रविवार, 22 जनवरी 2012

क्यों दुखती है कमर

आराम-तलब जीवनशैली कई रोगों की जन्मदात्री है। कमरदर्द भी इनमें से एक है। दिन भर बैठने की नौकरियाँ और कसरतों से जी चुराने के कारण समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। पहले कहा जाता था कि रीढ़ की हड्डी जितनी लचीली होगी स्वास्थ भी उतना ही अच्छा होगा, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। आईटी उद्योगों में सेवाएँ दे रहे युवाओं को कमरदर्द की समस्या अधिक है, क्योंकि उनकी जीवनशैली में शारीरिक श्रम न्यूनतम रह गया है। हड्डियों की मजबूती के लिए दूध बेहद जरूरी समझा जाता है, पर उसका स्थान कोल्ड ड्रिंक्स ने ले लिया है। युवाओं के शरीर में दूध से मिलने वाले कैल्शियम की मात्रा लगातार कम होती जा रही है। हाल ही में स्कूली बच्चों पर हुए एक शोध अध्ययन से पता चला कि ६८ प्रतिशत बच्चों में कैल्शियम का स्तर खतरनाक बिंदु तक गिर चुका है।

रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन के लिए योगासन एवं स्ट्रेचिंग एक्सरसाइजेस बहुत मुफीद मानी गई हैं। योगासन शुरू करने वाले अधिकांश लोग कुछ दिनों तक सीखने के बाद इसे छोड़ देते हैं। महिलाओं में कमरदर्द की शिकायत बहुत आम है, लेकिन वे इसके संकेतों को तब तक अनदेखा करती हैं जब तक उठना-बैठना मुश्किल नहीं हो जाता। रजोनिवृत्ति के बाद उनके शरीर में कैल्शियम और आयरन की कमी हो जाती है। रीढ़ की हड्डी पर भी इसका असर होता है। ग़लत ढंग से खड़े होकर किचन में काम करने से लेकर भीगे कपड़ों से भरी बाल्टी उठाने तक वे सारे काम कमर के दम पर करती हैं। ज़मीन से किसी भी भारी वज़न को उठाने के लिए वे कमर की बजाय जाँघों और घुटनों का इस्तेमाल नहीं करतीं। इससे उनकी कमर की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक खिंचाव आता है। यहीं से कमरदर्द की शुरुआत होती है। किसी भी व्यायाम को नियमित करने पर जो फायदे हो सकते हैं, वे कभी-कभार करने पर हासिल नहीं होते। योगासनों को जीवनशैली में शामिल कीजिए। इससे मन, मस्तिष्क एवं शरीर की पूरी फिटनेस प्राप्त की जा सकती है(संपादकीय,सेहत,नई दुनिया,जनवरी 2012 प्रथमांक)।

चोट लगने से मांसपेशी में खिंचाव या ऐंठन, स्नायुओं में मोच, जो़ड़ों की परेशानी या डिस्क के खिसकने से कमर में दर्द हो सकता है। आमतौर पर री़ढ़ की हड्डी पर एकाएक दबाव ब़ढ़ने से कमरदर्द की शिकायत हो सकती है। 

सामान्यतः कमर दर्द उन कामों को करने से हो सकता है, जिन्हें आप अक्सर नहीं करते। भारी फर्नीचर खिसकाना या उठाना, बिना आराम किए लगातार काम करना, गैस की टंकी झटके से उठाने की कोशिश करना आदि ऐसे काम है जो आप रोजमर्रा की जिंदगी में नहीं करते। जरूरत पड़ने पर आप इन्हें करने का जोखिम उठा लेते हैं। महिलाएँ अक्सर ऐसे जोखिम उठाती हैं, इसलिए कमर का दर्द भी उन्हें अधिक सताता है। डिस्क तब खिसकती है, जब री़ढ़ की दो हड्डियों के बीच में उभार आ जाता है, जिससे ना़ड़ियों पर दबाव पड़ता है। यह अधिकतर सामान उठाते हुए मु़ड़ने के कारण होता है, पर अधिकतर मरीजों को पता नहीं होता कि डिस्क खिसकने का कारण क्या है?

