सोमवार, 18 अक्तूबर 2010

हृदय रोग में...........

दिल की बीमारियों से बचने के लिए भारतीयों को अपनी जीवनशैली और खानपान की आदतों में बदलाव लाना जरूरी है। नियमित कसरत करने के साथ-साथ घी-मक्खन से दूरी बनाए रखने में ही समझदारी है। यह कहना है विश्व प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट तथा इकोकार्डियोलॉजी के पितामह के रूप में विख्यात डॉ. नवीन सी. नंदा का। डॉ. नन्दा ने इन्दौर में चोइथराम अस्पताल द्वारा "इकोकार्डियोग्राफी निदान के नए आयाम" विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान "नईदुनिया" से बातचीत में बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप के निवासी,आनुवांशिक तौर पर, शुरू से ही दिल की बीमारियों का जोखिम होता है।उस पर खानपान की आदतें और आरामतलब जीवनशैली कहर बरपा देती है। अमेरिका में रह रही भारतवंशियों की तीसरी पी़ढ़ी भी दिल की बीमारियों के जोखिम पर है, क्योंकि वहाँ के जीवन में तनाव बहुत है। इकोकॉर्डियोग्राफी के क्षेत्र में नया क्या है? नई मशीनें मरीजों को राहत पहुँचाने के लिए ईजाद की जाती हैं। अब नई इकोकार्डियोग्राफी मशीनों से बहुसतही तीन आयामी चित्र मिल जाते हैं जिससे मरीज के दिल की स्थिति मालूम प़ड़ जाती है। मरीज को हार्ट सर्जरी से फायदा होगा या स्टेंट डालने से यह भी पहले से ही तय किया जा सकता है। मरीज को कलर डॉप्लर इकोकार्डियोग्राफी से क्या फायदा? यह सही है कि मरीज के पास दिल की बीमारी की अवस्थाएँ जानने के दूसरे उपाय भी हैं, लेकिन सीटी एंजियोग्राफी जैसे अन्य परीक्षणों में मरीज को रेडिएशन लगने का जोखिम भी है। छोटे बच्चों की दिल की जाँच में कलर डॉप्लर इकोकार्डियोग्राफी से अधिक फायदा है क्योंकि इससे यह भी मालूम हो सकता है कि बच्चे को किस तरह के इलाज की जरूरत है। जिन बच्चों के दिल के वाल्व में खराबी है उनके लिए यह मशीन एक वरदान है। भविष्य में किस तरह की होगी इकोकार्डियोग्राफी? टेक्नोलॉजी के विकास के साथ दिल की बीमारियों के परीक्षण भी तेजी से बदल रहे हैं। जाँच अथवा परीक्षणों के दौरान मरीजों को कम से कम नुकसान हो साथ ही इलाज से कितना फायदा होगा यह तक तय किया जा सकता है। अब ऐसे कैमरे आ गए हैं जिन्हें कैप्सूल के माध्यम से निगला जा सकता है। वे शरीर के अंदर पहुँचकर ३-डी इमेजेस भेजना शुरू कर देते हैं। इससे बहुत पास से दिल की तस्वीरें मिल जाती हैं। अब पोर्टेबल इकोकार्डियोग्राफी मशीनें भी आ गई हैं, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दिल की बीमारी ही न हो इसके लिए कौन-सी नई औषधियाँ आई हैं? खराब कोलेस्ट्रोल को कम करने वाली दवाएँ अब बाजार में आ गई हैं। इसके अलावा प्लॉक को फूटने से पहले ही रोक लेने वाली दवाएँ भी मिल रही हैं। स्टेम सेल थेरेपी पर परीक्षण जारी है। इससे मरीजों के क्षतिग्रस्त हो चुके दिल को भी ठीक करने की आशा बँधती है। दरअसल दिल की बीमारियों से रोकथाम के लिए जीवनशैली में परिवर्तन की जरूरत पहले है, औषधियाँ और परीक्षण तो बाद की बातें हैं(नई दुनिया,इन्दौर,17.10.2010)।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा जानकारी है.

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  2. आपके इस जानकारी बांटने के ज़ज़्बे को नमन! बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    बेटी .......प्यारी सी धुन

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