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"ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आप फलां तरीक़े से स्वस्थ हैं और वो अमुक तरीक़े से। आप या तो स्वस्थ हैं या बीमार । बीमारियां पचास तरह की होती हैं;स्वास्थ्य एक ही प्रकार का होता है"- ओशो
मंगलवार, 28 अगस्त 2012
कई रोगों का इलाज़ हो रहा है फोटोथैरेपी से
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शनिवार, 25 अगस्त 2012
मुखरोग का सीधा संबंध तनाव से है
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शुक्रवार, 18 मई 2012
दाँतों का रक्षाकवच है एनामल
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सोमवार, 20 फ़रवरी 2012
दाँत की बीमारियों के आधुनिक उपचार
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सोमवार, 13 फ़रवरी 2012
मसूड़े रहें दमदार,तभी मुस्कान होगी सवा लाख की
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बुधवार, 14 दिसंबर 2011
मुंह की सफाई का खयाल रखना है जरूरी
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सोमवार, 12 दिसंबर 2011
क्यों लगता है दांतों में ठंडा-गरम?
विशेष टूथपेस्ट : संवेदनशील दाँतों के लिए विशेष टूथपेस्ट उपलब्ध हैं। साधारण टूथपेस्ट के बजाय इनका उपयोग करें। व्हाइटनरयुक्त टूथपेस्ट का उपयोग नहीं करें, यह दाँतों पर कठोरता से काम करते हैं। इनसे तकलीफ बढ़ जाती है।
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बुधवार, 23 नवंबर 2011
कहीं आपके बच्चे को कैरीज़ तो नहीं?
शाम चार बजे जानिएः
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मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011
मुंह की दुर्गंध से ऐसे बचें
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मंगलवार, 30 अगस्त 2011
कई ब्रांडेड टूथपेस्ट भी हैं दांतों के लिए खतरनाक
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शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011
पायरिया में करें सरसों तेल की मालिश
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शनिवार, 5 फ़रवरी 2011
दांतों की सफाई-2
कृत्रिम दांत: कृत्रिम दांतों को गीला रखना चाहिए। रोजाना इन्हें साफ भी करें। इन्हें गर्म पानी में नहीं डालना चाहिए, केवल कड़े बाल वाले ब्रश से साफ करें और बोरिक एसिड घोल या अन्य रोगाणुनाशक घोल में रखें। टूटे दांतों को इस्तेमाल न करें। नए दांत लगाने के बाद कुछ देर बोलने का अभ्यास करें। यदि दांत खटकें तो धीरे-धीरे बोलना चाहिए(हिंदुस्तान,दिल्ली,2.2.11)।
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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011
दांतों की सफाई-1
आमतौर पर लोग जिस तरह से दांत साफ करते हैं , उससे 60-70 फीसदी ही सफाई हो पाती है। दांत को सही तरीके से ब्रश करके या दातुन इस्तेमाल करके साफ रखा जा सकता है। दांतों को हमेशा हल्के दबाव से धीरे-धीरे साफ करें। दांतों को तीन-चार मिनट ब्रश करना चाहिए। मुंह में एक तरफ से ब्रशिंग शुरू कर दूसरी तरफ जाएं। ऊपर के दांतों को नीचे की ओर और नीचे के दांतों को ऊपर की ओर ब्रश करें। दांतों के बीच में फंसे कणों को जरूर निकाले, इसमें 7-8 मिनट भी लगते हैं तो आलस्य न करें। दांतों और मसूड़ों के जोड़ों की सफाई भी ढंग से करें। उंगली या ब्रश से धीरे धीरे मसूड़ों की मालिश करने से वे मजबूत होते हैं। दांतों को बहुत जोर से न रगड़ें, इससे दांत घिस जाते हैं। इसके अलावा, माउथवॉश का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यों तो हर बार खाने के बाद ब्रश करना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। ऐसे में दिन में दो बार तो ब्रश जरूर करें और खाने के बाद कुल्ला भी करें।