कैसे मिले दर्द से राहत... 
 कमर दर्द से राहत पाने के लिए कमर के बल लेटना सबसे उत्तम होता है। अपने घुटनों के नीचे तकिया रखें। कूल्हों व घुटनों को मोडें और पैरों को कुर्सी पर रखें या सिर्फ कूल्हों और घुटनों को मो़ड़ें। यह आपकी कमर से दबाव को कम करेगा। कमर दर्द की सूरत में एक या दो दिन से अधिक आराम करने पर मांसपेशियाँ कमजोर प़ड़ सकती है। इससे ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। केवल आराम ही न करें। दर्द होने पर भी हर घंटे में कुछ मिनट तक अवश्य घूमें। ऐंठी हुई मांसपेशियों को सेंकने से राहत मिलती है। एक बार में २०-३० मिनट तक सिकाई करें। बर्फ की थैली रखने व मालिश करने से भी आराम मिल सकता है।

बैठने का सही तरीका 
 बैठने के लिए उन कुर्सियों का इस्तेमाल करें जिनका पिछला भाग समतल हो और कमर के निचले हिस्से को सहारा देने में सक्षम हों। अपने घुटनों को कूल्हों से थोड़ी ऊंचाई पर रखें। कुर्सी व्यवस्थित करें या पैर रखने के लिए सपोर्ट का इस्तेमाल करें ताकि घुटने कूल्हों से कुछ ऊंचाई पर रहें। मुड़ते वक्त केवल कमर नहीं,बल्कि पूरे शरीर को मोड़ें। चार पहिया वाहन चलाते हुए सीधे बैठें और अपनी सीट को आगे की तरफ बढ़ाएं। इससे आप बिना आगे झुके वाहन नियंत्रित कर पाएंगे। अगर आपको काफी लम्बे समय तक वाहन चलाना या बैठना आवश्यक है,तो अपनी कमर के पीछे एक छोटा सा तकिया या तौलिया गोल करके रख सकते हैं। 

सोने का सही तरीक़ा 
करवट लेकर घुटने मोड़ कर लेटना सोने की सर्वोत्तम अवस्था है। गर्दन को सहारा देने के लिए सिर के नीचे तकिया लगा सकते हैं। घुटनोम के बीच में भी पतला तकिया लगा सकते हैं। अगर पेट के बल सोते हैं,तो जांघों के नीचे तकिया रखें। ठोस गद्दे का उपयोग करें। कमर दर्द का उपचार उसके कारणों को ध्यान में रख कर किया जाना चाहिए। अत्यधिक मोटापा कमर दर्द ब़ढ़ा सकता है। जब आप बैठे, ख़ड़े रहें या सोएँ तो हमेशा अपनी मांसपेशियों को उचित अवस्था में रखने की कोशिश करें।  

ख़ड़े होने का सही तरीका... 
 अगर काफी लम्बे समय तक ख़ड़ा रहना आवश्यक है तो एक पाँव को छोटी चौकी (पटिये) पर रखें जिससे आपकी कमर के निचले भाग पर दबाव कम प़ड़ेगा। प्रत्येक ५-१० मिनट के बीच चौकी पर पाँव बदलते रहें। अपने कानों, कंधों व कूल्हों को एक दिशा में रखें व सिर ऊपर और पेट अंदर रखें।  

कमर की मजबूती के लिए व्यायाम 
 कुछ विशेष व्यायाम कमर दर्द में सहायक हैं। उनमें से एक है, कमर की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज। कमर के बल लेट जाएँ और घुटनों को मो़ड़ लें। धीरे-धीरे अपने बाएँ घुटने को छाती तक लाएँ व पीठ से जमीन पर दबाव डालें। ५ सेकंड तक इस अवस्था में रहें। अब विराम अवस्था में आ जाएँ तथा इस व्यायाम को दाएँ घुटने के साथ भी करें। प्रत्येक पैर से यह व्यायाम ५-१० बार दोहराएँ। साधारण रूप से चुस्त रहना जितना महत्वपूर्ण है, उसी तरह कमर के लिए कुछ विशेष व्यायाम करना आवश्यक है। तैराकी व पैदल चलना तंदुरुस्ती को ब़ढ़ाने के अच्छे व्यायाम हैं।चोट लगने से मांसपेशी में खिंचाव या ऐंठन, स्नायुओं में मोच, जो़ड़ों की परेशानी या डिस्क के खिसकने से कमर में दर्द हो सकता है। आमतौर पर री़ढ़ की हड्डी पर एकाएक दबाव ब़ढ़ने से कमरदर्द की शिकायत हो सकती है। 

