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"ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आप फलां तरीक़े से स्वस्थ हैं और वो अमुक तरीक़े से। आप या तो स्वस्थ हैं या बीमार । बीमारियां पचास तरह की होती हैं;स्वास्थ्य एक ही प्रकार का होता है"- ओशो
सोमवार, 28 मई 2012
जीवन-शैली में बदलाव से संभव है रक्तचाप नियंत्रण
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मंगलवार, 1 मई 2012
घातक है खून का थक्का
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गुरुवार, 8 मार्च 2012
विश्व गुर्दा दिवस विशेषः मधुमेह और रक्तचाप हैं गुर्दे के दुश्मन
मधुमेह से प्रभावित होती हैं किडनी
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गुरुवार, 7 जुलाई 2011
शुक्रवार, 1 जुलाई 2011
आशंका होते ही कराएं ब्लड प्रेशर की जांच
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2011
निम्न रक्तचाप में लाभकारी है तालीयोग
कैसे करें ताली योग
शुरू-शुरू में इसका अभ्यास कम-से-कम 2 मिनट अवश्य करना चाहिए और फिर इसको बढ़ाते हुए लगभग रोज 10 मिनट तक अभ्यास करना चाहिए(दैनिक भास्कर,उज्जैन,28.4.11)।
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मंगलवार, 25 जनवरी 2011
रक्तदान
- मिर्गी या कुष्ठ रोग वाले।
- एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर रखने वाले।
- जिन्होंने टैटू बनवाया हो। ये लोग टैटू बनवाने के छह महीने बाद दे सकते हैं।
- दांत की फिलिंग या इलाज कराने वाले। ऐसे लोग इलाज के तीन महीने बाद दे सकते हैं।
- मलेरिया और टाइफाइड वाले। मलेरिया वाले ठीक होने के तीन महीने बाद और टाइफाइड ठीक होने के एक साल बाद खून दे सकते हैं।
- टेटनस या प्लेग वाले ठीक होने के 15 दिन बाद दे सकते हैं।
- जिनका वजन एकदम पांच-दस किलो कम हो जाए। ऐसे लोगों को जांच के बाद ही ब्लड देना चाहिए।
- जिन्हें एड्स का कोई भी लक्षण है।
- जिनका हीमोग्लोबिन 18 या 19 से ऊपर चला जाए। (ऐसे लोग कभी नहीं दे सकते।)
- जो इंसुलिन ले रहे हैं। शुगर अगर दवाओं के जरिये कंट्रोल में है तो दे सकते हैं।
- जिन्हें सिरदर्द है या जिनका पेट खराब है।
ब्लड की जरूरत
इन स्थितियों में ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है:
- एक्सिडेंट के मामले।
- डिलिवरी के मामले।
- किसी भी तरह की ब्लीडिंग में।
- सभी बड़े ऑपरेशनों में।
- अंग ट्रांसप्लांटेशन में।
- थैलीसीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया, कैंसर के इलाज के वक्त, कीमोथैरपी के वक्त, डायलिसिस, हीमोफीलिया और संबंधित बीमारियों में।
- डेंगू, प्लेटलेट्स की कमी और प्लाज्मा में रेड सेल कम होने पर। इसके अलावा भी बहुत-सी बीमारियां हैं जिनमें ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
- एनीमिया है या कमजोरी है, तो ब्लड न चढ़वाएं। ऐसे लोग अपना हीमोग्लोबिन बिना ब्लड चढ़वाए दूसरे तरीकों से भी बढ़ा सकते हैं। जैसे आयरन सप्लिमेंट, आयरन इंजेक्शन या आयरन वाले खानपान से। किसी को ब्लीडिंग है तो पहले ब्लीडिंग रोक दें।
डोनेशन करने वाले रखें ध्यान
देने से पहले
- जब भी खुद को फ्री और स्वस्थ महसूस करें, तनाव में न हों, ब्लड दे सकते हैं।
- सुबह नाश्ता करने के एक-डेढ़ घंटे के अंदर ब्लड दे सकते हैं, पर फौरन बाद नहीं।
- खाली पेट ब्लड नहीं देना है। सामान्य खाना खाने के बाद ही ब्लड दें।
- ईमानदारी से अपनी बीमारियों के बारे में पूरी जानकारी डॉक्टर को दें। यह ब्लड लेने व देने वाले दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। यह भी बताएं कि कौन-कौन सी दवाएं ले रहे हैं।
