकती है। खुजली से बचने के लिए तीखा मसालेदार, बहुत गर्म या टमाटर जैसे अम्लीय खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

कोल्ड सोर 
ये हर्पीज सिम्पलेक्स वायरस के संक्रमण की वजह से होते है तथा एक से दूसरे तक पहुँचते हैं। ये ऐसे छाले होते हैं जिनमें तरल पदार्थ भरा रहता है। ये अक्सर मुंह के आसपास होठों के किनोर पर उभरते हैं। ये नाक के नीचे और ठोड़ी के आसपास भी हो जाते हैं। भावनात्मक तनाव की अधिकता के कारण इनकी संख्या बढ़ जाती है। एंटीवायरल औषधियाँ से राहत मिलती है। जैसे ही कोल्ड सोर की शुरूआत हो उनका इलाज चालू कर दें। इससे संक्रमण को सीमित करने में मदद मिलेगी और घर के दूसरे सदस्य इससे बच सकेंगे। 

दाँत किटकिटाना 
तनाव के कारण दाँत भींचना एक आम लक्षण है। कई लोग तनाव को सोते समय भी दूर नहीं रख पाते और दाँत किटकिटाते हैं। गंभीर अवस्था में मरीज दिन में ही अनजाने में दाँत किटकिटाने लगते हैं। दाँत किटकिटाने की समस्या के कारण जबड़े के जोड़ पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और दर्द रहने लगता है। चिकित्सक की सलाह से दाँत भींचने और किटकिटाने की समस्या से निजात मिल सकती है।

मुँह से दुर्गंध आना 
अतिरिक्त तनाव के कारण मरीज का मूड भी ठीक नहीं रहता, इस वजह से वह रोज सुबह टूथब्रश वगैरह पर ध्यान नहीं दे पाता। अधिक समय तक टूथब्रश करने या कुल्ले करने जैसी आवश्यक क्रियाओं से मुँह मोड़ने से मुँह के स्वास्थ पर बुरा असर पड़ता है। मसूड़े सड़ने लगते हैं और सूज जाते हैं। यदि पायरिया पहले से ही हो तो समस्या और गंभीर हो जाती है। तनाव के कारण नियमित भोजन करने की आदतें भी बिगड़ जाती हैं। तनावग्रस्त लोग आलू की चिप्स जैसे अस्वास्थप्रद स्नैक्स खाते हैं, कोला ड्रिंक्स पीते हैं और जंकफूड खाते हैं। इसकी वजह से दाँतों में समय से पहले खराबी आने लगती है। मुँह की नियमित साफ सफाई की आदतें पुर्नस्थापित करें। नियमित कसरत करने की आदत डालें। इससे तनाव कम करने में मदद मिलेगी। कसरतों से शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को ताकत मिलती है।

मसूड़ों की बीमारी 
एक शोध अध्ययन के मुताबिक अतिरिक्त तनाव भले ही अल्प समय के लिए ही हो लेकिन इसके कारण दाँतों में प्लॉक बनने की शिकायत होती है। लंबे समय तक तनाव बना रहे तो मसूड़ों से खून रिसने एवं जिंजीवाइटिस जैसी समस्याएं खड़ी होने का जोखिम रहता है। यह स्थिति मसूड़ों के स्वास्थ के लिए खतरनाक है। याद रखें कि नियमित रूप से संतुलित आहार लेना और दंत रोग विशेषज्ञ से समय-समय पर जाँचें कराते रहने से मुँह की सेहत भी बनी रहती है। दिन में दो बार टूथब्रश करना याद रखें। एंटीबैक्टेरियल माउथ रिंस से प्लॉक बनाने वाले बैक्टेरिया की सफाई हो जाती है। इसलिए दिन में एक बार इससे गरारे करना ना भूलें।

ताकि स्वस्थ रहें दाँत :  
पाचन क्रिया मुँह से ही शुरू हो जाती है। खाने को ठीक से पचाने के लिए इसका स्वस्थ होना काफी ज़रूरी होता है। यह खाना पचाने के लिए होता है और कार्बोहायड्रेट का पाचन भी यहीं से शुरू हो जाता है। दाँत खाने को चबाकर पचने में आसान बनाते हैं। लेकिन कई लोग इन्हें खाना चबाने के अलावा भी कई तरह के कामों के लिए उपयोग करते हैं, जिससे ये कमज़ोर पड़ने लगते हैं। दाँतों को स्वस्थ रखने के लिए इनका उपयोग कभी भी इस तरह से न करें : 

-बर्फ का चूरा करने के लिए

-प्लायर एवं हैंगर से दाँत खुरचना

-चिप्स के पैकेट खोलने के लिए

-कठ्ठी गठाने खोलने के लिए

-ट़ेढे-मेढ़े छुरी-कांटों को सीधा करने के लिए

-धूम्रपान से बचें : यह दाँतों और मुँह के लिए काफी नुकसानकारी हैं।

-हर २-३ महीने में टूथब्रश बदलते रहें।ज़्यादा समय तक एक ही ब्रश का इस्तेमाल करने से इसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।

-सुबह उठते ही व सोने से पहले दाँतों को ब्रश करना बेहद ज़रुरी है । इससे मुँह में बैक्टीरिया पनपने की दर व दाँतों पर प्लाक बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है(सेहत,नई दुनिया,अगस्त द्वितीयांक 2012)।

5 टिप्‍पणियां:

  1. अच्‍छी जानकारी देता यह आलेख ... आभार

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  2. लाभदायक पोस्‍ट वास्‍तव मे मुख ही शरीर का अग्र भाग है तो यह लाजमी हे
    यूनिक तकनीकी ब्ला͉ग

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    1. आपका ब्लॉग नहीं खुल रहा है। कृपया देखें।

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  3. उम्दा है , बधाई .

    # चला गीदड़ शिकारी बनने Story for children

    http://mankiduniya.blogspot.in/2012/08/story-for-children.html

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