मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

जाती सर्दी के परहेज

हम यह तो जानते ही हैं कि बदलते मौसम में अपना ख्याल रखना चाहिए, फिर भी कई बार हम लापरवाही कर बैठते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। अब तो सर्दियों के जाने का समय आ गया, जब और अधिक खयाल रखने की जरूरती पड़ती है। रेखा चौधरी बता रही हैं कि क्या-क्या खयाल रखें ताकि जाती सर्दियां परेशान न करें। 

सर्दियों में ठंड की चपेट में सबसे पहले 7 साल की उम्र तक के बच्चे ही आते हैं। इनमें खांसी, जुकाम और निमोनिया जैसी बीमारियां जल्द हो जाती हैं। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान अति आवश्यक है। 

सर्दियों के मौसम में बच्चों को खांसी, जुकाम के साथ-साथ ब्रांकायटिस यानी हल्का निमोनिया या अधिक सर्दी में फेफड़ों में कफ एकत्र होने से रोग उत्पन्न होने लगते हैं। इस अवस्था में बच्चों को सांस लेने व खांसने में परेशानी होती है और कई बार ये परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि बच्चे सो भी नहीं पाते। कफ, खांसी या कफ के कारण हुई सीने में जकड़न के लिए डॉक्टर नेब्युलाइजर देने की सलाह देते हैं जिसे लेने से बच्चे के सीने में हो रही जकड़न व एकत्र हुए कफ के कारण हुई परेशानी में आराम मिलता है। डॉक्टर इस बात की भी सलाह देते हैं कि नेब्युलाइजर के अत्यधिक प्रयोग से बचना चाहिए। 

ठंड के मौसम में सर्द-गर्म होना स्वाभाविक है, लेकिन ध्यान दिया जाए तो सर्द-गर्म से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। सर्द-गर्म के कारण होने वाले रोगों में सिर में दर्द, गले में इंफेक्शन आदि रोग आते हैं। सर्द-गर्म का मतलब है ठंडे स्थान से गर्म स्थान पर या जल्द ही गर्म स्थान से ठंडी जगह पर आना। कई लोग रूम हीटर का या बदन सेकने के लिए आग का प्रयोग करते हैं, किंतु वे रूम हीटर से गर्म हुए कमरे से निकलकर अचानक ठंड में आ जाते हैं या बदन सेकने के तुरंत बाद ठंडे पानी में काम करने लगते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें सर्द-गर्म से होने वाली बीमारियां अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। 

सर्दियों के मौसम में महिलाओं में एलआरटीआई (लोवर रेसपायरेटरी ट्रेक्ट इंफेक्शन) और यूआरटीआई (अपर रेसपायरेटरी ट्रेक्ट इंफेक्शन) जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इसमें महिलाओं के लंग्स में सूजन, इंफेक्शन, निमोनिया जैसी शिकायतें सामने आती हैं। यदि समय पर डॉक्टरी सलाह नहीं ली जाए, तो महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

ठंड से बचने के लिए 
इस मौसम में हम गर्म कपड़ों का तो इस्तेमाल करते ही हैं, कई बार रूम हीटर का भी प्रयोग करते हैं, जिससे बचना चाहिए। हीटर का इस्तेमाल तब करें, जब आप सोने जा रहे हों या आपको जब बाहर नहीं जाना हो। याद रखें कि हमेशा सोने से पहले रूम हीटर बंद कर दें। 

हल्की खांसी या जुकाम में अदरक का प्रयोग करें। इसका इस्तेमाल आप चाय के साथ भी कर सकते हैं, अदरक का रस और शहद समान मात्र में मिलाकर ले सकते हैं या फिर सब्जियों या दालों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। जितना हो सके दही, रायते व ठंडी तासीर वाली चीजों से परहेज करें। फ्रिज में रखे भोजन की बजाय ताजे भोजन का प्रयोग करें। यदि उड़द की दाल या गोभी का प्रयोग करें, तो उसमें एक चुटकी सोंठ व दो लौंग अवश्य डालें। 

भोजन में अदरक के साथ यदि लहसुन का भी प्रयोग करें तो सोने पे सुहागा, क्योंकि अदरक और लहसुन सर्दियों में ठंड से निजात दिलाते हैं वहीं बाय-बादी से भी छुटकारा दिलाते हैं और पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखते हैं। 

डॉ. अजीत वरदान सिंह का कहना है कि ठंड के मौसम में अस्थमा, दमा जैसी बीमारियों में तकलीफ काफी बढ़ जाती है। इस कारण रोगियों को अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि जरा-सी भी तकलीफ हो, तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। 

आसपास कोई छींक रहा है तो उनसे बचें, क्योंकि इससे आप संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। आमतौर पर जितना पानी हम गर्मियों के मौसम में पीते हैं, इस मौसम में उसका आधा भी पानी नहीं पीते। इसका बड़ा नुकसान हो सकता है(हिंदुस्तान,दिल्ली,1.2.12)।

8 टिप्‍पणियां:

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  2. यह पोस्ट पढ़ते हुये मुस्कुरा रही हूँ अब तक इतनी भीषण सर्दी में कुछ भी नहीं हुआ था
    पर अभी अभी चार पांच दिनों से जाती हुई सर्दी ने मुझे भी अपनी चपेट में लिया है :)
    अच्छी पोस्ट आभार !

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  3. स्वास्थ्य का ध्यान तो हमेशा ही रखना होगा.

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!

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  5. बहु मूल्य बहु उपयोगी जानकारी .सहज सरल शैली में .

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  6. एक उपयोगी जानकारी को को लिखा है आपने ... हर साल इन बातों को याद रखना जरूरी है ...

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