- मान्यता प्राप्त बैंक में ही ब्लड दें। इसकी पहचान उनके फॉर्म पर लिखे लाइसेंस नंबर से हो जाएगी। वे आपको अपना कार्ड देंगे जिस पर पूरी डिटेल लिखी होगी।
- नाको की वेबसाइट से भी मान्यता प्राप्त संस्थानों का पता लगाया जा सकता है।
देने के बाद
- डोनेशन के बाद पांच से दस मिनट आराम करना होता है।
- उस दिन नॉर्मल डाइट ही लें, फिर भी पानी, दूध, चाय-कॉफी, जूस आदि लिक्विड ज्यादा लेना अच्छा रहता है।
- ब्लड डोनेट करने के बाद ड्राइविंग समेत सभी रुटीन काम किए जा सकते हैं।
- ब्लड देने के बाद जिम नहीं जाना है और सीढि़यां भी नहीं चढ़नी हैं। एक दिन के बाद से ये काम भी कर सकते हैं।
- उस दिन स्मोकिंग और ड्रिंक न करें।
- ब्लड देने के तीन महीने बाद ही दोबारा ब्लड दिया जा सकता है। जिनके ब्लड से प्लाज्मा या प्लेटलेट्स लिए गए हैं, अगर उनमें सब कुछ नॉर्मल है, तो वे हफ्ते-दस दिन बाद भी ब्लड दे सकते हैं।
डरें नहीं, कुछ फैक्ट्स जान लें
- ब्लड बैग दो तरह के होते हैं। एक, साढ़े तीन सौ एमएल का और दूसरा साढ़े चार सौ एमएल का। जिनका वजन 60 किलो से कम है, उनसे साढ़े तीन सौ एमएल ब्लड ही लेते हैं। जिनका 60 किलो से ज्यादा है, उनसे साढ़े चार सौ एमएल लिया जाता है।
- डोनेशन के वक्त जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम बॉडी 24 से 72 घंटे में पूरा बना लेती है।
- अगर आप सामान्य ब्लड डोनेशन करते हैं तो आप तीन जिंदगियां बचाते हैं क्योंकि आपके ब्लड में प्लेटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा होते हैं, जो तीन लोगों के काम आ सकते हैं।
- ब्लड देने से इंफेक्शन नहीं होता क्योंकि इसमें डिस्पोजेबल सिरिंज और सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
- अगर किसी का ब्लड एचआईवी पॉजिटिव निकल आए तो ब्लड बैंक द्वारा उसे फोन से जानकारी दी जाती है। फिर सरकारी विभाग को जानकारी दी जाती है, जो पॉजिटिव शख्स को बुलाकर उसकी काउंसलिंग करते हैं। ऐसे शख्स से लिए गए ब्लड को इस्तेमाल नहीं किया जाता। उसे नष्ट कर दिया जाता है।
अकसर पूछे जाने वाले कुछ सवाल
ब्लड डोनेट करने से क्या कमजोरी आती है?
कोई कमजोरी नहीं आती। हां, घबराहट की वजह से कुछ लोगों की पल्स तेज हो जाती है, पसीना आ सकता है, बीपी कम हो सकता है, उल्टी-सी महसूस हो सकती है। किसी-किसी को झटके भी आ सकते है, पर इन सबसे घबराने की जरूरत नहीं है। थोड़ी देर में अपने आप सब ठीक हो जाता। ब्लड देने के बाद कुछ खाने को देते हैं। उससे भी सब ठीक हो जाता है।
लगातार ब्लड देने वालों को एनीमिया जैसी बीमारी हो सकती है?
ऐसा नहीं होता। दरअसल, शरीर में ब्लड की उम्र तीन महीने ही होती है यानी तीन महीने बाद दोबारा रेड सेल्स बनते हैं। अगर ब्लड डोनेट नहीं करेंगे तो सेल तीन महीने बाद खत्म हो ही जाएंगे। बोन मैरो ब्लड बनाता है। इसे नहीं नहीं लिया जाता, सिर्फ रेड सेल लिए जाते हैं। ब्लड देने से कॉलेस्ट्रॉल और चर्बी जैसी चीजें निकल जाती हैं। सौ-सौ बार ब्लड देने वालों का हीमोग्लोबिन भी 14-15 बना रहता है। जो लोग रेगुलर ब्लड देते हैं, वे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। उनके दिल आदि अंग ज्यादा अच्छी तरह काम करते हैं। दिल से संबंधित बीमारी नहीं होती। ऐसे लोगों के चेहरे पर चमक बनी रहती है। पूरा चैकअप भी हो जाता है और समाज सेवा भी हो जाती है।
ब्लड देने के बाद चक्कर आ जाए, तो क्या करें?