- टूथपाउडर और मंजन के इस्तेमाल से बचें। टूथपाउडर बेशक महीन दिखता है, लेकिन काफी खुरदुरा होता है। टूथपाउडर करें तो उंगली से नहीं, बल्कि ब्रश से।
- नीम के दातुन में बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है, लेकिन यह दांतों को पूरी सफाई नहीं करता। विकल्प ब्रश ही है। दातुन से पहले उसे अच्छी तरह चबाएं। अगला हिस्सा नरम हो तो उसमें दांत धीरे-धीरे साफ करें। सख्त दातुन दांतों पर जोर-जोर से न रगड़ें(हिंदुस्तान,दिल्ली,31.1.11)।
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शनिवार, 15 जनवरी 2011
मुंह की दुर्गन्धःकारण और निवारण
मसूड़ों में सड़न की शुरूआत मुंह से बदबू आने से ही होती है। दूसरा लक्षण है मुंह में कड़वापन भी लगातार बना रहता है। मसूड़े सड़ने की वजह है-प्लॉक। यह रंगहीन चिपचिपी परत होती है जिसे बैक्टीरिया लगातार दांतों पर चढ़ाते रहते हैं। ये बैक्टीरिया ऐसे टॉक्सीन पैदा करते हैं जिससे मसूड़ों में खुजली होती है। एक ऐसी स्थिति आती है कि दाँत जड़ छोड़कर मसूड़ों से अलग होने लगते हैं। यदि मुंह में थूक किसी कारण से कम मात्रा में बनने लगे,तो बदबू आने लगती है। इसी तरह,तंबाकू के किसी भी उत्पाद से मुंह की त्वचा,मसूड़ों और दांतों को सिर्फ नुक़सान होता है। तंबाकू खाने वालों को किसी भी भोजन का स्वाद नहीं आता। उन्हें मुंह का कैंसर होने की आशंका दूसरों की बनिस्पत ज्यादा होती है। नाक,गला,श्वासनली और फेफड़ों में किसी तरह के संक्रमण के कारण अथवा असाध्य सायनाइटिस की वजह से भी मुंह से बदबू आती है। असाध्य खांसी,मधुमेह,चयापचय संबंधी समस्या व लिवर या किडनी की किसी बीमारी की वजह से भी बदबू आ सकती है।
नियमित रूप से दंतचिकित्सक के पास मुंह की जांच कराते रहें। प्लॉक और सीमेंटेशन निकलवाते रहें। जिन खाद्य पदार्थों से मुंह में बदबू होती है,उन्हें आहार से निकाल दें। मुंह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। दो बार ब्रश करें। जीभ को जीभी से साफ करें। दिन में एक बार फ्लास करें। दांतों के बीच के स्थान पर भोजन कणों को न रहने दें। यदि अस्थाई डेंचर का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें रात में निकाल दें। सुबह उनकी खूब अच्छी सफाई करें,फिर इस्तेमाल करें।
दाँतों में सड़न
मसूड़े खराब होना
दाँतों के बीच भोजन कणों का बना रहना।
मुँह सूखा रहना
जबान पर बैक्टेरिया की अधिक गतिविधियाँ होना, पोस्ट नैजल ड्रिप होना
गले में किसी तरह का संक्रमण होना।
साइनुसाइटिस
पोलिप्स एवं सूखापन
बाहरी तत्व मुँह में बने रहना
श्वास प्रश्वास में रुकावट या म्यूकस फ्लो में रुकावट
असाध्य खाँसी एवं निमोनिया
आहारनली में संक्रमण होने के कारण
गेस्टराइटिस और फूड रिफ्लक्स एवं भोजन का आँतों में बने रहना।
माउथवाश : आमतौर पर दिखावटी असर वाले होते हैं। मुँह से बदबू आने की समस्या हो तो इनसे कोई फायदा नहीं होता। माँस, मछली खाने के बाद मुँह जरूर साफ करें(डॉ. अनिल कुमार शर्मा,सेहत,नई दुनिया,प्रथमांक,2011)
