सोमवार, 14 जुलाई 2014

क्लबफुट का इलाज़ आसान है और निःशुल्क भी

गर्भ के समय या पूर्व में मां ने स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल अधिक किया है तो इससे नवजात के पैर जन्म से टेढ़े हो सकते हैं जिसे क्लब फुट बीमारी कहा जाता है। जिसका बिना सर्जरी इलाज किया जा सकता है। बच्चे के पैरों का सामान्य विकास होने के इंतजार करने में अधिकतर माता पिता दो से तीन साल की उम्र में ही ऐसे बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। जबकि जल्दी इलाज शुरू कर विकलांगता सही होने की संभावना अधिक रहती है। दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में इसका निःशुल्क इलाज किया जाता है, जहां अब तक 2100 बच्चों को ठीक किया जा चुका है। 


एम्स के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शाह आलम खान ने बताया जेनेटिक कारणों के अलावा अधिक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल, खून की कमी या जुड़वा बच्चे होने की सूरत में गर्भ में नवजात के पैरों का सामान्य विकास नहीं हो पाता, जिसकी वजह से पैर विकृत या विकलांग हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को जन्म के तुरंत बाद पहचाना जा सकता है, जिन अस्पतालों में क्लबफुट का इलाज उपलब्ध वह इसे जन्म के बाद ही शुरू कर देते हैं। जबकि विशेषज्ञों की सलाह पर क्लब फुट सोसाइटी से भी संपर्क कर इलाज कराया जा सकता है। 

चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय,दिल्ली के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि इलाज के लिए टीनोटॉमी विधि से बच्चों को विशेष तरह का प्लास्टर चढ़ाया जाता है, इसके बाद विशेष जूतों की सहायता से पैरों को सही एंगल (40 डिग्री) दिया जाता है। पूरी तरह ठीक होने पर 10 से 12 साल का समय लगता है। एम्स सहित दिल्ली के सात सरकारी अस्पतालों में क्लब फुट का इलाज किया जाता है। क्योर इंटरनेशनल के डॉ. संतोष जार्ज ने बताया क्लबफुट के दिल्ली में बीते तीन साल में 2100 बच्चों का इलाज किया जा चुका है, जबकि अब तक देश भर में 4000 बच्चें सही हो चुके हैं। जबकि वर्ष 2008 से पहले ऐसे बच्चों को विकलांगों की श्रेणी में रखा जाता था। 

क्या है टीनोटॉमी 
बच्चों की एड़ी को सही एंगल देने के लिए टीनाटॉमी के बाद प्लास्टर चढ़ाया जाता है, इसके लिए डॉक्टर एड़ी में हल्का कट लगाते हैं, विकृत 90 डिग्री के एंगल के पैरों में टीनाटॉमी की जरूरत अधिक होती है। कई बार
बच्चों को एक पैर में विकलांगता की शिकायत होती है, जबकि कभी दोनों पैरों में विकलांगता होती है। टीनोटॉमी के बाद विशेष तरह के जूतों (स्पीन्ट) से विकृति को दूर करते हैं। प्रक्रिया में बच्चों की बोन ग्राफ्टिंग नहीं होती है।

कब कहां इलाज 
*चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय - बुधवार 
*दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल- सोमवार 
*महर्षि वाल्मिकी अस्पताल बावाना- गुरुवार 
*लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज और कलावती सरन बाल चिकित्सालय- बुध व शुक्र 
*सेंट स्टीफेंस अस्पताल- शनिवार 
*सफदरजंग अस्पताल - सोमवार 

नोट- लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में भी क्लबफुट क्योर शुरू किया जा चुका है, सभी केन्द्रों पर बच्चों का निशुल्क इलाज किया जाता है। (हिंदुस्तान,दिल्ली,14 जुलाई,2014)।

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, निश्चय कर अपनी जीत करूँ - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. राधारमण जी, बहुत ही उपयोगी पोस्ट! हमेशा की तरह! कैसे हैं आप?? मेरा नमस्कार स्वीकार!!

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  4. काफी उपयोगी जानकारी है !

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  5. इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद ।

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  6. ऐक ज़रूरी जानकारी कुत्ते और गीदर के काटने पर उसे कभी भी नज़र अंदाज़ न करें हो सके तो फ़ौरन उसका ईलाज करें ईलाज ना करने की वजह से कभी भी हड़क उठ सकती है ।
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