अगर खाली पेट ब्लड दे रहे हैं तो कई बार चक्कर आ सकता है। कुछ लोगों को घबराहट, उलटी होना, पसीना आना या थोड़ी देर के लिए कमजोरी महसूस हो सकती है, पर इसमें घबराने की बात नहीं है। ऐसे में थोड़ी देर बैठ जाएं या लेट जाएं और पैरों को ऊपर कर दें जिससे खून का बहाव दिल की तरफ हो जाए। पल्स और बीपी ठीक है तो कपड़े ढीले करके लेट जाएं और आराम करें। माथे और गर्दन पर थोड़ा पानी लगा दें और कुछ पानी पिला दें। पहली बार ब्लड देने वालों के साथ ऐसा हो सकता है। यह स्थिति 5-7 मिनट में ठीक हो जाती है।
कितना समय लगता है ब्लड डोनेशन में?
अगर लाइन न लगी हो, तो फॉर्म भरने से लेकर डॉक्टरी जांच, ब्लड डोनेशन और रिफ्रेशमेंट लेने तक में आधा घंटा लग सकता है।
ब्लड बैंक
- ब्लड बैंक से ब्लड पैसे देकर नहीं लिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने प्रफेशनल डोनर्स को 1998 में बैन कर दिया था। ब्लड के बदले ब्लड दिया जाता है।
- मजबूरी में बिना डोनर के भी स्वैच्छिक संस्थाएं ब्लड देती हैं। उनके पास अच्छा स्टॉक और ब्लड देने वाले लोगों का डेटा बैंक होता है। इसके लिए चार्ज लिया जाता है।
- अगर मरीज सरकारी अस्पताल में है और इमरजेंसी है तो ब्लड फ्री में ही जाता है, लेकिन सामान्य स्थिति में डोनर चाहिए। कुछ बैंक थैलीसीमिया वालों को फ्री में देते हैं। केस देखकर जरूरत के हिसाब से भी बिना डोनर या पैसे के मिल जाता है।
- दिल्ली में बाहर से आए या एक्सिडेंट और इमरजेंसी मामलों में भी बिना डोनर के ब्लड दे दिया जाता है।
- प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल मरीजों को सर्विस चार्ज लेकर ही देते हैं।
- प्राइवेट अस्पताल में एडमिट होने वालों को आमतौर पर प्राइवेट ब्लड बैंक फ्री नहीं देते ।
- कुछ ग्रुप्स भी हैं जो ब्लड डोनेट करते हैं, जिनका पता इंटरनेट से लग सकता है।
- दिल्ली में 53 ब्लड बैंक हैं जिनमें 22 नाको समर्थित हैं।
डोनर्स
- डोनर दो तरह के होते हैं : रिप्लेसमेंट डोनर और वॉलंट्री डोनर।
- रिप्लेसमेंट डोनर के मामले में ब्लड देने के बदले में किसी और का ब्लड लिया जाता है। रिप्लेसमेंट डोनर का कंसेप्ट अब बंद हो रहा है क्योंकि इसमें भी घपले हो रहे हैं। अक्सर इन मामलों में पैसा लेकर खून बेचने वाले प्रफेशनल आकर ब्लड डोनेट कर देते हैं। वे अपना ब्लड बेचते हैं। ऐसा ब्लड लेने में जबर्दस्त रिस्क है।
- अपनी इच्छा से ब्लड देने वालों को वॉलंट्री डोनर कहा जाता है। ब्लड देने के बाद उन्हें पता नहीं कि उनका ब्लड किसे चढ़ाया जाएगा।
कहां करें ब्लड डोनेट
इन संस्थाओं में ब्लड डोनेट किया जा सकता है :
1. इंडियन रेडक्रॉस ब्लड बैंक
पता : रेडक्रॉस रोड, नई दिल्ली-110001
फोन : 2371 1551, 2371 6441/2/3 (एक्स 331, 332),
वेबसाइट : www.indianredcross.org
समय : सुबह 8 से रात 8 बजे तक
दिन : सातों दिन
ये लोग तमाम संस्थाओं में कैंप भी लगाते रहते हैं।
2. लॉयंस क्लब ब्लड बैंक
पता : एके 100, लायंस ब्लड बैंक, नियर ए. एल. ब्लॉक, शालीमार बाग, नई दिल्ली
फोन : 9717 897 500 व 9717 897 520
लैंडलाइन : 4225 8080 व 4225 8494
वेबसाइट : www.lionsbloodbank.org
ईमेल : lionsbloodbank@hotmail.com
समय : सुबह 9 से शाम 6 बजे तक
दिन : संडे समेत सातों दिन फोन करके आएं