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शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010
दूध के दांतों की देखभाल
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गुरुवार, 2 दिसंबर 2010
सुंदर और चमकीले दांतों के लिए
दांत की सफाई और पाचन क्रिया का गहरा संबंध है। जिनके दांत साफ नहीं होते, उन बच्चों को कब्ज की शिकायत बनी रहती है, इसलिए दिन में दो बार सुबह और सोते समय ब्रश करना चाहिए और सोने से पहले मीठा खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सांस में बदबू पैदा होती है। हर छह माह के अंतराल पर अपने दंत चिकित्सक से अवश्य मिलना चाहिए।
टिप्स
*पानी खूब पीएं।
*हर फूड ग्रुप से चुन कर पांच हैल्दी चीजें प्रतिदिन खाएं।
*दिन में दो बार ब्रश करें। सुबह उठ कर व सोने से पहले।
*ऐसे खाने-पीने की चीजों से परहेज करें, जिनमें मीठा ज्यादा हो।
*दो खानों के बीच दो से तीन घंटे का गैप रखें।
*डेंटिस्ट के पास नियमित विजिट करें।
*किसी कठोर चीज को दांतों से न चबाएं। कोल्ड ड्रिंक की बोतल का ढक्कन दांतों से खोलने जैसी गलती न करें।
*नॉनवेज खाने वालों को अपने दांतों की सफाई का खास ध्यान रखना होगा, क्योंकि यदि रात को उसके रेशे दांतों में फंसे रह गए तो बैक्टीरिया पैदा हो जाएंगे।
*ज्यादा चाय या कॉफी पीने से भी दांतों को नुकसान पहुंचता है(अनिल कुमार,हिंदुस्तान,दिल्ली,1.12.2010)।
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मंगलवार, 17 अगस्त 2010
किसी भी उम्र में दांत विकसित करने की तकनीक रोहतक में ईजाद
अब तक ये माना जाता रहा है कि बचपन के दांत गिरने के बाद जिंदगी में सिर्फ एक बार ही दांत आते हैं। यदि ये गिर या टूट गए तो ताउम्र नकली दांतों से काम चलाना पड़ेगा। अब बीते दिनों की बात होने जा रही है। रोहतक के डेंटल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी ने ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिससे दोबारा दांत विकसित करना संभव होगा। स्टेम सेल की मदद से खराब दांत की जगह नया दांत विकसित किया जा सकता है। डॉ. तिवारी लंदन में टूथ डेंटल पल्म स्टेम सेल एंड टूथ टिश्यू इंजीनियरिंग पर काम करके लौटे हैं। लंदन में उन्होंने स्टेम सेल कल्चर की विभिन्न विधियां सीखीं। उन्होंने चूहों पर अपनी तकनीक का प्रयोग किया, जहां उन्हें सफलता मिली। उनका मानना है कि चूहों पर स्टेम सेल तकनीक के लिए दांतों व नसों को फिर उगाने में सफलता मिलने के बाद मनुष्य में भी फिर से दांत व नसें विकसित करना संभव हो गया है। उल्लेखनीय है कि वह पिछले दिनों फेलोशिप पर लंदन गए थे। पांच महीने के लंदन प्रवास के बाद लौटे डॉ. तिवारी ने अपनी नई तकनीक के बारे में बताया। उनका दावा है कि इससे दोबारा दांत व नस उगाना संभव है। इसके लिए दांत से ही सेल लेकर दांत या नस में डालने होंगे। कुछ समय बाद फिर से दांत या नस विकसित हो जाएगी। अब तक या तो दंत चिकित्सक खराब दांत को निकालकर उसकी जगह कृत्रिम दांत लगाते या फिर नस निकालकर उसकी फिलिंग करते हैं। लेकन अब ऐसा नहीं करना होगा। उनका शोध स्टेम सेल तकनीक से रोगियों को राहत देगा, खासकर बच्चों को। बच्चों में अक्सर दांत खराब होने के मामले ज्यादा होते हैं। इसके अलावा बच्चों के दूध के दांत स्टेम सेल तकनीक में महत्वपूर्ण