शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

.....ताकि आप न हों फूड प्वायजनिंग के शिकार

जीने के लिए खाना जरूरी है, लेकिन कभी-कभी यह खाना जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसके दो प्रमुख कारण हैं। या तो खाना खुद संक्रमित हो या उसको रखने या पकाने के तरीके अनहाइजनिक होने की वजह से संक्रमित हो जाए। 

उपचार 
सामान्य संक्रमण में प्राथमिक लक्षण नजर आने पर मरीज को उपचार उपलब्ध कराया जाए तो मरीज 2-3 दिन में सामान्य हो जाता है। तीव्र संक्रमण की स्थिति में यदि बैक्टीरिया पहले ही तंत्रिका तंत्र पर आक्रमण कर चुका है तो वह जानलेवा साबित हो सकता है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर मरीज को उपचार उपलब्ध कराना बहुत जरूरी है। 

घरेलू नुस्खे 
-रोजाना रात के खाने के एक घंटे बाद एक गिलास नींबू पानी का सेवन करें। इससे खाना भी ठीक से पचेगा और पेट भी साफ रहेगा। 
-फूड प्वायजनिंग का कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अदरक की चाय का सेवन तत्काल शुरू कर दें। यह आपके शरीर को फूड प्वायजनिंग के असर से मुक्त करने में सहयोग करेगी। 
-फूड प्वायजनिंग तब होती है जब हम ऐसे भोजन का सेवन करते हैं जो बैक्टीरिया, वाइरस, दूसरे रोगाणुओं या विषैले तत्व से संक्रमित हो। बच्चे और बुजुर्ग फूड प्वायजनिंग के शिकार होते हैं, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। 
-कैलाश हॉस्पिटल के सीनियर फिजिशियन डॉ. ए. के. शुक्ला कहते हैं,‘फूड प्वायजनिंग के अधिकतर मामलों में स्टेफायलों कोकस या एस्चेरीचिया कोले (ई-कोलाई) बैक्टीरिया का संक्रमण पाया जाता है। यह रक्त, किडनी और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके अलावा सालमोनेला, स्टेफाइलोकोकाई और क्लॉसट्रिडियम बोट्युलियम जैसे रोगाणु भी खाद्य पदार्थों को संक्रमित करते हैं। क्लॉसट्रिडियम बोट्युलियम द्वारा उत्पन्न संक्रमण को बॉट्युलिज्म कहते हैं। यह गंभीर फूड प्वायजनिंग माना जाता है, क्योंकि इसमें रोगाणु सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करते हैं। 

लक्षण 
नोवा मेडिकल सेंटर के सीनियर मैनेजर और सेंटर मैनेजर डॉ. संजीव गुप्ता कहते हैं, ‘फूड प्वायजनिंग के लक्षण खाना खाने के 2 से 6 घंटे बाद दिखाई देने लगते हैं। हमारे शरीर का सिस्टम ऐसा बना है कि उसमें संक्रमित खाद्य पदार्थ जाते ही उसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। 

सामान्य लक्षण 
-पेट में दर्द और मरोड़ होना। 
-डायरिया (कभी-कभी दस्त के साथ खून आना) सिरदर्द, चक्कर आना, 
जी मचलाना और उल्टी होना। 
-ठंड लगकर बुखार आना। 
-आंखों के आगे धुंधलका छा जाना। 
-कमजोरी महसूस होना। 
-बेहोश हो जाना। 

गंभीर लक्षण 
-सांस लेने में तकलीफ होना। 
-पेट फूलना। 
-आंखों और त्वचा का पीला पड़ना। 
-जोड़ों में सूजन। 
-खून की उल्टियां होना। 

संक्रमण के कारण 
डॉ. शुक्ला के अनुसार बैक्टीरिया खाने में कई तरीके से प्रवेश कर उसे संक्रमित करते हैं- 
-पशु या मानव मल द्वारा संक्रमित पानी को फसलों को उगाने और सिंचाई के उपयोग में लाना। 
-प्रोसेसिंग के दौरान मांस, मछली, चिकन का इंटेस्टीनल बैक्टीरिया के संपर्क में आना। 
-शौच के बाद हाथों को ठीक तरीके से न धोना। 
-खाना बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले बर्तनों और दूसरी वस्तुओं का गंदा होना। 
-डेयरी उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखना। 
-फ्रोजन चीजों को उचित तापमान पर स्टोर नहीं करना। 
-कच्ची सब्जियों और फलों को ठीक तरह से धोए बिना उपयोग करना। 
-अधपके मांस या अंडे का सेवन करना। 
-संक्रमित और गंदे जल का सेवन। 
-आवश्यकता से अधिक खाना। 
-सड़े हुए खाद्य पदार्थों का उपयोग। 

बचाव के उपाय 
-हमेशा ताजा और उचित प्रकार से पकाए हुए खाने का ही सेवन करें। 
-खाना बनाने, परोसने और खाने से पहले हाथों को ठीक तरह से धोना। 
-घर, खासकर किचन की सफाई का विशेष ध्यान रखना। 
-किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और बाकी वस्तुओं को अच्छी तरह से धोकर ही इस्तेमाल करें। 
-मांस, मछली और चिकन को उस तापमान तक पकाएं कि सारे रोगाणु मर जाएं। 
-रेफ्रिजरेटर में भी इन्हें उचित तापमान पर स्टोर करें। 
-बचे हुए खाने को ज्यादा समय तक रेफ्रिजिरेटर के बाहर न रखें। 
-दोबारा सेवन करने से पहले ठीक तरह से गर्म कर लें। 
-एक्सपाइरीडेट के खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें(शमीम खान,हिंदुस्तान,दिल्ली,5.10.11)।

8 टिप्‍पणियां:

  1. बचाव के उपाय
    -हमेशा ताजा और उचित प्रकार से पकाए हुए खाने का ही सेवन करें।
    -खाना बनाने, परोसने और खाने से पहले हाथों को ठीक तरह से धोना।
    -घर, खासकर किचन की सफाई का विशेष ध्यान रखना।

    pyarimaan.blogspot.com

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  2. दशहरा पर्व के अवसर पर आपको और आपके परिजनों को बधाई और शुभकामनाएं...

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  3. अच्छी जानकारी देती पोस्ट .विजय दशमी मुबारक .

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  4. बहुत ही उपयोगी जानकारी दी है…………आभार्।

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  5. बहुत उपयोगी जानकारी दी है आभार !

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  6. इस पोस्ट के लिए और मेरी पोस्ट पर आके टिपियाने के लिए कुमार राध्रमण साहब आपका शुक्रिया .

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  7. मुंबई में तो सारे हरे साग ट्रेन के ट्रैक पर गटर के पानी से उगाते है मैंने तो उन्हें खाना ही छोड़ दिया है बहार का खाना भी एक मुख्य कारण है |

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  8. हमेशा की तरह जानकारी वर्धक पोस्ट ....खास कर घरेलू नुस्खे बताने के लिए..... आभार

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