ये लोग तमाम संस्थाओं में कैंप भी लगाते हैं। इनके लगभग सभी कर्मचारी रेगुलर ब्लड डोनर हैं।
3. रोटरी क्लब ब्लड बैंक
पता : 56, 57 तुगलकाबाद इंस्टिट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली-110062
फोन : 2905 4066/7/8/9
वेबसाइट : www.rotarybloodbank.org
समय : सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक
दिन : सोमवार से शनिवार तक
ये लोग तमाम संस्थाओं में कैंप भी लगाते हैं।
4. स्माइल फॉर ऑल
पता : पीपी-8 पीतमपुरा, नजदीक गोपाल मंदिर, दिल्ली-88
ब्लड ऑन डिमांड उपलब्ध है, जिसके तहत भारत में कहीं भी कभी भी जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी निशुल्क रक्तदाता उपलब्ध करवाया जाता है। संस्था के अध्यक्ष जीएस कपूर के मुताबिक, दिन-रात कभी भी इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है : 9212 131 416 / 9266 666 666 / 9266 616 161 / 9266 636 363. यहां आप ब्लड डोनर के रूप में अपना नाम भी लिखवा सकते हैं। वेबसाइट है : www.smileforall.org
5. सत्य सांई ऑर्गनाइजेशन
श्री सत्य साई सेवा ऑर्गेनाइजेशन के दिल्ली इंचार्ज जतिंदर चीमा का कहना है कि ब्लड लेने वाले इस वेबसाइट पर जाकर अपनी जरूरत बताकर ब्लड ले सकते हैं। वेबसाइट है- www.saidelhi.org
6. सेल्फलैस सर्विस सोसायटी
युवाओं द्वारा बनाई गई यह संस्था वेबसाइट के माध्यम से काम करती है। संस्था के सेक्रेट्री अंशुल का कहना है कि संस्था से बड़ी संख्या में डोनर्स जुड़े हुए हैं। ब्लड डोनेट करने और ब्लड लेने के लिए पूरे भारत में इस वेबसाइट से संपर्क किया जा सकता है।
वेबसाइट- www.selflessservice.org
ईमेल-service.selfless@gmail.com
फोन-999999-6860
समय-किसी भी समय संपर्क किया जा सकता है।
दिन-सातों दिन
ये संस्थाएं ब्लड डोनेशन के लिए स्कूल और कॉलेजों में कैंप लगाती हैं, रेडियो व टीवी पर कार्यक्रम देती हैं और पोस्टर व अखबारों में विज्ञापनों के जरिये भी ब्लड इकट्ठा करती हैं। इन संस्थाओं के अलावा तमाम सरकारी अस्पतालों में जाकर भी ब्लड डोनेट किया जा सकता है।
एक्सर्पट्स पैनल
डॉ. वनश्री सिंह, डायरेक्टर, इंडियन रेडक्रॉस ब्लड बैंक
डॉ. सुनील देवानी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन ऑफिसर, कालरा हॉस्पिटल
डॉ. पूनम श्रीवास्तव, मेडिकल डायरेक्टर, लॉयंस ब्लड बैंक
डॉ. अंजू वर्मा, चीफ मेडिकल ऑफिसर, रोटरी ब्लड बैंक
जी. एस. कपूर, अध्यक्ष, स्माइल फॉर ऑल
(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,23.1.11)
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मंगलवार, 14 दिसंबर 2010
रक्तदान में पुरुषों से पीछे हैं महिलाएं
अंडरवेट बनता है एक बड़ा कारण
148 बार रक्तदान कर सेंचूरियन ब्लड डोनर का खिताब पाने वाले राजेंद्र गर्ग बताते हैं कि कालेजों में ब्लड कैंपों में रजिस्ट्रेशन के लिए काफी लड़कियां आती हैं। मगर इनमें से आधे से ज्यादा लड़कियां अंडरवेट होने के कारण ब्लड डोनेट नहीं कर पाती(दैनिक भास्कर,अम्बाला,13.12.2010)।
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शुक्रवार, 19 नवंबर 2010
बार-बार खून चढ़ाने से मिलेगी मुक्ति
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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010