हैं। दूध के दांत से सेल लेकर दांत विकसित करना सरल और प्रभावी है। बड़ों में जबड़े का आखिरी दांत (अक्कल जाड़) से सेल ले कर दांत विकसित किया जा सकता है। हालांकि यह तकनीक काफी महंगी है और कालेज में अभी इस उपचार के लिए उपकरण भी नहीं हैं। लेकिन तकनीक आ गई है, उपकरण भी खरीदे जाएंगे। इसके बाद दंत रोगियों का उपचार रोहतक में ही किया जा सकेगा। डॉ. तिवारी ने बताया कि उन्हें लंदन के किंग्स कालेज की ओर से राष्ट्रमंडल फेलोशिप मिली थी। यहां उन्होंने 1 फरवरी से 30 जुलाई तक गाइज हास्पिटल किंग्स कालेज लंदन के क्रेनियो फेशियल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के अध्यक्ष व प्रोफेसर पाल शार्प डेकिन्सन की देखरेख में काम किया। यहां उनका विषय टूथ डेंटल पल्म स्टेम सेल एंड टूथ टिश्यू इंजीनियरिंग था। उनकी इस क्लिनिकल ट्रेनिंग के पूरा होने के बाद रॉयल कालेज आफ सर्जन्स इंग्लैंड की ओर से मान्यता भी दी गई है(विकास सैनी,दैनिक जागरण,रोहतक,17.8.2010)।आगे चलें...
सोमवार, 16 अगस्त 2010
टेढ़े-मेढ़े दांत
डॉ. अमूल्य चड्ढा के अनुसार बच्चों के टेढ़े-मेढ़े दांत जमने की कई वजहें हैं। कई बच्चों को बचपन से ही अंगूठा चूसने की आदत होती है, अगर यह आदत छह साल की उम्र के बाद भी लगातार रहती है तो बच्चों के दांत टेढ़े मेढ़े जम जाते हैं। जो बच्चे छोटी उम्र से अपने माता-पिता से दूर रहते हैं, उनको भी ज्यादा समय तक असुरक्षा की भावना होने से, अंगूठा चूसने की आदत हो जाती है। दूसरा, दूध के दांत यदि समय से पूर्व या देर से गिरते हैं तो भी सेकेंडरी अर्थात स्थायी दांत टेढ़े-मेढ़े जमते हैं। इसके अलावा अगर माता-पिता के दांत टेढ़े-मेढ़े जमे हों तो भी बच्चों के दांत टेढ़े-मेढ़े जमने की संभावना रहती है। टेढ़े-मेढ़े दांतों की सफाई अच्छी तरह से नहीं हो पाती है। इसकी वजह से जिंजिवाइटिस पेरियोडोंटाइटिस अर्थात् आम भाषा में दांतों का पायरिया रोग हो जाता है। इसमें दांतों की हड्डी गल जाने से दांत ढीले होकर गिर जाते हैं। ऐसे में ऑथरेडोंटिक ट्रीटमेंट के द्वारा दांतों में फिक्स्ड ब्रेसिज या स्पेशल तार लगाकर उन्हें सीधा किया जाता है। यह पूरी तरह से दर्दरहित प्रक्रिया है। इन ब्रेसिज को दस से बारह महीनों के लिए फिक्स कर दिया जाता है।
डॉ. चड्ढा हिदायत देते हुए बताते हैं कि टेढ़े-मेढ़े दांतों की समस्या को हल्के से नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आगे जाकर ऐसे बच्चों को एंकरिंग, एयर होस्टेस तथा मॉडलिंग जैसे प्रोफेशन में जाने में बड़ी दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों में हीन भावना उत्पन्न होने की संभावना भी अधिक रहती है। इलाज के दौरान ब्रेसिज लगने के बाद बच्चों को चिपचिपी चीजें, जैसे बर्गर, पित्जा, चॉकलेट, टॉफी तथा पास्ता आदि खाने से पूरी तरह से परहेज करना चाहिए। जितना जल्दी हो सके इस समस्या से निजात पाने के लिए अपने दांतों के डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।
(इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के डेंटल सलाहकार एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन प्रोफेसर डॉ. अमूल्य चड्ढा से अनिल कुमार की बातचीत पर आधारित,हिंदुस्तान,दिल्ली,12.8.2010))
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मंगलवार, 10 अगस्त 2010
स्वस्थ दाँतों के लिए....
