शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

गुलकंदः गर्मी का टॉनिक

गुलाब का फूल प्रायः सभी को पसंद आता है। इसके सौम्य गुणों का उपयोग विभिन्ना प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों में प्रचलित है। गुलाब से बने पेय पदार्थ गर्मी में विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं। गुलकंद के रूप में प्राचीनकाल से इसका औषधीय उपयोग किया जाता रहा है। गुलकंद एक आयुर्वेदिक टॉनिक है जिसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। इसकी ख़ासियत यह है कि गुलकंद का सेवन वर्षभर किसी भी आयुवर्ग के लिए लाभदायी होता है। गुलकंद का नियमित सेवन अच्छे स्वास्थ्य के लिए निरापद है।
 
औषधीय गुण

-गर्मी के दिनों में गुलकंद स्फूर्ति देने वाला एक शीतल टॉनिक है,जो गर्मी से उत्पन्न थकान, आलस्य, मांसपेशियों का दर्द और जलन आदि कष्टों से बचाता है।
-गुलकंद का सेवन पित्तदोष को दूर कर पाचन तंत्र को सक्रिय बनाता है, अपच और एसिडिटी से भी मुक्त करता है।
-शीतल प्रभाव के कारण गुलकंद का सेवन मासिक धर्म के नियमन में मदद करता है।
-विशेषज्ञों का मानना है कि इसके सेवन से शरीर में ऑक्सीटॉसिन हारमोन का स्राव बढ़ता है।
-शीतल प्रकृति के कारण गुलकंद के सेवन से नकसीर या नाक से होने वाला रक्तस्राव रुकता है।
-गुलकंद के नियमित सेवन से इसके पाचन उपरांत बनने वाला रस आँतों के लिए बहुत हितकर होता है। पाचन क्षमता में सुधार, चयापचय क्रिया का नियमन, रक्तशोधन करने के लिए गुलकंद फायदेमंद होता है।
-गर्मी के कारण चेहरे पर उत्पन्ना छोटी-छोटी फुंसियाँ (एक्ने) गुलकंद के सेवन से धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।
-बच्चों में कृमि कष्ट (पेट में कीड़े) होने पर बाइविडिंग का चूर्ण गुलकंद में मिलाकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम १५ दिनों तक देने से कृमि कष्ट से मुक्ति मिल जाती है।

भागमभाग के दौर में तनाव व मानसिक थकान से दूर रहने के लिए गुलकंद एक बढ़िया टॉनिक है जो तंत्रिका तंत्र और यकृत दोनों को स्वस्थ रखता है। इसका सेवन सौंदर्यवर्धक भी है। इससे ताज़गी,स्फूर्ति,चेहरे पर निखार आता है। यह पिंपल्स,डार्क सर्कल्स,आंखों के नीचे के काले घेरों को दूर करने में भी मदद करता है। इससे बाल झड़ना भी बंद होते हैं।

मात्राः प्रतिदिन 1 चम्मच सुबह,दोपहर,शाम को सेवन किया जा सकता है.

ऐसे बनाएँ
वैसे तो गुलकंद बाज़ार में बनाया हुआ आसानी से मिल जाता है, फिर भी यदि घर में बनाना चाहें, तो देसी गुलाब की पत्तियों का प्रयोग करें। स्वच्छ व स्वस्थ गुलाब की पंखुड़ियां लें। इससे दोगुनी मात्रा में शक्कर लें। कांच के चौड़े मुंह वाले जार में एक तह गुलाब की पत्तियों की और एक तह शक्कर की गलाएं। इसी तरह,एक के ऊपर एक सारी पत्तियां व शक्कर डाल दें।

जार का मुंह कपड़े से बंद कर इसे प्रतिदिन तीन-चार घंटे धूप में रखें। तीन-चार सप्ताह में गुलकंद तैयार हो जाएगा। फिर इसमें इलायची पावडर मिलाएं। नियमित सेवन के लिए शीतल,स्फूर्तिदायक टॉनिक तैयार है(डॉ. अनिता जोशी,सेहत,नई दुनिया,जुलाई ,2011 प्रथमांक)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. पहली बार गुलकंद बनाने की विधी पढ़ी है। प्रयोग ... कह नहीं सकता कब करूंगा?

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  2. upyogi rahi ghar main guluknd banane ki bidhi, ise sanjha krne hetu abhaar......pichhle ek do dino se bloging main hindi translation se sambandhit samsya se jujh raha hun so roman lipi main abhaar vyakt kr raha hun jike liye khed hai.

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