उच्च रक्तचाप
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गुरुवार, 23 सितंबर 2010
उच्च रक्तचाप
मेट्रो शहर से ताल्लुक रखने वाले युवा दिल को नजरअंदाज कर रहे हैं। बात-बात पर यदि आपको गुस्सा आता है और दिनभर में दो घंटे भी तनाव के घेरे में रहते हैं तो सचेत हो जाएं। शुरुआत में एंजाइना के रूप में नजर आने वाला दिल का दर्द दिल की बीमारी बन सकता है।
कब हो जाएं सावधान अगर आप सोचते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ अपना दिल भी आपका साथ दे तो इसके लिए दिनचर्या व खानपान में बदलाव करना होगा। दिल्ली डायबिटिक रिसर्च सेंटर के ताजा अध्ययन कहते हैं कि दिल की बीमारी के क्रम में युवाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। पहले 55 से 60 की उम्र में दिखने वाले कार्डिक अरेस्ट अब 40 से 50 साल की उम्र में भी देखा जा रहा है। युवाओं में मूल रूप से सिगरेट व एल्कोहल सेवन की अधिकता उनके दिल के लिए घातक सिद्ध हो रही है, जिसका असर हृदय की धमनियों में संकुचन में देखा जाता है।
साइलेंट किलर है उच्च रक्तचाप दिन भर में 4 से 5 बार यदि आपको गुस्सा सामान्य से अधिक आता है तो इसका सीधा मतलब है आपका दिल बीमारी मुहाने पर खड़ा है। रक्तचाप को दिल की बीमारियों के साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है। चिकित्सक रक्तचाप का प्रमुख कारण अधिक नमक के सेवन को मानते हैं। दरअसल, शरीर में नमक यानी सोडियम पोटेशियम की अधिक मात्रा अनजाने में ही रक्त में पहुंच जाती है। पैकेट में बंद चिप्स, अचार व नमकीन वगैरह में इस तरह का सोडियम पोटेशियम पाया जाता है जो सीधे ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ा देता है। यही कारण है कि चिकित्सक प्रिजरवेटिव फूड की जगह फ्रेश सब्जियां और फाइबर व होल ग्रेन अनाज खाने सलाह अधिक देते हैं।
कब हो जाएं सचेत - कंधों में हल्का दर्द हमेशा बने रहना। - पेट के दाहिनी हिस्से में दर्द व सीने में चुभन। - जबड़ों में हल्की सी टीस भी हृदय रोग का लक्षण है।
किसका रखें ध्यान - 20 से 80 साल के किसी भी व्यक्ति के रक्तचाप का उच्च स्तर (सिस्टोलिक)130 से अधिक निम्न रक्तचाप (डायस्टोलिक) 80 से कम नहीं होना चाहिए। - फास्टिंग में रक्त में शुगर की मात्र 100 एमजी व खाने के बाद (पीपी) में 140 से अधिक न हो। - एलडीएल (बैड कोलेस्ट्राल) की मात्र 100 मिलीग्राम से अधिक हो तो सचेत हो जाएं। - बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) यदि 23 है तो आप स्वस्थ माने जा सकते हैं।
किससे करें परहेज - खाने में अधिक शुगर और अधिक नमक काब्रोहाइड्रेड का स्तर बढ़ाता है। - फ्रिज में रखे गए फलों की अपेक्षा फ्रेश फल खाएं, फ्रिजर फलों में शर्करा बढ़ जाती है। - रिफाइंड अनाज की जगह 100 प्रतिशत होल ग्रेन व फाइबर युक्त अनाज है सुरक्षित। - सिगरेट, एल्कोहल व तनाव माने गए हैं।(हिंदुस्तान,दिल्ली,21.9.2010)
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शुक्रवार, 20 अगस्त 2010
लहसुन से ब्लड प्रेशर नियंत्रण
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मंगलवार, 13 जुलाई 2010
ब्लडप्रेशरःकुछ सामान्य जिज्ञासाएं
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