मेरी मां की उम्र 48 वर्ष है। सुबह उठने परउनके मुंह में कड़वा लगता है। दांतों से खून भी आता है। मुंह में छाले की तकलीफ से भी पीडि़त हैं। क्या करूं। -कपिल, बंगलाबाजार, लखनऊ मुंह शरीर का आइना होता है। पेट खराब होने पर ऐसा होता है। उनके शरीर में विटामिन की कमी है। इसलिए गालों में जलन आदि की भी तकलीफ रहती होगी। आपको चाहिए कि तुरंत किसी चिकित्सक के पास जाकर उनका इलाज करायें। मेरी उम्र 68 वर्ष है। कई दांत निकलवा चुका हूं। बचे हुए दांत भी घिस गए हैं। कृपया इलाज बतायें। - विद्यासागर, राजाजीपुरम, लखनऊ इसके लिए आपको चिकित्सालय आना होगा। यदि आपके दांत ठीक होने लायक होंगे तो उनका इलाज किया जाएगा। सभी दांत खराब होने की स्थिति में पूरी बत्तीसी लगवानी पड़ेगी। मेरी मां की उम्र 50 वर्ष है। उनके मसूढ़ों में सूजन रहती है और खून भी आता है। क्या करना चाहिए? - अभिषेक, इंदिरानगर, लखनऊ मसूढ़ों में खून आना व सूजन होना पायरिया की निशानी है। इसके लिए उनके दांतों की स्केलिंग करवाने की जरूरत है। जरा भी लापरवाही न बरतते हुए तुरंत उन्हें दंत चिकित्सक के पास ले जाएं। मुंह के बायी तरफ के दांत में दर्द रहता है। ठंडा पानी भी लगता है लेकिन कीड़ा नहीं लगा है। मुझे क्या करना चाहिए? - प्रीति पाण्डेय, फैजाबाद आपको सबसे पहले अपने दांत का एक्सरे कराना चाहिए। दांतों में फैक्चर या जगह बन गई होगी। ऐसी स्थिति के निराकरण के लिए दांतों के लिए पेस्ट भी आते हैं। आपको चाहिए कि तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज शुरू करें। मेरा दस साल का बेटा है। उसके दांत में कीड़ा लगने से दर्द बना रहता है। दर्द निवारक दवाएं देती हूं। कृपया समाधान बतायें। -संध्या, फतेहपुर, बाराबंकी अभी बच्चे के दूध के दांत होंगे। उसका तुरंत इलाज कराते हुए सबसे पहले एक्सरे करवायें। उसके दांतों में पस भी भरा हो सकता है। सही इलाज न मिलने पर आगे निकलने वाले दांत भी खराब हो सकते हैं। इसलिए आपको चाहिए कि जरा भी कोताही न बरतते हुए निकट के सरकारी अस्पताल जाएं। मैने एक साल पहले बायीं तरफ का एक दांत खराब हो जाने की वजह से निकलवाया था। अब उस जगह से लसलसा पदार्थ निकलता रहता है। दर्द भी रहता है क्या करूं? - राम मोहन मिश्रा, फैजाबाद एक साल हो जाने पर सबकुछ ठीक हो जाता है लेकिन कभी-कभी दांत निकलवाने पर भी इसका कुछ हिस्सा रह जाता है। जिससे इंफेक्शन हो जाता है। ऐसे में दांत निकलवाने वाले चिकित्सक के पास इलाज कराएं। उस दांत का एक्सरे जरूर करा लें। मेरी उम्र 62 वर्ष है। बांयी ओर कई दांत निकल गए हैं और कुछ हिलते भी रहते हैं। क्या करूं? - केपी सिंह, लखनऊ आपके दांतों में पायरिया की शिकायत हो सकती है। कुछ दांत निकल