घुमावदार व्यायाम 
पीठ के बल जमीन पर लेट जाएँ, बाजुओं को मो़ड़ते हुए अपने सीने पर रखें। घुटनों को मो़ड़ते हुए कमर को सीधा करें। अपनी ठो़ड़ी को सीने से लगाएँ। जब आप अपने सिर और कंधे को जमीन से उपर उठा रहे हों तब अपने पेट की मांसपेशियों को खींच कर रखें। दस सेकंड तक इस अवस्था में रहें और फिर विराम अवस्था में आ जाएँ। इस प्रक्रिया को१०-१५ बार दोहराएँ। 

जाँघों का झुकाव 
जमीन पर पीठ के बल लेट जाएँ और अपने घुटनों को मो़ड़ लें। विराम अवस्था में पीठ का निचला हिस्सा जमीन से स्पर्श नहीं होगा। अपने पेट की मांसपेशियों को दृ़ढ़ करें, ताकि पीठ जमीन पर समतल रहें। इस अवस्था में ५ सेकंड तक रहें और फिर पूर्व अवस्था में आ जाएँ। इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएँ। फिर धीरे-धीरे दस बार तक करने की कोशिश करें। 

पीठ का खिंचाव 
पेट के बल लेट जाएँ। हथेलियों को जमीन से लगा कर कंधों का उपयोग करते हुए अपने शरीर के ऊपरी भाग को जमीन से ऊपर उठाएँ। इस अवस्था में पाँच सेकंड तक रहें और अपनी पीठ को विरामावस्था में रहने दें। इस प्रक्रिया को दस बार दोहराएँ।

घुटनों को सीने तक लाएँ 
पीठ के बल लेट जाएँ और दोनों पैरों को सीधा रखें। पीठ से ज़मीन पर हल्का-सा दबाव देते हुए अपने एक घुटने को सीने से स्पर्श करें। पाँच सेकंड के लिए इसी अवस्था में रहकर विराम अवस्था में आ जाएँ और प्रक्रिया को पाँच बार दोहराएँ। इस व्यायाम को दूसरे पैर से भी करें।

घुटनों से सीने तक खिंचाव 
पीठ के बल लेट जाएँ, दोनों घुटनों को सीने से स्पर्श करें जब तक कि आप पीठ के निचले हिस्से में आरामदायक खिंचाव अनुभव करें। अपनी पीठ को विरामावस्था में छो़ड़ दें। इस अवस्था में ४५-६० सेकंड तक रहें। 

हाथ-पैर फैलाने का व्यायाम 
घुटनों और हाथों के बल जमीन पर लेटें। अपना बायाँ हाथ और दायाँ पैर उठाएँ। गर्दन न मो़ड़ें। दस सेकंड तक इस अवस्था में रहें और फिर विरामावस्था में आ जाएँ। अपना दायाँ हाथ और बायाँ पैर उठाएँ। गर्दन सीधी रखें। दस सेकंड तक इस अवस्था में रहें और फिर विरामावस्था में आ जाएँ(डॉ. दीपक एस. मरावी,सेहत,नई दुनिया,जनवरी 2012 प्रथमांक)।

7 टिप्‍पणियां:

  1. ऑनलाईन डॉक्टर हो आप हमारे ।

    हिंदी दुनिया

    http://hindidunia.wordpress.com/

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  2. यह सब आसन कमर दर्द के लिये फिजियो थेरपी से भी दवाखाने में कराये जाते है !
    अगर इन आसनों को सीखकर हमारे रोज के कार्य में शामिल किया जाये तो,
    निश्चित कमर दर्द कभी नहीं होगा ! यह मेरा अपना अनुभव है पिछले पंधरा साल का !
    आभार अच्छी रही पोस्ट !

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  3. कुछ साधारण उपाय तो आपने बता ही दिए हैं. एक और लाभकारी पोस्ट के लिए धन्यवाद .

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  4. बहुत ही अच्छी फिजियो थेरपी बताई है, लेकिन हर रोज करे तोहि उसका परिणाम दिखाई देता है।
    बहुत धन्यवाद ।

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