जाने पर अन्य में जगह भी बन जाती है। इससे अन्य दांत हिलने लगते हैं। आप चिकित्सक से दांतों की सफाई अवश्य करवाएं। दिन में सुबह शाम ब्रश जरूर करें। प्रयास करें कि इलाज कर बचे दांतों को गिरने न दें। मेरी आठ वर्ष की बेटी के जबड़े में आगे के दांत नहीं गिरे हैं लेकिन पीछे के दांत आ गए हैं। क्या आगे कोई परेशानी हो सकती है? - अजय, हरदोई सामान्य तौर पर छह साल की उम्र तक सारे दांत गिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में आगे निकलने वाले दांत टेढे़-मेढ़े हो सकते हैं। आपको तत्काल किसी वरिष्ठ चिकित्सक से आगे के दूध के दांत निकलवा दें। इससे नये निकलने वाले दांत खराब नहीं होंगे। मेरी पत्नी के पिछले तीन दिन से दर्द है। नीचे के दांत काले हो गए हैं। सूजन भी बनी हुई है क्या करूं? - योगेश चन्द्र योगी, फैजाबाद कीड़ा लगने पर दांत अंदर से खोखला हो जाता है। सामान्य स्थिति में केविटी भर कर इलाज किया जाता है। नसों तक इंफेक्शन हो जाने पर रूट कैनाल थेरेपी से इलाज संभव है। पत्नी को सरकारी अस्पताल ले जाकर तुरंत इलाज कराएं। बचपन में मेरे दांत टेढ़े-मेढ़े निकले थे। ये दिखने में खराब लगते हैं और दांतों को साफ करने में भी परेशानी होती है। कोई उपाय बतायें।-बुद्धराम शुक्ला, श्रावस्ती बचपन से टेढ़े-मेढ़े दांत की यह परेशानी आगे भी बनी रहेगी। आपको साल में दो बार जाकर चिकित्सक से दांतों की सफाई करानी चाहिए। इससे आपके दांत साफ रहा करेंगे। साथ ही दांत साफ करते समय मुलायम ब्रश का ही इस्तेमाल करें। मेरे मसूढ़ों से खून आता है। मुंह से बदबू भी आती है। मसूढ़े के पिछले दांत में पस बना हुआ है। कोई अच्छा मंजन भी सुझायें।- प्रभाकर, फैजाबाद आपके मसूढ़े में पायरिया है। किसी प्रशिक्षित चिकित्सक से इलाज व साल में दो बार अपने दांतों की सफाई कर अवश्य करवाएं। प्रतिदिन सुबह शाम ब्रश करना अपनी दिनचर्या में शुमार करें। साथ ही नमक व गुनगुने पानी से दिन में सात-आठ बार कुल्ला करें। इससे आपकी की साठ प्रतिशत तकलीफ खत्म हो जाएगी। मेरे मुंह के ऊपरी जबड़े में पीछे दर्द रहता है। वहां का कुछ हिस्सा काला दिखायी पड़ता है। यह तकलीफ पिछले कई दिनों से बनी हुई है। कृपया कोई समाधान बतायें। -पारुल, लखनऊ दांत को देखकर ही सही इलाज बताना संभव होगा। आप तत्काल चिकित्सक को दिखाकर कर इलाज शुरू करवाएं। शुरुआती दौर में फिलिंग से ठीक हो सकता है। गंभीर स्थिति में रूट कैनाल थेरेपी इसका इलाज है। अत: इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। मेरी उम्र 62 वर्ष है। ब्लड प्रेशर की शिकायत है। मेरे मसूढ़ों के पीछे की तरफ दर्द व सूजन रहती है। दर्द की वजह से रात में सो नहीं पाती हूं। कृपया इलाज बतायें। - मधु श्रीवास्तव, राजाजीपुरम, लखनऊ ब्लड प्रेशर की तकलीफ होने पर भी मसूढे़ कमजोर हो जाते हैं। इसके लिए तुरंत दांत का एक्सरे कराकर किसी प्रशिक्षित चिकित्सक से इलाज कराएं। मेरे दांतों से खून आता है। मंजन करने के बाद भी मुंह से बदबू आती रहती है जबकि पान-मसाला आदि का सेवन नहीं करता हूं। क्या इलाज करें? -जावेद हुसैन, फैजाबाद आप पायरिया नामक बीमारी से पीडि़त हैं। इसके लिए हर साल नियमित रूप से दो बार दांतों की सफाई अवश्य करवाएं। घर में नमक मिले गुनगुने पानी से कई बार कुल्ला करें। आराम मिलेगा। इसके साथ ही किसी दंत चिकित्सक से इस बीमारी का इलाज भी कराएं। मसूढ़ों से खून आता है क्या करूं? यह भी बतायें कि हम अपने दांतों को स्वस्थ्य कैसे रख सकते हैं?-आरती, आलमनगर, लखनऊ मसूढ़ों से खून आता है तो इसके लिए तत्काल किसी चिकित्सक से सम्पर्क करें। दांतों को स्वस्थ और सुंदर रखने के लिए जैसे उंगलियों के नाखून काटना एक नियमित प्रक्रिया है उसी तरह दांतों की सफाई भी सामान्य बात है। दांतों को अच्छा बनाये रखने के लिए चॉकलेट व दांतों के बीच में फंसने वाली चीजों को खाने से भी परहेज करना चाहिए। मेरे मुंह के 75 प्रतिशत दांत हिल रहे हैं। दर्द होने के बाद तीन-चार दांत गिर भी चुके हैं। कृपया इलाज बतायें। - अरुण कुमार सिंह, ऐशबाग, लखनऊ 75 प्रतिशत दांत हिलने से यह प्रतीत होता है कि 50 प्रतिशत मसूढ़े खराब हो गए हैं। आप प्रतिदिन सुबह-शाम ब्रश अवश्य करें। नमक व गुनगुने पानी से कुल्ला करना अपनी आदत में शुमार करें। तत्काल किसी वरिष्ठ दंत चिकित्सक के पास जाकर इलाज जरूर करायें। मेरा ढाई साल का बेटा है जिसके सामने के दांत आगे की ओर भाग रहे हैं। उसकी अंगूठा चूसने की भी आदत है। हमें क्या करना चाहिए?- हुसैन जमाल, बलरामपुर यह बच्चे के लिए बड़ी समस्या है। इससे आने वाले समय में उसका जबड़ा यू के बजाय वी का आकार ले सकता है। इसलिए अंगूठा चूसने की आदत को छुड़ाने के लिए हैविट बे्रकिंग एप्लाइंस दी जाती है जिसमें छोटे-छोटे से कांटे होते हैं। उसके उपयोग से बच्चा यह आदत छोड़ देता है। दांतों का क्राउन घिस गया है। गरम-ठंडा दोनों लगता हैं। इसके लिए क्या कोई इलाज संभव है? - जेएस सोनी, गोंडा दांत के नीचे पीलापन होता है। इसके ऊपर सफेद एक परत होती है। परत उतर जाने पर दांत में गरम-ठंडा लगने लगता है। इसे बचने लिए इसकी कैपिंग की जाती है। इसके सिवा डी-सेस्टाइविंग मंजन भी आता है। इसे ब्रश करने से पांच मिनट पहले दांत में लगा दिया जाता है(दैनिक जागरण,लखनऊ,10.8.2010)।आगे चलें...
शनिवार, 24 अप्रैल 2010
पंजाब में डेंटल टूरिज्म की संभावना बढी
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